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बाबा लाल दास मैली हो गई तेरी ‘गंगा’
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 21 Feb 2017 12:24 AM IST
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धोबीघाट पर कीचड़ और कचरे से भरी पांवधोई नदी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर की गंगा कही जाने वाली पांवधोई नदी इन दिनों बदहाल है। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) के आदेश के बावजूद प्रशासन की ओर से इस नदी को बचाने के लिए कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। आलम यह है कि नदी का पानी दूषित हो रहा है।
पांवधोई नदी का उद्गम गांव शंकलापुरी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पीछे है। यह नदी बाबा लाल दास के बाड़े से होकर, धोबीघाट और पुल जोगियान से होते हुए ढमोला नदी में गिर रही है। बाबा लाल दास के बाड़े तक इसका पानी स्वच्छ है, जिसमें जलीय जीव पनप रहे हैं, मगर धोबीघाट पर आते ही नदी की हालत किसी नाले जैसी हो गई है। करीब सात साल पहले तत्कालीन डीएम आलोक कुमार ने नदी की सफाई का बीड़ा उठाया था।
इस में शहर के विभिन्न संगठनों और लोगों ने हिस्सा लिया। अभियान का असर यह हुआ कि नदी स्वच्छ हो गई थी। इसके बाद नदी की प्रत्येक वर्ष सफाई के लिए पांवधोई नदी बचाओ समिति बनाई गई। साथ ही नगर निगम की जिम्मेदारी तय की गई थी। तब से प्रत्येक वर्ष अभियान चलता है, लेकिन सच यह है कि अभियान के फोटोग्राफी तक सीमित है, जिसके बाद किसी का ध्यान नदी पर नहीं जाता।
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इन वजहों से दूषित हो रही नदी
शहर के तमाम नालों और सीवर तक का पानी पांवधोई में गिरता है। इसके अलावा सब्जी मंडी के पास सब्जी और फल बेचने वाले सैकड़ों दुकानदार शाम के समय दुकान का सारा कचरा नदी में डालते हैं। इसकी वजह से भी नदी लगातार दूषित हो रही है। इस काम में नगर निगम की लापरवाही भी कम नहीं है। पुल खुमरान पर नगर निगम ने कचरा प्वाइंट बनाया हुआ है। यहां कचरे के लिए कोई बॉक्स आदि नहीं रखा गया है। कचरा नदी में गिरता रहता है।
एनजीटी के आदेश की हो रही अनदेखी
करीब दो वर्ष पहले एनजीटी ने सहारनपुर से होकर गुजरने वाली नदियों की हालत पर चिंता जताई थी। हिंडन नदी को प्रदूषित माना था। इसके अलावा ढमोला नदी और पांवधोई नदी के पानी के लगातार दूषित होने की बात कहते हुए प्रशासन से जरूरी कदम उठाने को कहा था।
हिंडन नदी की बात करें तो इसके आसपास बसे गांवों के नलों का पानी दूषित हो गया है, जिसे पीने से लोगों में कैंसर समेत अनेक जानलेवा बीमारियां फैल रही हैं। अभी तक कई दर्जन लोग अपनी जान तक गवा चुके हैं। उधर, पांवधोई नदी में तीन से चार फुट तक कीचड़ चढ़ा है, इससे पानी पूरा काला हो चुका है।
ये है ऐतिहासिक नदी
माना जाता है कि पांवधोई नदी को सहारनपुर लाने वाले बाबा लाल दास थे। बाबा लाल दास का बाड़ा उन्हीं की तपस्या स्थली है, जहां से होकर यह नदी गुजर रही है। वहीं पर सैकड़ों वर्ष पुराना घाट बना हुआ है, जिस पर आज भी लोग पूजा करने पहुंचते हैं।
