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पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में चौकीदार ने जीता कांस्य
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सहारनपुर। गांव पिलखना निवासी प्रवीण कुमार ने उड़ीसा के भुवनेश्वर में हुई राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता की शॉटपुट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश और जनपद का नाम रोशन किया है। वहां से लौटने पर नकुड़ विधायक मुकेश चौधरी और खेल प्रेमियों ने उनका स्वागत किया।
प्रवीण कुमार की यह पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता थी, जिसमें उन्होंने खुद को साबित किया है। इससे पहले प्रवीन राज्य स्तर की तीन प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं। वर्ष 2019 में हुई राज्य प्रतियोगिता में उसने कांस्य तथा वर्ष 2021 और वर्ष 2022 ही में हुई राज्य प्रतियोगिताओं में रजत पदक प्राप्त किए। उड़ीसा से कांस्य पदक जीतकर लौटने पर रेलवे स्टेशन पर खिलाड़ी को फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद गांव लौटने पर विधायक मुकेश चौधरी, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने प्रवीण को पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया। खास बात यह है कि प्रवीण चौकीदार हैं।
प्रवीण को मदद की दरकार
कोरोना की दूसरी लहर में प्रवीण की मां मिमला और पिता जयपाल की मौत हो चुकी है। टांग से दिव्यांग होने के साथ ही सिर से माता पिता का साया उठने की वजह से प्रवीन परेशानी में हैं। वह चौकीदारी कर किसी तरह अपना पेट पाल रहे हैं। प्रवीन के पास एक मकान है, जिसकी छत कच्ची है। ऐसे में उसको पक्के मकान और रोजगार के लिए आर्थिक मदद की दरकार है।
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प्रवीण कुमार की यह पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता थी, जिसमें उन्होंने खुद को साबित किया है। इससे पहले प्रवीन राज्य स्तर की तीन प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं। वर्ष 2019 में हुई राज्य प्रतियोगिता में उसने कांस्य तथा वर्ष 2021 और वर्ष 2022 ही में हुई राज्य प्रतियोगिताओं में रजत पदक प्राप्त किए। उड़ीसा से कांस्य पदक जीतकर लौटने पर रेलवे स्टेशन पर खिलाड़ी को फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद गांव लौटने पर विधायक मुकेश चौधरी, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने प्रवीण को पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया। खास बात यह है कि प्रवीण चौकीदार हैं।
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प्रवीण को मदद की दरकार
कोरोना की दूसरी लहर में प्रवीण की मां मिमला और पिता जयपाल की मौत हो चुकी है। टांग से दिव्यांग होने के साथ ही सिर से माता पिता का साया उठने की वजह से प्रवीन परेशानी में हैं। वह चौकीदारी कर किसी तरह अपना पेट पाल रहे हैं। प्रवीन के पास एक मकान है, जिसकी छत कच्ची है। ऐसे में उसको पक्के मकान और रोजगार के लिए आर्थिक मदद की दरकार है।
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