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Saharanpur News: 60 फीसदी कचरे के सेग्रीगेशन का दावा, सर्वे में खुली पोल, निकला 43 फीसदी
Sat, 13 Sep 2025 12:21 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 13 Sep 2025 12:21 AM IST
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शकलापुरी मार्ग पर बने एमआरएफ सेंटर पर महीनों से फैला&nb
सहारनपुर। नगर निगम भले ही 60 फीसदी कचरे के सेग्रीगेशन (सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करना) का दावा कर रहा हो, लेकिन सर्वे में पोल खुलकर सामने आ गई। स्वच्छ भारत मिशन की टीम द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें 43 फीसदी कचरे का सेग्रगेशन पाया गया। यानी 57 फीसदी कचरा ऐसा है, जो बिना सेग्रगेशन के ही खेतों में दफन किया जा रहा है वह भी बिना वैज्ञानिक विधि के। ऐसी स्थिति बायोगैस प्लांट के लिए भी ठीक नहीं है।
महानगर की आबादी 8.70 लाख है। माना जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति एक दिन में 450 ग्राम कचरा पैदा करता है। इस हिसाब से नगर निगम मानता है कि महानगर से प्रतिदिन 391 टन कचरा निकलता है। नगर निगम बने 15 साल हो गए और स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुए दस साल से अधिक। इसके बावजूद नगर निगम कचरे के निस्तारण की ठोस व्यवस्था नहीं कर सका है। सफाई व्यवस्था पर प्रतिमाह करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद नगर निगम शत प्रतिशत कचरे का निस्तारण या सेगग्रेशन नहीं कर पा रहा है।
निगम अधिकारियों का दावा था कि वह 60 फीसदी (234 टन) कचरे का सेग्रीगेशन कर रहे हैं, लेकिन स्वच्छ भारत मिशन के तहत दिल्ली की टीम द्वारा किए गए सर्वे में 43 फीसदी (171 टन) ही कचरे का सेग्रीगेशन पाया गया है, जबकि 57 फीसदी कचरा बिना सेग्रीगेशन के घरों से डलावघर और वहां से खेतों में दफन किया जा रहा है। उधर, बीपीसीएल के साथ नगर निगम का समझौता हुआ है, जिसमें नगर निगम बीपीसीएल को बायोगैस बनाने के लिए कचरा देगा। कचरे की जो स्थिति नगर निगम की है वह बायोगैस प्लांट के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि प्लांट को बायोगैस बनाने के लिए 90 फीसदी गीला कचरा चाहिए। जब तक शत प्रतिशत कचरा अलग-अलग नहीं होगा, तब तक कंपनी को पर्याप्त गीला कचरा मिलना संभव नहीं।
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जनपद से पराली की समस्या होगी दूर
जो बायोगैस प्लांट लगाया जाना है, उसकी क्षमता प्रतिदिन नौ टन गैस तैयार करने की होगी। उससे 20 टन खाद भी निकलेगी। प्लांट चलाने के लिए घरों से निकलने वाले गीला कचरा चाहिए। इसके अलावा कंपनी डेयरियों और किसानों से गोबर, फसलों के अवशेष जैसे पराली, गन्ने की पत्ती, मटर के पौधे आदि शामिल हैं।
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एफएस यूनिट लगाने की तैयारी
नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण शाह ने बताया कि नगर निगम 55 से 60 फीसदी कचरे का सेग्रगेशन कर रहा है, लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण में यह 43 फीसदी आया है। जल्द ही महेश्वरी खुर्द में बायोगैस प्लांट से पहले एफएस यूनिट यानी फ्री सेग्रगेशन यूनिट लगा रहे हैं, जिससे की प्लांट को गीला कचरा उपलब्ध हो।
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महानगर की आबादी 8.70 लाख है। माना जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति एक दिन में 450 ग्राम कचरा पैदा करता है। इस हिसाब से नगर निगम मानता है कि महानगर से प्रतिदिन 391 टन कचरा निकलता है। नगर निगम बने 15 साल हो गए और स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुए दस साल से अधिक। इसके बावजूद नगर निगम कचरे के निस्तारण की ठोस व्यवस्था नहीं कर सका है। सफाई व्यवस्था पर प्रतिमाह करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद नगर निगम शत प्रतिशत कचरे का निस्तारण या सेगग्रेशन नहीं कर पा रहा है।
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निगम अधिकारियों का दावा था कि वह 60 फीसदी (234 टन) कचरे का सेग्रीगेशन कर रहे हैं, लेकिन स्वच्छ भारत मिशन के तहत दिल्ली की टीम द्वारा किए गए सर्वे में 43 फीसदी (171 टन) ही कचरे का सेग्रीगेशन पाया गया है, जबकि 57 फीसदी कचरा बिना सेग्रीगेशन के घरों से डलावघर और वहां से खेतों में दफन किया जा रहा है। उधर, बीपीसीएल के साथ नगर निगम का समझौता हुआ है, जिसमें नगर निगम बीपीसीएल को बायोगैस बनाने के लिए कचरा देगा। कचरे की जो स्थिति नगर निगम की है वह बायोगैस प्लांट के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि प्लांट को बायोगैस बनाने के लिए 90 फीसदी गीला कचरा चाहिए। जब तक शत प्रतिशत कचरा अलग-अलग नहीं होगा, तब तक कंपनी को पर्याप्त गीला कचरा मिलना संभव नहीं।
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जनपद से पराली की समस्या होगी दूर
जो बायोगैस प्लांट लगाया जाना है, उसकी क्षमता प्रतिदिन नौ टन गैस तैयार करने की होगी। उससे 20 टन खाद भी निकलेगी। प्लांट चलाने के लिए घरों से निकलने वाले गीला कचरा चाहिए। इसके अलावा कंपनी डेयरियों और किसानों से गोबर, फसलों के अवशेष जैसे पराली, गन्ने की पत्ती, मटर के पौधे आदि शामिल हैं।
एफएस यूनिट लगाने की तैयारी
नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण शाह ने बताया कि नगर निगम 55 से 60 फीसदी कचरे का सेग्रगेशन कर रहा है, लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण में यह 43 फीसदी आया है। जल्द ही महेश्वरी खुर्द में बायोगैस प्लांट से पहले एफएस यूनिट यानी फ्री सेग्रगेशन यूनिट लगा रहे हैं, जिससे की प्लांट को गीला कचरा उपलब्ध हो।