पांवधोई नदी को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम गंभीर है। प्रत्येक वर्ष इसकी सफाई कराई जाती है। लोगों से इसमें कूड़ा न डालने की अपील की गई है। इसके बावजूद लोग इसमें कचरा डालते हैं। केवल सफाई करना ही काफी नहीं है। प्रत्येक शहरवासी को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
- ओपी वर्मा, नगरायुक्त।
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पांवधोई नदी का उद्गम गांव शंकलापुरी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पीछे है। यह नदी बाबा लाल दास के बाड़े से होकर, धोबीघाट और पुल जोगियान से होते हुए ढमोला नदी में गिर रही है। बाबा लाल दास के बाड़े तक इसका पानी स्वच्छ है, जिसमें जलीय जीव पनप रहे हैं, मगर धोबीघाट पर आते ही नदी की हालत किसी नाले जैसी हो गई है। करीब सात साल पहले तत्कालीन डीएम आलोक कुमार ने नदी की सफाई का बीड़ा उठाया था।
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इस में शहर के विभिन्न संगठनों और लोगों ने हिस्सा लिया। अभियान का असर यह हुआ कि नदी स्वच्छ हो गई थी। इसके बाद नदी की प्रत्येक वर्ष सफाई के लिए पांवधोई नदी बचाओ समिति बनाई गई। साथ ही नगर निगम की जिम्मेदारी तय की गई थी। तब से प्रत्येक वर्ष अभियान चलता है, लेकिन सच यह है कि अभियान के फोटोग्राफी तक सीमित है, जिसके बाद किसी का ध्यान नदी पर नहीं जाता।
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इन वजहों से दूषित हो रही नदी
शहर के तमाम नालों और सीवर तक का पानी पांवधोई में गिरता है। इसके अलावा सब्जी मंडी के पास सब्जी और फल बेचने वाले सैकड़ों दुकानदार शाम के समय दुकान का सारा कचरा नदी में डालते हैं। इसकी वजह से भी नदी लगातार दूषित हो रही है। इस काम में नगर निगम की लापरवाही भी कम नहीं है। पुल खुमरान पर नगर निगम ने कचरा प्वाइंट बनाया हुआ है। यहां कचरे के लिए कोई बॉक्स आदि नहीं रखा गया है। कचरा नदी में गिरता रहता है।
एनजीटी के आदेश की हो रही अनदेखी
करीब दो वर्ष पहले एनजीटी ने सहारनपुर से होकर गुजरने वाली नदियों की हालत पर चिंता जताई थी। हिंडन नदी को प्रदूषित माना था। इसके अलावा ढमोला नदी और पांवधोई नदी के पानी के लगातार दूषित होने की बात कहते हुए प्रशासन से जरूरी कदम उठाने को कहा था।
हिंडन नदी की बात करें तो इसके आसपास बसे गांवों के नलों का पानी दूषित हो गया है, जिसे पीने से लोगों में कैंसर समेत अनेक जानलेवा बीमारियां फैल रही हैं। अभी तक कई दर्जन लोग अपनी जान तक गवा चुके हैं। उधर, पांवधोई नदी में तीन से चार फुट तक कीचड़ चढ़ा है, इससे पानी पूरा काला हो चुका है।
ये है ऐतिहासिक नदी
माना जाता है कि पांवधोई नदी को सहारनपुर लाने वाले बाबा लाल दास थे। बाबा लाल दास का बाड़ा उन्हीं की तपस्या स्थली है, जहां से होकर यह नदी गुजर रही है। वहीं पर सैकड़ों वर्ष पुराना घाट बना हुआ है, जिस पर आज भी लोग पूजा करने पहुंचते हैं।
पांवधोई नदी को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम गंभीर है। प्रत्येक वर्ष इसकी सफाई कराई जाती है। लोगों से इसमें कूड़ा न डालने की अपील की गई है। इसके बावजूद लोग इसमें कचरा डालते हैं। केवल सफाई करना ही काफी नहीं है। प्रत्येक शहरवासी को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
- ओपी वर्मा, नगरायुक्त।