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Saharanpur News: बड़ा फैसला, नन्हें हाथों से छूटेगा मोबाइल, कक्षा में होगी पढ़ाई
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सहारनपुर। गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या के बाद विद्यार्थियों की ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक की तरफ से स्कूलों को आदेश जारी किए गए हैं कि पांचवीं तक के विद्यार्थियों की मोबाइल पर शैक्षणिक गतिविधियां न कराई जाएं।
दरअसल, गाजियाबाद की घटना के बाद उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष ने सभी जनपदों के लिए आदेश जारी किए थे। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरविंद कुमार पाठक की ओर से सभी बोर्ड के स्कूलों को पांचवीं तक के विद्यार्थियों की मोबाइल फोन पर शैक्षणिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि विषम एवं अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर बाकी दिनों में मोबाइल फोन के माध्यम से होमवर्क, असाइनमेंट और अन्य शैक्षणिक कार्यों पर तुरंत रोक लगाई जाए। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि सभी शैक्षणिक कार्य स्कूलों में ही संपन्न कराए जाएं। होमवर्क आदि कक्षाओं से ही देकर भेजा जाएगा।
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महिला आयोग का तर्क
लॉकडाउन की अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण स्कूलों द्वारा मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उसके बाद सामान्य परिस्थितियों में भी होमवर्क, असाइनमेंट एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियां मोबाइल पर भेजी जा रही हैं। लगातार मोबाइल बच्चों के हाथ में रहना चिंताजनक है, क्योंकि बेहद कम उम्र में बच्चे मोबाइल के प्रति मानसिक, भावनात्मक एवं व्यावहारिक रूप से जुड़ रहे हैं। मोबाइल फोन पर अनियंत्रित गेमिंग, सोशल मीडिया और अन्य गतिविधियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। इसका चरम परिणाम गाजियाबाद की घटना के रूप में सामने आया है।
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अभिभावकों का पक्ष
-अभिभावक रामकुमार का कहना है कि ऑनलाइन पठन-पाठन ने बच्चों का बचपन छीन लिया है। छुट्टी में भी बच्चों को सुकून नहीं। लगातार मोबाइल के संपर्क में रहने से बच्चे गलत गेम और सोशल मीडिया पर वह चीजें देख रहे हैं, जो उनके लिए नहीं हैं।
-अभिभावक बिक्रम सिंह का कहना है कि लॉकडाउन में ऑनलाइन कक्षाएं चलने के बाद से अनेक बच्चों के हाथ में परमानेंट मोबाइल आ गया, जबकि उससे पहले अभिभावक फोन देने से बचते थे। मोबाइल फोन के चलते बच्चे अभिभावकों से दूर हो रहे हैं।
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प्रधानाचार्यों की बात
-राजकीय हाईस्कूल मुसैल की प्रधानाचार्य शोभा चौधरी का कहना है कि वह शैक्षणिक गतिविधियां भी मोबाइल पर कराई जा रही हैं, जिनकी जरूरत नहीं है। मोबाइल का इस्तेमाल कम हो। विद्यार्थी प्रतिदिन कक्षाओं में आएं और किताबों से पढ़ेंगे तो ज्यादा अच्छा है।
-डीएवी पब्लिक स्कूल रसूलपुर के प्रधानाचार्य जगदीश सिंह का कहना है कि ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चे उतना नहीं सीख पाते, जितना कक्षाओं में बैठकर पढ़ने से सीखते हैं। पढ़ाई के नाम पर कई बच्चे मोबाइल का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उन्हें बिगाड़ रहा है।
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दरअसल, गाजियाबाद की घटना के बाद उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष ने सभी जनपदों के लिए आदेश जारी किए थे। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरविंद कुमार पाठक की ओर से सभी बोर्ड के स्कूलों को पांचवीं तक के विद्यार्थियों की मोबाइल फोन पर शैक्षणिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि विषम एवं अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर बाकी दिनों में मोबाइल फोन के माध्यम से होमवर्क, असाइनमेंट और अन्य शैक्षणिक कार्यों पर तुरंत रोक लगाई जाए। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि सभी शैक्षणिक कार्य स्कूलों में ही संपन्न कराए जाएं। होमवर्क आदि कक्षाओं से ही देकर भेजा जाएगा।
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महिला आयोग का तर्क
लॉकडाउन की अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण स्कूलों द्वारा मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उसके बाद सामान्य परिस्थितियों में भी होमवर्क, असाइनमेंट एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियां मोबाइल पर भेजी जा रही हैं। लगातार मोबाइल बच्चों के हाथ में रहना चिंताजनक है, क्योंकि बेहद कम उम्र में बच्चे मोबाइल के प्रति मानसिक, भावनात्मक एवं व्यावहारिक रूप से जुड़ रहे हैं। मोबाइल फोन पर अनियंत्रित गेमिंग, सोशल मीडिया और अन्य गतिविधियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। इसका चरम परिणाम गाजियाबाद की घटना के रूप में सामने आया है।
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अभिभावकों का पक्ष
-अभिभावक रामकुमार का कहना है कि ऑनलाइन पठन-पाठन ने बच्चों का बचपन छीन लिया है। छुट्टी में भी बच्चों को सुकून नहीं। लगातार मोबाइल के संपर्क में रहने से बच्चे गलत गेम और सोशल मीडिया पर वह चीजें देख रहे हैं, जो उनके लिए नहीं हैं।
-अभिभावक बिक्रम सिंह का कहना है कि लॉकडाउन में ऑनलाइन कक्षाएं चलने के बाद से अनेक बच्चों के हाथ में परमानेंट मोबाइल आ गया, जबकि उससे पहले अभिभावक फोन देने से बचते थे। मोबाइल फोन के चलते बच्चे अभिभावकों से दूर हो रहे हैं।
प्रधानाचार्यों की बात
-राजकीय हाईस्कूल मुसैल की प्रधानाचार्य शोभा चौधरी का कहना है कि वह शैक्षणिक गतिविधियां भी मोबाइल पर कराई जा रही हैं, जिनकी जरूरत नहीं है। मोबाइल का इस्तेमाल कम हो। विद्यार्थी प्रतिदिन कक्षाओं में आएं और किताबों से पढ़ेंगे तो ज्यादा अच्छा है।
-डीएवी पब्लिक स्कूल रसूलपुर के प्रधानाचार्य जगदीश सिंह का कहना है कि ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चे उतना नहीं सीख पाते, जितना कक्षाओं में बैठकर पढ़ने से सीखते हैं। पढ़ाई के नाम पर कई बच्चे मोबाइल का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उन्हें बिगाड़ रहा है।