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Saharanpur News: एक और फर्जीवाड़ा, बकाएदारों से 22 लाख वसूले, नहीं कराए निगम में जमा
Tue, 01 Apr 2025 12:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 01 Apr 2025 12:36 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम आए दिन फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। सॉफ्टवेयर हैक का मामला सुर्खियों में है। इन सबके बीच गृहकर एवं जलकर अनुभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा मिला है। कुछ कर्मचारियों ने बकाएदारों से लाखों रुपये लेकर नगर निगम में जमा कराए बिना पोस्टिंग कर दी। जांच बैठने के बाद से कर्मचारियों में खलबली है। अकेले मार्च माह में करीब 22 लाख वसूले गए। कार्रवाई से बचने के लिए कर्मचारियों ने शनिवार को पांच लाख रुपये जमा कराए हैं।
दरअसल, कर संग्रहकर्ता टैक्स की जो वसूली करके नगर निगम के खजाने में जमा कराते हैं। इसके बाद वह लिपिक के साथ मिलकर कंप्यूटर पर पोस्टिंग करते हैं। यानी जिस व्यक्ति से टैक्स की वसूली की है उससे वसूल की गई राशि कंप्यूटर में चढ़ाते हैं, जिसके बाद बकाया राशि शून्य हो जाती है। पता चला है कि कुछ कर संग्रहकर्ताओं ने बकाएदारों से वसूली करने के बाद पैसा नगर निगम में जमा नहीं कराया और पोस्टिंग कर दी। यानी नगर निगम के रिकॉर्ड से उस बकाएदार के नाम के सामने से बकाया शून्य हो गया, लेकिन पैसा नगर निगम के खाते में नहीं गया। इसमें कुछ बिचौलियों के भी शामिल होने की चर्चा है। मार्च में ऐसी करीब 22 लाख रुपये की पोस्टिंग की गई है।
सवाल यह है कि 22 लाख रुपया किसकी जेब में गया। पता चलने के बाद से नगर निगम में हड़कंप मचा है। नगरायुक्त संजय चौहान ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। इसी मामले में तीन कंप्यूटर सील कर जब्त किए गए हैं। सवाल यह है कि यह केवल मार्च का आंकड़ा है। उससे पहले कब से यह चल रहा था यह भी जांच का विषय है। (संवाद)
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दरअसल, कर संग्रहकर्ता टैक्स की जो वसूली करके नगर निगम के खजाने में जमा कराते हैं। इसके बाद वह लिपिक के साथ मिलकर कंप्यूटर पर पोस्टिंग करते हैं। यानी जिस व्यक्ति से टैक्स की वसूली की है उससे वसूल की गई राशि कंप्यूटर में चढ़ाते हैं, जिसके बाद बकाया राशि शून्य हो जाती है। पता चला है कि कुछ कर संग्रहकर्ताओं ने बकाएदारों से वसूली करने के बाद पैसा नगर निगम में जमा नहीं कराया और पोस्टिंग कर दी। यानी नगर निगम के रिकॉर्ड से उस बकाएदार के नाम के सामने से बकाया शून्य हो गया, लेकिन पैसा नगर निगम के खाते में नहीं गया। इसमें कुछ बिचौलियों के भी शामिल होने की चर्चा है। मार्च में ऐसी करीब 22 लाख रुपये की पोस्टिंग की गई है।
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सवाल यह है कि 22 लाख रुपया किसकी जेब में गया। पता चलने के बाद से नगर निगम में हड़कंप मचा है। नगरायुक्त संजय चौहान ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। इसी मामले में तीन कंप्यूटर सील कर जब्त किए गए हैं। सवाल यह है कि यह केवल मार्च का आंकड़ा है। उससे पहले कब से यह चल रहा था यह भी जांच का विषय है। (संवाद)
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