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भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने डीएम दफ्तर घेरा, किया धरना-प्रदर्शन
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डीएम कार्यालय पर धरना देते राजकीय मेडिकल कॉलेज से निकाले गये ठेका कर्मी व भीम आर्मी के कार्यकर्त?
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। भीम आर्मी भारत एकता मिशन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को डीएम दफ्तर पर धरना और प्रदर्शन किया। भीम आर्मी शेखुल हिन्द मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज पिलखनी से हटाए गए ठेका कर्मचारियों को पुन: काम पर रखने की मांग कर रही है।
धरने में शामिल रहे पीजीआई कर्मचारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजीव सिंह ने बताया कि कोरोना काल में राजकीय मेडिकल कॉलेज में 226 कर्मचारियों को ठेके पर रखा गया था। इनमें सुपरवाइजर, वार्ड ब्वाय, वार्ड आया, स्वीपर, लिफ्टमैन आदि शामिल थे। उन्हें 7200 रुपये मानदेय के रूप में दिए गए, लेकिन कोरोना का असर कम होने के बाद 10 नवंबर 2021 को सभी को बाहर कर दिया गया। ऐसे में उनके परिवारों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया है। वह बीते करीब 15 दिन से काम पर लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह, सचिव शुभम शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में उन्होंने तब अपनी जान पर खेलकर ड्यूटी की है। ऐसे में सरकार को उनके बारे में सोचना चाहिए था। भीम आर्मी के पदाधिकारियों के नेतृत्व में डीएम दफ्तर पहुंचे निकाले गए कर्मचारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपा। धरने में रविंद्र, दिनेश कुमार, नितिन कुमार, अंजू देवी, विशा रानी, विशाल, विक्रम, सोनाली, सोनिया, टीना, वैशाली, सचिन, रविंद्र कुमार, पिंकू, राहुल कुमार, विकास, श्रवण आदि शामिल रहे।
जो कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं उनको रखने और हटाने का निर्णय शासन का रहा है। कॉलेज के स्तर से उनको पुन: नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि हमें इसका अधिकार नहीं है। यदि शासन रखना चाहे तो रख सकता है।
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डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, प्राचार्य, शेखुल हिन्द मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज, पिलखनी।
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धरने में शामिल रहे पीजीआई कर्मचारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजीव सिंह ने बताया कि कोरोना काल में राजकीय मेडिकल कॉलेज में 226 कर्मचारियों को ठेके पर रखा गया था। इनमें सुपरवाइजर, वार्ड ब्वाय, वार्ड आया, स्वीपर, लिफ्टमैन आदि शामिल थे। उन्हें 7200 रुपये मानदेय के रूप में दिए गए, लेकिन कोरोना का असर कम होने के बाद 10 नवंबर 2021 को सभी को बाहर कर दिया गया। ऐसे में उनके परिवारों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया है। वह बीते करीब 15 दिन से काम पर लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह, सचिव शुभम शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में उन्होंने तब अपनी जान पर खेलकर ड्यूटी की है। ऐसे में सरकार को उनके बारे में सोचना चाहिए था। भीम आर्मी के पदाधिकारियों के नेतृत्व में डीएम दफ्तर पहुंचे निकाले गए कर्मचारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपा। धरने में रविंद्र, दिनेश कुमार, नितिन कुमार, अंजू देवी, विशा रानी, विशाल, विक्रम, सोनाली, सोनिया, टीना, वैशाली, सचिन, रविंद्र कुमार, पिंकू, राहुल कुमार, विकास, श्रवण आदि शामिल रहे।
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जो कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं उनको रखने और हटाने का निर्णय शासन का रहा है। कॉलेज के स्तर से उनको पुन: नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि हमें इसका अधिकार नहीं है। यदि शासन रखना चाहे तो रख सकता है।
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डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, प्राचार्य, शेखुल हिन्द मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज, पिलखनी।