{"_id":"60df55bb8ebc3ed6662eac5f","slug":"be-careful-a-little-carelessness-can-make-you-sick-in-summer-saharanpur-news-mrt5455720164","type":"story","status":"publish","title_hn":"रहें सावधान, गर्मी में जरा सी लापरवाही बना सकती है बीमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रहें सावधान, गर्मी में जरा सी लापरवाही बना सकती है बीमार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। चिलचिलाती धूप और उमस एक ओर जहां लोगों के पसीने छुड़ा रही है, वहीं इससे हीट स्ट्रॉक जैसी बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ गया है। गर्मी पसीने से तर व्यक्ति की जरा सी लापरवाही उसे खांसी, जुकाम और अन्य गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकती है। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
जनपद में सप्ताह भर से भीषण गर्मी पड़ रही है। अधिकतम के साथ ही न्यूनतम तापमान भी ऊपर की ओर जा रहा है। बृहस्पतिवार एक जुलाई का दिन इस सीजन का अब तक का सबसे गर्म रहा, जिसमें अधिकतम तापमान 40 डिग्री रहा। जबकि न्यूनतम तापमान 28.5 डिग्री सेल्सियस था। अगले दिन शुक्रवार को अधिकतम तापमान में तो एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, मगर न्यूनतम तापमान एक डिग्री बढ़ गया। न्यूनतम तापमान के बढ़ने से लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिली। बीते तीन दिन से दोपहर में हवाएं चलने से वह लू में बदल रही हैं। रात के समय हवा पूरी तरह गायब हो जाती है, जिसके बाद गर्मी और परेशान कर रही है। ऐसे में बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि गर्मी में ज्यादातर बीमारियों के होने की वजह हमारी लापरवाही होती है। बीमारियों से बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वह अधिक से अधिक लिक्विड लें, जिसमें नींबू पानी, शिकंजी, ताजा और शुद्ध पानी तथा ओआरएस का घोल शामिल हैं। डॉ. अनिल वोहरा की सलाह है कि तेज गर्मी लगने तथा पसीना आने के दौरान अधिक ठंडे पानी या अन्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। गर्मी से आते ही तुरंत ना नहाएं पहले थोड़ी हवा लेकर पसीना सुखाएं। क्योंकि इससे भी खांसी या जुकाम की समस्या हो सकती है।
हीट स्ट्रॉक के लक्षण
- शरीर का तापमान तेजी से बढ़ना और दौरे पड़ना।
- गफलत में मरीज का उल्टा-सीधा बोलना और ब्लड प्रेशर का नीचे चला जाना।
- चौथी और पांचवीं स्टेज में मरीज का कोमा में चले जाना।
- कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होना।
इन लोगों को अधिक खतरा
- हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों को।
- शुगर, किडनी और सांस के मरीजों को।
- मजदूरों और खेतों में काम करने वालों को।
- ईंट भट्टों और फील्ड में अधिक देर तक काम करने वालों को।
हीट स्ट्रॉक के खतरें से ऐसे बचें
- लगातार फील्ड में काम करने वाले हर घंटे में एक लीटर नींबू पानी, शिकंजी, ओआरएस का घोल या पानी पीयें।
- ऑफिस और फील्ड में समान रूप से काम करने वाले हर घंटे आधा लीटर लिक्विड लें।
- सुविधाजनक ऑफिस में काम करने वाले प्रत्येक घंटे ढाई सौ मिली लीटर लिक्विड लें।
- गांव देहात में हीट स्ट्रॉक आने पर मरीज के शरीर पर तापमान 101 डिग्री पहुंचने पर ठंडी पट्टी बांधें।
- ऐसे रोगियों को हर आधे घंटे में एक लीटर लिक्विड दें।
