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बिन दूल्हे के आएगी बारात
ब्यूरो/अमर उजाला, नागल
Updated Tue, 10 Nov 2015 01:13 AM IST
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सुनने में अटपटा लग सकता है, लेकिन है हकीकत। करीब 18 साल पहले मर चुकी बिटिया की शादी के लिए मंगलवार को बारात आएगी।
यह बारात भी ऐसे दूल्हे के लिए आएगी, जो इतने साल पहले ही मर चुका है। नागल क्षेत्र के मीरपुर मोहनपुर गांव में नटी बादी समुदाय के परिवार में शादी की यह रस्म अदा की जाएगी। बारातियों के लिए लोगों की दावत से लेकर मिलाई तक की अन्य रस्में निभाई जाएगी।
मीरपुर-मोहनपुर में बसी नट बादी समुदाय से संबधित रामेश्वर अपनी ऐसी लड़की की शादी कर रहा है, जो कि करीब 18 वर्ष पूर्व मर चुकी है।
लड़के की मौत भी 18 साल पहले हो चुकी है। रामेश्वर ने बताया कि उसकी बेटी का नाम पूजा था। मंगलवार को उत्तराखंड के कस्बा लंढौरा के गांव गाद्दा नोरा निवासी तेजपाल के यहां से उसकी बारात आ रही है।
इसमें 25-30 लोग शामिल होंगे। बिरादरी की ओर से उनका बैंडबाजे के साथ शानदार स्वागत किया जाएगा। बारातियों को कपडे़ के साथ मिलाई दी जाएगी।
दरअसल, इस समुदाय के लोगों में वर्षों से यह परंपरा है कि किसी कुंवारी बेटी या कुंवारे बेटे की मौत होने पर भी उसकी शादी की रस्म निभाई जाए। रामेश्वर ने बताया कि बरसों से इस तरह की परंपरा चली आ रही है।
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यह बारात भी ऐसे दूल्हे के लिए आएगी, जो इतने साल पहले ही मर चुका है। नागल क्षेत्र के मीरपुर मोहनपुर गांव में नटी बादी समुदाय के परिवार में शादी की यह रस्म अदा की जाएगी। बारातियों के लिए लोगों की दावत से लेकर मिलाई तक की अन्य रस्में निभाई जाएगी।
मीरपुर-मोहनपुर में बसी नट बादी समुदाय से संबधित रामेश्वर अपनी ऐसी लड़की की शादी कर रहा है, जो कि करीब 18 वर्ष पूर्व मर चुकी है।
लड़के की मौत भी 18 साल पहले हो चुकी है। रामेश्वर ने बताया कि उसकी बेटी का नाम पूजा था। मंगलवार को उत्तराखंड के कस्बा लंढौरा के गांव गाद्दा नोरा निवासी तेजपाल के यहां से उसकी बारात आ रही है।
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इसमें 25-30 लोग शामिल होंगे। बिरादरी की ओर से उनका बैंडबाजे के साथ शानदार स्वागत किया जाएगा। बारातियों को कपडे़ के साथ मिलाई दी जाएगी।
दरअसल, इस समुदाय के लोगों में वर्षों से यह परंपरा है कि किसी कुंवारी बेटी या कुंवारे बेटे की मौत होने पर भी उसकी शादी की रस्म निभाई जाए। रामेश्वर ने बताया कि बरसों से इस तरह की परंपरा चली आ रही है।
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