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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस-2 18-45-11
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मनोरोगों के उपचार को लेकर चिकित्सकों में मंथन
सहारनपुर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की ओर से जूम एप पर गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें गोष्ठी में शामिल हुए चिकित्सकों ने मनोरोगों के उपचार पर चर्चा की।
आईएमए की सहारनपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. मनदीप सिंह के आग्रह पर मानसिक रोग विशेषज्ञ एवं आईएमए डॉ. अमरजीत पोपली (सचिव, इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट साइक्याट्री उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड) ने कहा कि मानसिक रोग का सबसे साधारण प्रकार अवसाद या डिप्रेशन है।
आमतौर पर इसकी शुरूआत तनाव से होती है, जो कुछ समय के बाद अवसाद का रूप ले लेती है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा कि कुछ लोगों में ऐसा देखा जाता है कि वे कुछ देर पहले हुई चीजों को भूल जाते हैं। दरअसल, यह एक मानसिक रोग है, जिसे भूलने की बीमारी या अल्जाइमर के नाम से जाना जाता है। डॉ. आरके सिंह ने कहा कि मानसिक रोग बच्चों में भी देखने को मिलते हैं, जिनमें से सबसे आम एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) है। आम भाषा में इसे ध्यान न दे पाने का रोग किया जाता है, जो कुछ पढ़ने के दौरान बच्चों में देखने को मिलता है। डॉ. एजाज अहमद ने कहा कि जब भी किसी व्यक्ति के भीतर कुछ असामान्य हरकत देखें तो तुरंत अच्छे चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। डॉ. शलभ जैन और डॉ. अंशुमन तिवारी गोष्ठी ने भी अपनी बात रखी। कोविड महामारी के कारण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई। मानसिक रोग विशेषज्ञों द्वारा अपने-अपने स्तर पर सोशल, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जनसाधारण के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। गोष्ठी में आईएमए के सचिव डॉ. कर्मवीर सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ. विकास अग्रवाल आदि चिकित्सक मौजूद रहे।
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सहारनपुर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की ओर से जूम एप पर गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें गोष्ठी में शामिल हुए चिकित्सकों ने मनोरोगों के उपचार पर चर्चा की।
आईएमए की सहारनपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. मनदीप सिंह के आग्रह पर मानसिक रोग विशेषज्ञ एवं आईएमए डॉ. अमरजीत पोपली (सचिव, इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट साइक्याट्री उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड) ने कहा कि मानसिक रोग का सबसे साधारण प्रकार अवसाद या डिप्रेशन है।
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आमतौर पर इसकी शुरूआत तनाव से होती है, जो कुछ समय के बाद अवसाद का रूप ले लेती है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा कि कुछ लोगों में ऐसा देखा जाता है कि वे कुछ देर पहले हुई चीजों को भूल जाते हैं। दरअसल, यह एक मानसिक रोग है, जिसे भूलने की बीमारी या अल्जाइमर के नाम से जाना जाता है। डॉ. आरके सिंह ने कहा कि मानसिक रोग बच्चों में भी देखने को मिलते हैं, जिनमें से सबसे आम एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) है। आम भाषा में इसे ध्यान न दे पाने का रोग किया जाता है, जो कुछ पढ़ने के दौरान बच्चों में देखने को मिलता है। डॉ. एजाज अहमद ने कहा कि जब भी किसी व्यक्ति के भीतर कुछ असामान्य हरकत देखें तो तुरंत अच्छे चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। डॉ. शलभ जैन और डॉ. अंशुमन तिवारी गोष्ठी ने भी अपनी बात रखी। कोविड महामारी के कारण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई। मानसिक रोग विशेषज्ञों द्वारा अपने-अपने स्तर पर सोशल, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जनसाधारण के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। गोष्ठी में आईएमए के सचिव डॉ. कर्मवीर सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ. विकास अग्रवाल आदि चिकित्सक मौजूद रहे।
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