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Saharanpur News: खुद को न्यायाधीश समझ बैठा लिपिक, दो एफआईआर दर्ज

Thu, 07 Sep 2023 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Sep 2023 11:42 PM IST
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Clerk mistaking himself as a judge, two FIRs registered
-- आरपीएफ थाने में रखी 535 पत्रावालियों के निस्तारण में की गड़बड़ी
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-- जिला जज के आदेश पर दो न्यायाधीश ने आरपीएफ थाने पर पहुंच की थी जांच


संवाद न्यूज एजेंसी

सहारनपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के कार्यालय का एक लिपिक खुद को ही न्यायाधीश समझ बैठा। आरपीएफ थाने में रखी चालान से संबंधी 535 पत्रावलियों का निस्तारण करने के बजाए उनमें हेराफेरी की गई। सहारनपुर अधिवक्ता बार एसोसिएशन ने मामले की शिकायत की, जिसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जिला जज के प्रशासनिक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक मधुकर शर्मा ने कोतवाली सदर बाजार में आरोपी लिपिक रोहताश सिंह के खिलाफ दो मामले दर्ज कराए।
प्रशासनिक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक मधुकर शर्मा ने दर्ज कराए मामले में बताया कि कुछ दिन पूर्व सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिला जज बबीता रानी से शिकायत की थी कि सीजेएम का लिपिक वाहनों के चालान संबंधी पत्रावलियों में हेराफेरी कर रहा है। वकीलों ने बताया था कि आरपीएफ थाने में रखी 535 फाइलों के निस्तारण में गड़बड़ी की जा रही है। इनको अदालत के दस्तावेजाें भी नहीं चढ़ाया गया। इसी तरह संभागीय परिवहन निगम द्वारा काटे वाहनों के चालान की पत्रावलियों में भी गड़बड़ी की जा रही है। इसका पता लगते ही जिला जज बबीता रानी ने मामले की जांच दो न्यायाधीश से कराई।
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जांच के लिए जब न्यायाधीश आरपीएफ थाने गए तो 535 पत्रावली वहां रखी मिली, जिनको कब्जे में लिया गया। इसके बाद दोनों न्यायाधीश रिपोर्ट जिला जज को दी। इस पर जिला जज के प्रशासनिक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक मधुकर शर्मा की तरफ से कोतवाली सदर बाजार में दो तहरीर दी गई, जिसके बाद आरोपी लिपिक रोहताश सिंह के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए। एक मामला आरपीएफ थाने से और दूसरा संभागीय परिवहन निगम द्वारा काटे गए चालान में गड़बड़ी करने से संबंधित है। दर्ज मामले में आरोप लगाया कि धोखाधड़ी करते हुए अनुचित लाभ के लिए रोहताश सिंह ने हेराफेरी की है। एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि रोहताश सिंह के खिलाफ दो मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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तीन वर्ष की हैं पत्रावली


दर्ज कराए मामले में बताया कि तीन साल की पत्रावली है, जो आरपीएफ और संभागीय परिवहन निगम से संबंधित है। ऐसे में आरपीएफ थाने के पुलिसकर्मियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि, तीन साल से रखी पत्रावलियों के बारे में जानकारी नहीं ली गई है। मामले में अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी फंस सकते हैं।
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