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Saharanpur News: शकरपुर में कैंसर से एक और मौत, तीन साल में 26 मौतों का दावा
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-इलाज के लिए करनाल ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम
फोटो सहित
संवाद न्यूज एजेंसी
गंगोह। गांव शकरपुर में रविवार रात कैंसर से पीड़ित सुनील कुमार की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें बेहतर इलाज की उम्मीद में करनाल ले जाने के लिए निकले, लेकिन सुनील ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में गांव में कैंसर से 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। कई मरीज अभी भी जिंदगी के लिए बीमारी से लड़ रहे हैं।
कैंसर की समस्या से जूझ रहे लोगों की पीड़ा को अमर उजाला प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित वालिया स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि टीम पैरासिटामोल की गोलियां वितरित कर औपचारिकता पूरी करके लौट गई। इसके बाद न तो पेयजल के नमूने लेकर जांच कराई गई और न ही कैंसर के मामलों का विस्तृत सर्वे हुआ। कवरेज के दौरान सुनील और उनकी बेटी से भी बातचीत हुई थी। उन्होंने व अन्य ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि गंगोह से नाले के माध्यम से गांव के बाहर छोड़ा जा रहा गंदा पानी भूमिगत जल को दूषित कर रहा है।
उनके अनुसार, करीब 300-400 बीघा जमीन में दूषित पानी जमा है। अधिकांश सरकारी हैंडपंपों का पानी पीने लायक नहीं बचा है। हर घर जल योजना की टंकी अधूरी होने से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से विशेष शिविर लगाकर मरीजों की जांच, कैंसर के मामलों का सर्वे और पानी की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग दोहराई है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि संबंधित विभाग को पानी की जांच के लिए पत्र लिखा है। जल्द ही जांच कराई जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गंगोह। गांव शकरपुर में रविवार रात कैंसर से पीड़ित सुनील कुमार की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें बेहतर इलाज की उम्मीद में करनाल ले जाने के लिए निकले, लेकिन सुनील ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में गांव में कैंसर से 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। कई मरीज अभी भी जिंदगी के लिए बीमारी से लड़ रहे हैं।
कैंसर की समस्या से जूझ रहे लोगों की पीड़ा को अमर उजाला प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित वालिया स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि टीम पैरासिटामोल की गोलियां वितरित कर औपचारिकता पूरी करके लौट गई। इसके बाद न तो पेयजल के नमूने लेकर जांच कराई गई और न ही कैंसर के मामलों का विस्तृत सर्वे हुआ। कवरेज के दौरान सुनील और उनकी बेटी से भी बातचीत हुई थी। उन्होंने व अन्य ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि गंगोह से नाले के माध्यम से गांव के बाहर छोड़ा जा रहा गंदा पानी भूमिगत जल को दूषित कर रहा है।
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उनके अनुसार, करीब 300-400 बीघा जमीन में दूषित पानी जमा है। अधिकांश सरकारी हैंडपंपों का पानी पीने लायक नहीं बचा है। हर घर जल योजना की टंकी अधूरी होने से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से विशेष शिविर लगाकर मरीजों की जांच, कैंसर के मामलों का सर्वे और पानी की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग दोहराई है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि संबंधित विभाग को पानी की जांच के लिए पत्र लिखा है। जल्द ही जांच कराई जाएगी।
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