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घाटे का सौदा साबित हो रहा पशुपालन
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गौशाला में मौजूद गौवंश
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। भले ही निजी क्षेत्र की डेयरियों द्वारा बाजार में दूध के दाम बढ़ा दिए गए हों, लेकिन पशुपालकों से पुराने भाव में ही दूध की खरीद की जा रही है, जबकि इसके उलट चारे व आहार की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में पशुपालकों के लिए दूध उत्पादन घाटे का सौदा साबित हो रहा है। सितंबर-अक्टूबर के महीने में बारिश होने से खेतों में खड़ी धान की पुराल गलने से नष्ट हो गई थी। इसके अलावा बारिश के डर से जल्दी फसल उठाने के लिए इस बार मजदूरों से फसल की कटाई न कराकर कम्पेन मशीन से कराई गई थी, जिसमें पुराल पूरी तरह से खत्म हो गई। इससे भूसे के दाम में जबरदस्त उछाल आया। पशुपालकों का कहना है कि उन्हें भूसा 1500 रुपये प्रति क्विंटल खरीदना पड़ रहा है। सूंडी आने से मक्का की फसल भी नष्ट हो गई थी। इसकी वजह से भी चारे की कमी हुई और मजबूरी में पशुओं को भूसा ही खिलाना पड़ रहा है। हरा चारा तो किसी भी भाव नहीं मिला। पशु आहार की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
प्रति लीटर दूध पर घट रहे पांच से छह रुपये
बेहट क्षेत्र के गांव शाहपुर के पशुपालक कुलदीप सिंह का कहना है, कि भूसे के दाम 600 रुपये से बढ़कर 1500 रुपये हो गए हैं। हरे चारे की कीमत 200 रुपये से बढ़कर 400 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। चोकर का बोरा 1200 रुपये, खल का बोरा 2300 रुपये है, जबकि उनका दूध वही पुराने रेट में खरीदा जा रहा है। भैंस का दूध 50 रुपये व गाय का दूध 40 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। यदि वह खर्च का हिसाब लगाएं तो उन्हें प्रति लीटर 5 से 6 रुपये का नुकसान हो रहा है। छुटमलपुर निवासी पशुपालक आदेश गर्ग बताते हैं कि एक पशु का प्रतिदिन का चारे और दाने आदि का खर्च तीन सौ रुपये आता है। बीमारी आदि का खर्च अलग से है। औसतन सात से आठ लीटर दूध गाय देती है। गाय का दूध चालीस रुपये प्रति लीटर खुदरा बिकता है। इसे डेयरी पर दिया जाए तो यह 30 रुपये ही जाता है। ऐसे में पशु पालन नुकसान का सौदा साबित हो रहा है।
चारे में तीन सौ साठ रुपये क्विंटल तक बिका गन्ना
घास मशीन संचालक राजेश कुमार ने बताया कि हरे चारे के चढ़ते भाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस बार गन्ना तक चारे में कट कर बिक गया। किसान को घास मशीन पर इस बार गन्ने का भाव तीन सौ साठ रुपये प्रति क्विंटल तक मिला है, जबकि बरसीम और जई का भाव भी तीन से साढ़े तीन सौ रुपये क्विंटल फिलहाल चल रहा है। ऐसे में कसबों में तो पशु पालन साफ तौर पर नुकसान का सौदा है।
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प्रति लीटर दूध पर घट रहे पांच से छह रुपये
बेहट क्षेत्र के गांव शाहपुर के पशुपालक कुलदीप सिंह का कहना है, कि भूसे के दाम 600 रुपये से बढ़कर 1500 रुपये हो गए हैं। हरे चारे की कीमत 200 रुपये से बढ़कर 400 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। चोकर का बोरा 1200 रुपये, खल का बोरा 2300 रुपये है, जबकि उनका दूध वही पुराने रेट में खरीदा जा रहा है। भैंस का दूध 50 रुपये व गाय का दूध 40 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। यदि वह खर्च का हिसाब लगाएं तो उन्हें प्रति लीटर 5 से 6 रुपये का नुकसान हो रहा है। छुटमलपुर निवासी पशुपालक आदेश गर्ग बताते हैं कि एक पशु का प्रतिदिन का चारे और दाने आदि का खर्च तीन सौ रुपये आता है। बीमारी आदि का खर्च अलग से है। औसतन सात से आठ लीटर दूध गाय देती है। गाय का दूध चालीस रुपये प्रति लीटर खुदरा बिकता है। इसे डेयरी पर दिया जाए तो यह 30 रुपये ही जाता है। ऐसे में पशु पालन नुकसान का सौदा साबित हो रहा है।
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चारे में तीन सौ साठ रुपये क्विंटल तक बिका गन्ना
घास मशीन संचालक राजेश कुमार ने बताया कि हरे चारे के चढ़ते भाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस बार गन्ना तक चारे में कट कर बिक गया। किसान को घास मशीन पर इस बार गन्ने का भाव तीन सौ साठ रुपये प्रति क्विंटल तक मिला है, जबकि बरसीम और जई का भाव भी तीन से साढ़े तीन सौ रुपये क्विंटल फिलहाल चल रहा है। ऐसे में कसबों में तो पशु पालन साफ तौर पर नुकसान का सौदा है।

पशुपालक कुलदीप सिंह- फोटो : SAHARANPUR
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