सहारनपुर। जेवी जैन कॉलेज सभागार में जम्मू कश्मीर को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया। जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र की सदस्य निधि बहुगुणा ने जम्मू कश्मीर के इतिहास और संस्कृति पर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर तक का राजस्व भी कश्मीर के राजा को प्राप्त होता था। पीओके स्थित गिलगित बलूचिस्तान के लोगों की सभ्यता और संस्कृति भारतीय संस्कृति से मेल खाती है। आज भी उनका प्रतीक चिन्ह स्वास्तिक है और सूर्य नमस्कार जैसी विधाओं को वह लोग अपनाते हैं। अखंड जम्मू कश्मीर की महत्ता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सामरिक महत्व से जम्मू कश्मीर बहुत महत्वपूर्ण है। ब्रिटिश काल से ही जम्मू कश्मीर से सिल्क रूट की पहुंच आसान थी। पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाले कश्मीर क्षेत्र के कारण भारत की जमीन पहुंच रूस और अन्य संबंधित देशों से पूरी तरह खत्म हुई। संचालन डॉक्टर हरवीर सिंह ने किया। इस मौके पर उप प्राचार्य डॉक्टर विनोद कुमार, डॉक्टर शुभ्रा चतुर्वेदी, डॉक्टर पूनम शर्मा, डॉक्टर वंदना रूहेला, डॉक्टर शशि नौटियाल, डॉक्टर प्रवीण कुमार, डॉक्टर परविंद कुमार, डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार, डॉक्टर संजीव तोमर, डॉक्टर अनुजा अग्रवाल, डॉक्टर मनु, डॉक्टर सीमा, डॉक्टर रेश्मा, डॉक्टर महीपाल आदि मौजूद रहे।