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कोरोना काल में खतरे में कुपोषित बच्चों की सांसें
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कोरोना काल में खतरे में कुपोषित बच्चों की सांसें
सहारनपुर। कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। अति कुपोषित बच्चों को तत्काल इलाज की आवश्यकता पड़ जाती है। सरकारी अस्पतालों में बेड आरक्षित होने के बावजूद अभिभावक लापरवाही दिखाते हैं। कोरोना की वजह से पहले ही बेड के लिए मारामारी मची हुई है।
वर्तमान में जिले में 2053 कुपोषित और अति कुपोषित 1526 बच्चे हैं। अति कुपोषित बच्चों का सरकारी अस्पतालों में उपचार किया जाता है। बेड आरक्षित होने के बावजूद 40 फीसदी अभिभावक ही संपूर्ण इलाज कराते हैं। जागरूकता के अभाव में बाकी इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। अब कोरोना संक्रमण बढ़ गया है तो विभाग ने ज्यादा सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। ऐसे में घर-घर पुष्टाहार पहुंचाने के अलावा फोन पर ही जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए जनपद के 3410 केंद्रों पर तैनात आंगनबाड़ियों को अभिभावकों के फोन नंबर भी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन उपायों से होगा बचाव
-- बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलाएं।
-- दवा व पोषक पदार्थ देने से पूर्व हाथों को सैनिटाइज करें।
-- बाहर से आए व्यक्ति को बच्चे के पास न जाने दें।
-- बच्चों को नियमित तीन बार पोषाहार दें।
-- नजला, जुकाम और बुखार होने पर तुरंत आशा से संपर्क करें।
-- बच्चों के कपड़ों को गर्म पानी से धोएं।
-- बच्चों के हाथों और मुंह को भी गुनगुने पानी से साफ कराएं।
-- ठंडे पदार्थ का सेवन बिल्कुल न कराएं और बाहर के बनें खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल न करें।
वर्ष---- कुपोषित ------ अति कुपोषित बच्चे
2017------ 52410 ---------18105
2018------ 41869----------12547
2019------ 33825-----------6910
2020------ 21315 ----------4375
2021-------2053 -----------1526
(नोट: वर्ष 2021 का 15 अप्रैल तक का आंकड़ा है।)
वर्जन
कुपोषण के अलावा कोरोना से भी बच्चों को बचाने के लिए अभिभावकों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। सरकार की गाइडलाइन का पालन करें।
- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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सहारनपुर। कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। अति कुपोषित बच्चों को तत्काल इलाज की आवश्यकता पड़ जाती है। सरकारी अस्पतालों में बेड आरक्षित होने के बावजूद अभिभावक लापरवाही दिखाते हैं। कोरोना की वजह से पहले ही बेड के लिए मारामारी मची हुई है।
वर्तमान में जिले में 2053 कुपोषित और अति कुपोषित 1526 बच्चे हैं। अति कुपोषित बच्चों का सरकारी अस्पतालों में उपचार किया जाता है। बेड आरक्षित होने के बावजूद 40 फीसदी अभिभावक ही संपूर्ण इलाज कराते हैं। जागरूकता के अभाव में बाकी इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। अब कोरोना संक्रमण बढ़ गया है तो विभाग ने ज्यादा सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। ऐसे में घर-घर पुष्टाहार पहुंचाने के अलावा फोन पर ही जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए जनपद के 3410 केंद्रों पर तैनात आंगनबाड़ियों को अभिभावकों के फोन नंबर भी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन उपायों से होगा बचाव
-- बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलाएं।
-- दवा व पोषक पदार्थ देने से पूर्व हाथों को सैनिटाइज करें।
-- बाहर से आए व्यक्ति को बच्चे के पास न जाने दें।
-- बच्चों को नियमित तीन बार पोषाहार दें।
-- नजला, जुकाम और बुखार होने पर तुरंत आशा से संपर्क करें।
-- बच्चों के कपड़ों को गर्म पानी से धोएं।
-- बच्चों के हाथों और मुंह को भी गुनगुने पानी से साफ कराएं।
-- ठंडे पदार्थ का सेवन बिल्कुल न कराएं और बाहर के बनें खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल न करें।
वर्ष---- कुपोषित ------ अति कुपोषित बच्चे
2017------ 52410 ---------18105
2018------ 41869----------12547
2019------ 33825-----------6910
2020------ 21315 ----------4375
2021-------2053 -----------1526
(नोट: वर्ष 2021 का 15 अप्रैल तक का आंकड़ा है।)
वर्जन
कुपोषण के अलावा कोरोना से भी बच्चों को बचाने के लिए अभिभावकों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। सरकार की गाइडलाइन का पालन करें।
- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी