{"_id":"3f8d34a1249011a0a92dbbfbcd4cf1aa","slug":"border-patrol-animal-businesses-affected-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमा पर पहरा, पशु कारोबार प्रभावित ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीमा पर पहरा, पशु कारोबार प्रभावित
ब्यूरो/अमर उजाला,
Updated Sun, 18 Oct 2015 11:18 PM IST
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एक पुरानी कहावत है कि गेहूं के साथ घुन भी पीसता है। उसी तर्ज पर दादरी कांड के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पशु व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हरियाणा और पंजाब से लाए जाने वाले दुधारू गाय और कृषि उपयोग के बैलों पर अघोषित रोक से कई मुसीबतें सामने आने लगी हैं।
अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाला दुग्ध उद्योग और कृषि भी इन पशुओं पर निर्भर हैं। बीते कई दिनों से इनके लाने पर अघोषित रोक वेस्ट यूपी की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है। उधर, परेशानियों को देखते हुए ज्यादातर बुहारी इस कारोबार से ही खुद को अलग करने लगे हैं।
दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का दुग्ध कारोबार और कृषि काफी हद तक हरियाणा-पंजाब से लाए जाने वाले पशुओं पर निर्भर है। पिछले दिनों दादरी कांड के बाद पूरे देश में मचे हो-हल्ला के बाद दुधारू गाय और कृषि उपयोग बैलों के व्यापार भी लगभग ग्रहण सा लग गया है।
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आलम यह है कि वर्षों से इस व्यापार से जुड़े लोगों को भी पशुओं को लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर के रास्ते ही पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दुधारू और कृषि उपयोग के पशु पहुंचाए जाते हैं। लेकिन, दादरी कांड के बाद से ही हरियाणा की सीमा पर सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर के रास्तों पर सघन पहरों की वजह से जायज व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। ऐसे में करीब 15 दिनों से यह पूरा व्यापार ही ठप पड़ा है।
आपको बता दें कि सहारनपुर के सरसावा, बेहट, गंगोह, नकुड़ और शामली के कांधला, कैराना और बिडौली सीधे तौर पर हरियाणा से जुड़े हैं।
मेडिकल नहीं मिलने से राह मुश्किल
हरियाणा और पंजाब से लाए जाने वाले पशुओं का बाकायदा हुलिया और मेडिकल जारी किया जाता था। वहां के व्यापारी हुलिया तो बनाकर दे रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों से बनने वाले मेडिकल पर भी अघोषित रोक लगा दी गई है।
ऐसे में हरियाणा और पंजाब के बुहारियों के पास हुलिया होने के बावजूद न केवल पुलिस बल्कि कई अन्य संगठन भी परेशान करते हैं। आलम यह है कि जिम्मेदारों के मुहर आदि के बावजूद वहां से दुधारू गाय और कृषि उपयोग के बैलों को लाने के लिए जगह-जगह बुहारियों को खुद को साबित करने की चुनौती से गुजरना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी बात यह है कि प्रमाणित कागजात नहीं होने की वजह से बुहारियों को पशुओं को लाने के लिए साथ जाना पड़ता है। मगर, बीफ कांड के बाद से बुहारी भी साथ जाने से कतराने लगे हैं।
व्यापार से अलग हो रहे बुहारी ःपशु व्यापार से जुड़े ज्यादातर बुहारी मुस्लिम हैं और दादरी कांड के बाद से ही सांप्रदायिक माहौल गर्म हैं। ऐसे में मुस्लिम बुहारी खुद को इस व्यापार से ही अलग करने लगे हैं। शाहजहांपुर के बुहारी अय्यूब अंसारी और सरसावा के शमशाद बताते हैं कि यह व्यापार बेहद ही मुश्किल हो गया है।
पहले एक पर्ची पर दुधारू गाय और खेती के बैल पंजाब-हरियाणा से यहां पहुंच जाते थे, लेकिन अब हर थाने पर चेकिंग और घंटों पूछताछ हो रही है। तमाम संगठन शक की निगाहों से देखते हैं। सही बात को साबित करने में ही पूरा-पूरा दिन गुजर जाता है।
पशु व्यापारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 15 दिनों से यह कारोबार बिल्कुल ठप है। आर्डर के बावजूद हम दुधारू गाय और खेती के बैलों को नहीं ला रहे हैं। कारण, हर व्यापारी डरा हुआ भी है।
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अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाला दुग्ध उद्योग और कृषि भी इन पशुओं पर निर्भर हैं। बीते कई दिनों से इनके लाने पर अघोषित रोक वेस्ट यूपी की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है। उधर, परेशानियों को देखते हुए ज्यादातर बुहारी इस कारोबार से ही खुद को अलग करने लगे हैं।
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दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का दुग्ध कारोबार और कृषि काफी हद तक हरियाणा-पंजाब से लाए जाने वाले पशुओं पर निर्भर है। पिछले दिनों दादरी कांड के बाद पूरे देश में मचे हो-हल्ला के बाद दुधारू गाय और कृषि उपयोग बैलों के व्यापार भी लगभग ग्रहण सा लग गया है।
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आलम यह है कि वर्षों से इस व्यापार से जुड़े लोगों को भी पशुओं को लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर के रास्ते ही पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दुधारू और कृषि उपयोग के पशु पहुंचाए जाते हैं। लेकिन, दादरी कांड के बाद से ही हरियाणा की सीमा पर सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर के रास्तों पर सघन पहरों की वजह से जायज व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। ऐसे में करीब 15 दिनों से यह पूरा व्यापार ही ठप पड़ा है।
आपको बता दें कि सहारनपुर के सरसावा, बेहट, गंगोह, नकुड़ और शामली के कांधला, कैराना और बिडौली सीधे तौर पर हरियाणा से जुड़े हैं।
मेडिकल नहीं मिलने से राह मुश्किल
हरियाणा और पंजाब से लाए जाने वाले पशुओं का बाकायदा हुलिया और मेडिकल जारी किया जाता था। वहां के व्यापारी हुलिया तो बनाकर दे रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों से बनने वाले मेडिकल पर भी अघोषित रोक लगा दी गई है।
ऐसे में हरियाणा और पंजाब के बुहारियों के पास हुलिया होने के बावजूद न केवल पुलिस बल्कि कई अन्य संगठन भी परेशान करते हैं। आलम यह है कि जिम्मेदारों के मुहर आदि के बावजूद वहां से दुधारू गाय और कृषि उपयोग के बैलों को लाने के लिए जगह-जगह बुहारियों को खुद को साबित करने की चुनौती से गुजरना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी बात यह है कि प्रमाणित कागजात नहीं होने की वजह से बुहारियों को पशुओं को लाने के लिए साथ जाना पड़ता है। मगर, बीफ कांड के बाद से बुहारी भी साथ जाने से कतराने लगे हैं।
व्यापार से अलग हो रहे बुहारी ःपशु व्यापार से जुड़े ज्यादातर बुहारी मुस्लिम हैं और दादरी कांड के बाद से ही सांप्रदायिक माहौल गर्म हैं। ऐसे में मुस्लिम बुहारी खुद को इस व्यापार से ही अलग करने लगे हैं। शाहजहांपुर के बुहारी अय्यूब अंसारी और सरसावा के शमशाद बताते हैं कि यह व्यापार बेहद ही मुश्किल हो गया है।
पहले एक पर्ची पर दुधारू गाय और खेती के बैल पंजाब-हरियाणा से यहां पहुंच जाते थे, लेकिन अब हर थाने पर चेकिंग और घंटों पूछताछ हो रही है। तमाम संगठन शक की निगाहों से देखते हैं। सही बात को साबित करने में ही पूरा-पूरा दिन गुजर जाता है।
पशु व्यापारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 15 दिनों से यह कारोबार बिल्कुल ठप है। आर्डर के बावजूद हम दुधारू गाय और खेती के बैलों को नहीं ला रहे हैं। कारण, हर व्यापारी डरा हुआ भी है।