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आचार्य जुगल किशोर की ‘मेरी भावना’ पढ़ेंगे सीबीएसई के छात्र

Fri, 31 Jul 2020 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2020 11:33 PM IST
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CBSE students to read 'Meri Bhavana' by Acharya Jugal Kishore
सहारनपुर: सरसावा में आचार्य जुगल किशोर मुख्तार का समाधि स्थल। - फोटो : SAHARANPUR
सरसावा (सहारनपुर)। एनसीईआरटी की कक्षा सात की किताब में ‘मेरी भावना’ काव्य रचना को शामिल किया गया है। खुशी की बात यह है कि इस काव्य के रचनाकार आचार्य जुगल किशोर मुख्तार सहारनपुर जनपद के कस्बे सरसावा के रहने वाले हैं। उन्होंने कई धर्म ग्रंथों की रचना भी की है।
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आचार्य जुगल किशोर मुख्तार के विषय में सरसावा के पंचायती जैन मंदिर में रखी एक पुस्तक में ब्योरा दर्ज है। उनका जन्म सरसावा में पिता नाथूमाई जैन तथा माता भुवि देवी के घर में वर्ष 1877 में हुआ था। धार्मिक परिवार में जन्म होने के कारण जुगल किशोर का ध्यान भी आरंभ से ही धर्म की ओर था। आधा दर्जन भाषाओं जिनमें पाली- प्राकृत, हिंदी, संस्कृत, उर्दू, फारसी, अंग्रेजी के ज्ञाता आचार्य जुगल किशोर ने मुख्तार के पद पर काम किया, जिस कारण उनके नाम के साथ मुख्तार शब्द जुड़ा। 1914 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया तथा पूरी तरह से जैन साहित्य के अन्वेषण में जुट गए। एनसीईआरटी की कक्षा सात की पुस्तक में प्रकाशित उनकी रचना मेरी भावना उनके द्वारा 1916 में रची गई थी, जिसे पूरे विश्व के जैन साहित्य में स्थान मिला। इसके बाद उनको युग वीर की भी उपाधि से विभूषित किया गया। जैन साहित्य के अन्वेषण तथा अनेक साहित्य के रचनाकार के रूप में प्रसिद्ध आचार्य जुगल किशोर मुख्तार, ‘युगवीर’ का देहावसान 91 वर्ष की आयु में 1968 में हुआ।
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उनकी प्रमुख रचनाएं
आचार्य जुगल किशोर मुख्तार की प्रमुख रचनाओं में परीविषद प्रकाश, जैन ग्रंथ परीक्षा, युगवीर निबंधावली, युगवीर भारती, स्वयंभू स्त्रोत्र, समुच्चय धर्मशास्त्र, अध्यात्म रहस्य, तत्वानुशासन, रत्नाकरंद श्रावकाचार, कल्याण कल्पद्रुम, योगसार आदि प्रमुख हैं। उन्होंने जैन राजपत्र तथा जैन गजट का भी संपादन किया तथा अनेकांत के नाम से पत्रिका भी निकाली।
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जैन समाज के लोगों की बात
सरसावा जैन समाज के अध्यक्ष सतीश चंद जैन ने बताया कि आचार्य जुगल किशोर मुख्तार ने वीर सेवा मंदिर के नाम से ट्रस्ट का गठन किया। जिसका भवन तथा धर्मशाला आज भी सरसावा में अंबाला रोड पर स्थित है उसी के भीतर एक स्थान पर उनकी समाधि भी स्थापित है।
समाजसेवी नरेश चंद जैन ने बताया कि आचार्य जुगल किशोर मुख्तार ने जैन ग्रंथ की गहन अन्वेषण की तथा अनेक ग्रंथों की रचना की। जिन्हें जैन धर्म में उच्च स्थान प्राप्त है।
पूर्व पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि नवीन जैन ने बताया कि आचार्य जुगल किशोर मुख्तार सरसावा के पश्चात दिल्ली तथा एटा में रहे। उन्होंने एटा में शरीर त्याग किया। उनके द्वारा स्थापित वीर सेवा मंदिर ट्रस्ट आज भी सरसावा में कार्यरत है, जिसकी शाखा दिल्ली के दरियागंज में भी है। महरौली में अहिंसा स्थल भी वीर सेवा मंदिर ट्रस्ट की ही देन है।
जैन शास्त्रों का अध्ययन करने वाले दिनेश कुमार जैन ने बताया कि आचार्य जुगल किशोर ने जैन दर्शन पर गहन शोध कार्य किया है। उनके शोध को विश्व स्तर पर जैन धर्म के साथ ही विद्वानों ने स्वीकार किया है।

पंचायती जैन मंदिर के मंत्री अनिल जैन ने कहा कि सरकारी पाठ्यक्रम में आचार्य जी की काव्य रचना को स्थान मिलना जैन समाज के लिए गौरव का विषय है। उनकी रचना आज के माहौल में भी पूरी तरह से प्रासंगिक है।

सहारनपुर:  आचार्य जुगल किशोर मुख्तार

सहारनपुर: आचार्य जुगल किशोर मुख्तार- फोटो : SAHARANPUR

सतीश चंद जैन, सरसावा

सतीश चंद जैन, सरसावा- फोटो : SAHARANPUR

नवीन जैन, सरसावा

नवीन जैन, सरसावा- फोटो : SAHARANPUR

दिनेश कुमार जैन, सरसावा

दिनेश कुमार जैन, सरसावा- फोटो : SAHARANPUR

नरेश चंद जैन, सरसावा

नरेश चंद जैन, सरसावा- फोटो : SAHARANPUR

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