- यदि मरीज को लिक्विड देना मुमकिन न हो तो साधारण ग्लूकोज चढ़वाएं।
- गर्मियों में सफर के दौरान काला चश्मा, हेलमेट, सिर पर कपड़े आदि का इस्तेमाल करें।
- ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
- फील्ड में चक्कर आने पर रोगी के पैरों की दिशा ऊपर की ओर कर दें, जिससे गर्मी दिमाग में न चढ़े।
- हालत में सुधार न होने पर किसी अच्छे चिकित्सक के पास जाएं।
विज्ञापन
जनपद में सप्ताह भर से भीषण गर्मी पड़ रही है। अधिकतम के साथ ही न्यूनतम तापमान भी ऊपर की ओर जा रहा है। बृहस्पतिवार एक जुलाई का दिन इस सीजन का अब तक का सबसे गर्म रहा, जिसमें अधिकतम तापमान 40 डिग्री रहा। जबकि न्यूनतम तापमान 28.5 डिग्री सेल्सियस था। अगले दिन शुक्रवार को अधिकतम तापमान में तो एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, मगर न्यूनतम तापमान एक डिग्री बढ़ गया। न्यूनतम तापमान के बढ़ने से लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिली। बीते तीन दिन से दोपहर में हवाएं चलने से वह लू में बदल रही हैं। रात के समय हवा पूरी तरह गायब हो जाती है, जिसके बाद गर्मी और परेशान कर रही है। ऐसे में बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि गर्मी में ज्यादातर बीमारियों के होने की वजह हमारी लापरवाही होती है। बीमारियों से बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वह अधिक से अधिक लिक्विड लें, जिसमें नींबू पानी, शिकंजी, ताजा और शुद्ध पानी तथा ओआरएस का घोल शामिल हैं। डॉ. अनिल वोहरा की सलाह है कि तेज गर्मी लगने तथा पसीना आने के दौरान अधिक ठंडे पानी या अन्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। गर्मी से आते ही तुरंत ना नहाएं पहले थोड़ी हवा लेकर पसीना सुखाएं। क्योंकि इससे भी खांसी या जुकाम की समस्या हो सकती है।
विज्ञापन
हीट स्ट्रॉक के लक्षण
- शरीर का तापमान तेजी से बढ़ना और दौरे पड़ना।
- गफलत में मरीज का उल्टा-सीधा बोलना और ब्लड प्रेशर का नीचे चला जाना।
- चौथी और पांचवीं स्टेज में मरीज का कोमा में चले जाना।
- कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होना।
इन लोगों को अधिक खतरा
- हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों को।
- शुगर, किडनी और सांस के मरीजों को।
- मजदूरों और खेतों में काम करने वालों को।
- ईंट भट्टों और फील्ड में अधिक देर तक काम करने वालों को।
हीट स्ट्रॉक के खतरें से ऐसे बचें
- लगातार फील्ड में काम करने वाले हर घंटे में एक लीटर नींबू पानी, शिकंजी, ओआरएस का घोल या पानी पीयें।
- ऑफिस और फील्ड में समान रूप से काम करने वाले हर घंटे आधा लीटर लिक्विड लें।
- सुविधाजनक ऑफिस में काम करने वाले प्रत्येक घंटे ढाई सौ मिली लीटर लिक्विड लें।
- गांव देहात में हीट स्ट्रॉक आने पर मरीज के शरीर पर तापमान 101 डिग्री पहुंचने पर ठंडी पट्टी बांधें।
- ऐसे रोगियों को हर आधे घंटे में एक लीटर लिक्विड दें।
- यदि मरीज को लिक्विड देना मुमकिन न हो तो साधारण ग्लूकोज चढ़वाएं।
- गर्मियों में सफर के दौरान काला चश्मा, हेलमेट, सिर पर कपड़े आदि का इस्तेमाल करें।
- ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
- फील्ड में चक्कर आने पर रोगी के पैरों की दिशा ऊपर की ओर कर दें, जिससे गर्मी दिमाग में न चढ़े।
- हालत में सुधार न होने पर किसी अच्छे चिकित्सक के पास जाएं।