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तिरपाल में कक्षाएं, बांस के झोपड़ों में स्कूल

Wed, 30 Nov 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Wed, 30 Nov 2016 12:51 AM IST
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Classes in tarpaulin, bamboo school Jopdon
छप्पर के नीचे पढ़ते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में भले ही शिक्षा में सुधार के लिए प्रतिवर्ष सहारनपुर में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हों, मगर चिलकाना के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की हालत कई वर्षों से जस की तस है।
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हालात ऐसे है कि स्कूल के तीनों कमरों की छत टूटने के बाद 15 साल से स्कूल बांस तथा तिरपाल से बनाये गये छप्पर में चल रहा है। चिलकाना के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय सहारनपुर के शिक्षा विभाग के स्याह चेहरे को सामने लाने के काफी है।
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करीब 50 साल पहले यहां जैन समाज की इमारत में स्कूल का संचालन शुरू हुआ था। इन दोनों स्कूलों में वर्तमान में प्राथमिक कक्षाओं में 182 तथा जूनियर कक्षाओं में 42 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
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करीब 15 साल पहले जर्जर हो चुके इमारत में हादसों का खतरा बनने लगा। कमरों की इतनी खराब हालत है कि वह किसी भी वक्त धराशाही हो सकता है। छत टूटी पड़ी है। वर्षा का पूरा पानी कमरों के अंदर पहुंचता रहता है। 

नगर पंचायत तथा स्कूल के अध्यापकों ने स्कूल की हालत के बारे में शिक्षा विभाग को अनेक बार अवगत कराया है। खंड खिक्षा अधिकारी द्वारा स्कूल का निरीक्षण कर उच्च अधिकारियों को सूचित किया है कि स्कूल की हालत खराब है, कभी भी भवन धराशाही हो सकता है।

विभाग जर्जर भवन की मरम्मत इसलिए नहीं करा रहा है क्योंकि भवन किराए पर लिया गया है। उधर, भवन स्वामी जैन समाज भी स्कूल भवन की मरम्मत नहीं करा रहा है।

विभाग द्वारा स्कूल की मरम्मत नहीं कराने से स्कूल के अध्यापकों ने छात्र हित को देखते हुए अपने स्तर से रुपये एकत्र कर बांस तथा तिरपाल खरीद कर स्कूल प्रांगण में छप्पर डाल लिया तथा पढ़ाई शुरू कर दी। 

बरसात तथा सर्दी में छात्र छप्पर नुमा स्कूल में खुद को असुरक्षित महसूस करते है। स्कूल में बच्चों की संख्या को देखते हुए शिक्षा विभाग कस्बे में स्कूल भवन बनाने के पक्ष में है, लेकिन क्षेत्र में जमीन नहीं मिलने के कारण नया भवन नही बन पा रहा है। 

इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी बुद्धप्रिय सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वे खुद बुधवार को मौके पर जाकर स्कूल को दूसरी इमारत में शिफ्ट कराएंगे। 

बांस के छप्पर में चल रहे स्कूल में सर्दी के वक्त सबसे ज्यादा मुसीबत बच्चों को झेलनी पड़ती है। कुर्सी मेज की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर होता है।


सर्दी में शीतलहर के वक्त पर जमीन पर बैठने वाले बच्चों को तिरपाल में सीधे शीतलहर झेेलनी पड़ती है। इसके बावजूद  प्रशासनिक अधिकारियों ने इसकी सुध नहीं ली है।
 
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