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कम तो हुआ, पूरी तरह नहीं हो सका कुपोषण का खात्मा
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सहारनपुर। कुपोषण के खात्मे के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के तहत हर माह पुष्टाहार बांटा गया, लेकिन कुुपोषण का पूरी तरह खात्मा नहीं हो सका है। बीते चार वर्षों में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी तो आई, लेकिन अब भी जिले में 21424 कुपोषित और 5828 कुपोषित बच्चे हैं। जनपद में शहर सहित 3410 आंगनवाड़ी केंद्र हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से सरकार के निर्देशानुसार छह वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की गई। विभाग का दावा है कि इन दिनों कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को अनपूरक पोषाहार दिया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को पाऊच में पोषाहार दिया जाता है। इससे पूर्व हॉट कुक फूड योजना के तहत आंगनवाड़ी केंद्र और स्कूलों में पोषण युक्त आहार दिया गया। मगर, कोरोना काल में इस योजना में दिक्कत आई। कोरोना काल से पूर्व सुपोषण माह संचालित किया गया, जिसके तहत गांव-गांव और आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को कुपोषण से बचाने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हुए। अभिभावकों को बच्चों को पौष्टिक आहार देने की सलाह दी गई। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के परिजनों के राशन कार्ड बनवाए गए। ताकि उनको गेहूं, चावल, नमक, चना, चावल सहित राशन डिपो से खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो सके, लेकिन चार वर्षों में इन योजनाओं के संचालित होने के बावजूद जनपद में अब भी पीली श्रेणी में 21424 कुपोषित और लाल श्रेणी में 5828 अति कुपोषित बच्चे हैं।
वर्ष---- कुपोषित -------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5828
अधिकारियों के गोद लिए गांवों में भी कुपोषित बच्चे
सहारनपुर। बच्चों को कुपोषण के दंश से बचाने को अधिकारियों को गांव गोद दिए गए, लेकिन इनमें भी कुपोषित बच्चे हैं। जबकि विभाग का दावा है कि अधिकारियों को गोद दिए 23 में 18 गांव अगस्त माह में कुपोषण मुक्त हो चुुके हैं। जुलाई तक पुवांरका ब्लॉक के जिलाधिकारी के गोद लिए गांव आसनवाली में पीली श्रेणी में दो और लाल श्रेणी में एक बच्चा कुपोषित था। इसी तरह मुख्य विकास अधिकारी के गोद लिए गांव पुवांरका एक-एक बच्चा कुपोषित था। जिला विद्यालय निरीक्षक के गांव सढ़ौली पांच, जिला क्षय रोग अधिकारी के गांव सफीपुर में दो, भूमि संरक्षण अधिकारी के गांव औरगांबाद में 10, जिला उद्यान अधिकारी के गांव मांडूवाला में 25 और इसी तरह जिला गन्ना अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, जिला वन अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहित 23 अधिकारियों के गोद लिए गांवों में 228 कुपोषित और 63 अति कुपोषित बच्चे थे। विभाग का दावा है कि इनमें से अगस्त माह में 18 गांव कुपोषण मुक्त हो चुके हैं। बाकी पांच गांवों को भी कुपोषण कराया जाएगा।
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कुपोषण के खात्मे को लगातार अभियान चल रहा है। कोरोना काल में भी पुष्टाहार वितरित किया जा रहा है। चार सालों में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या कमी आई है। शासन का प्रयास है कि पूरी तरह कुपोषण का खात्मा किया जाए। इसके लिए विभिन्न योजनाएं चलाकर बच्चों को लाभ दिया जा रहा है। अधिकारियों के गोद लिए 23 में से 18 गांव अगस्त माह में कुपोषण मुक्त हो चुके हैं।
आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से सरकार के निर्देशानुसार छह वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की गई। विभाग का दावा है कि इन दिनों कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को अनपूरक पोषाहार दिया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को पाऊच में पोषाहार दिया जाता है। इससे पूर्व हॉट कुक फूड योजना के तहत आंगनवाड़ी केंद्र और स्कूलों में पोषण युक्त आहार दिया गया। मगर, कोरोना काल में इस योजना में दिक्कत आई। कोरोना काल से पूर्व सुपोषण माह संचालित किया गया, जिसके तहत गांव-गांव और आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को कुपोषण से बचाने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हुए। अभिभावकों को बच्चों को पौष्टिक आहार देने की सलाह दी गई। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के परिजनों के राशन कार्ड बनवाए गए। ताकि उनको गेहूं, चावल, नमक, चना, चावल सहित राशन डिपो से खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो सके, लेकिन चार वर्षों में इन योजनाओं के संचालित होने के बावजूद जनपद में अब भी पीली श्रेणी में 21424 कुपोषित और लाल श्रेणी में 5828 अति कुपोषित बच्चे हैं।
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वर्ष---- कुपोषित -------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5828
अधिकारियों के गोद लिए गांवों में भी कुपोषित बच्चे
सहारनपुर। बच्चों को कुपोषण के दंश से बचाने को अधिकारियों को गांव गोद दिए गए, लेकिन इनमें भी कुपोषित बच्चे हैं। जबकि विभाग का दावा है कि अधिकारियों को गोद दिए 23 में 18 गांव अगस्त माह में कुपोषण मुक्त हो चुुके हैं। जुलाई तक पुवांरका ब्लॉक के जिलाधिकारी के गोद लिए गांव आसनवाली में पीली श्रेणी में दो और लाल श्रेणी में एक बच्चा कुपोषित था। इसी तरह मुख्य विकास अधिकारी के गोद लिए गांव पुवांरका एक-एक बच्चा कुपोषित था। जिला विद्यालय निरीक्षक के गांव सढ़ौली पांच, जिला क्षय रोग अधिकारी के गांव सफीपुर में दो, भूमि संरक्षण अधिकारी के गांव औरगांबाद में 10, जिला उद्यान अधिकारी के गांव मांडूवाला में 25 और इसी तरह जिला गन्ना अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, जिला वन अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहित 23 अधिकारियों के गोद लिए गांवों में 228 कुपोषित और 63 अति कुपोषित बच्चे थे। विभाग का दावा है कि इनमें से अगस्त माह में 18 गांव कुपोषण मुक्त हो चुके हैं। बाकी पांच गांवों को भी कुपोषण कराया जाएगा।
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कुपोषण के खात्मे को लगातार अभियान चल रहा है। कोरोना काल में भी पुष्टाहार वितरित किया जा रहा है। चार सालों में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या कमी आई है। शासन का प्रयास है कि पूरी तरह कुपोषण का खात्मा किया जाए। इसके लिए विभिन्न योजनाएं चलाकर बच्चों को लाभ दिया जा रहा है। अधिकारियों के गोद लिए 23 में से 18 गांव अगस्त माह में कुपोषण मुक्त हो चुके हैं।
आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी।