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पाठ्यक्रम के साथ स्वच्छता का भी पाठ पढ़ेंगे बच्चे
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सहारनपुर। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को पाठ्यक्रम के साथ ही स्वच्छता का भी पाठ पढ़ाया जाएगा। चूंकि कोरोना के साथ ही संचारी रोगों का खतरा भी मंडराने लगा है। ऐसे में शिक्षकों से कहा गया है कि वह किताबी ज्ञान के साथ ही शारीरिक स्वच्छता और सामाजिक शिक्षा भी बच्चों को दें।
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण बीते वर्ष पूरे सत्र विद्यालय बंद रहे। सत्र 2021 में विद्यालय खोले जाने थे। प्रदेश सरकार ने निर्देश दिए थे कि बच्चों को पाठ्यक्रम के साथ स्वच्छता का भी पाठ पढ़ाए, इससे उन्हें कोरोना से सुरक्षित रखा जा सके। मगर फिर कोरोना की दूसरी लहर के कारण विद्यालयों को बंद रखना पड़ा। अब परिषदीय विद्यालय पूरी तरह खुल चुके हैं। अब कोरोना के साथ ही संचारी रोगों का भी खतरा मंडराने लगा है। चूंकि दोनों बीमारियां गंदगी से जुड़ी हैं। ऐसे में शिक्षकों को निर्देश दिए वह बच्चों को शारीरिक और अपने घर व आस पड़ोस को साफ रखने के लिए प्रेरित करें। शिक्षकों से कहा वह बच्चों को बार-बार हाथ धुलने, गंदे हाथों को मुंह और आंखों पर नहीं लगाने, मास्क का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने तथा कक्षाओं के साथ ही बाहर भी शारीरिक दूरी बनाकर रखने की सीख दें। साथ ही अभिभावकों को भी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करें।
विद्यालयों में बीमारियों का खतरा
बरसात होने से ज्यादातर विद्यालयों के परिसरों में घास उग आई है। जलभराव और नमी होने से मच्छर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में सचेत रहने की जरूरत है। सैनिटाइजेशन के साथ ही विद्यालयों में एंटी लारवा का छिड़काव और फॉगिंग जरूरी है।
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वर्जन
कोरोना के खतरे के बीच ही अब संचारी रोगों जैसे डेंगू और मलेरिया का भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि शिक्षक बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करें। अभिभावकों को भी बीमारियों से बचाव की जानकारी दी जाए। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों को पूरी बाजू की शर्ट और पेंट पहनाकर ही स्कूल भेजें। योगराज सिंह, एडी बेसिक।
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वैश्विक महामारी कोरोना के कारण बीते वर्ष पूरे सत्र विद्यालय बंद रहे। सत्र 2021 में विद्यालय खोले जाने थे। प्रदेश सरकार ने निर्देश दिए थे कि बच्चों को पाठ्यक्रम के साथ स्वच्छता का भी पाठ पढ़ाए, इससे उन्हें कोरोना से सुरक्षित रखा जा सके। मगर फिर कोरोना की दूसरी लहर के कारण विद्यालयों को बंद रखना पड़ा। अब परिषदीय विद्यालय पूरी तरह खुल चुके हैं। अब कोरोना के साथ ही संचारी रोगों का भी खतरा मंडराने लगा है। चूंकि दोनों बीमारियां गंदगी से जुड़ी हैं। ऐसे में शिक्षकों को निर्देश दिए वह बच्चों को शारीरिक और अपने घर व आस पड़ोस को साफ रखने के लिए प्रेरित करें। शिक्षकों से कहा वह बच्चों को बार-बार हाथ धुलने, गंदे हाथों को मुंह और आंखों पर नहीं लगाने, मास्क का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने तथा कक्षाओं के साथ ही बाहर भी शारीरिक दूरी बनाकर रखने की सीख दें। साथ ही अभिभावकों को भी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करें।
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विद्यालयों में बीमारियों का खतरा
बरसात होने से ज्यादातर विद्यालयों के परिसरों में घास उग आई है। जलभराव और नमी होने से मच्छर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में सचेत रहने की जरूरत है। सैनिटाइजेशन के साथ ही विद्यालयों में एंटी लारवा का छिड़काव और फॉगिंग जरूरी है।
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कोरोना के खतरे के बीच ही अब संचारी रोगों जैसे डेंगू और मलेरिया का भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि शिक्षक बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करें। अभिभावकों को भी बीमारियों से बचाव की जानकारी दी जाए। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों को पूरी बाजू की शर्ट और पेंट पहनाकर ही स्कूल भेजें। योगराज सिंह, एडी बेसिक।