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एंड्रॉयड टच स्क्रीन बोर्ड ने मुश्किल पढ़ाई को किया आसान
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एंड्रॉयड टच स्क्रीन बोर्ड ने मुश्किल पढ़ाई को किया आसान
सहारनपुर। पुल जोगियान स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की तीन कक्षाओं में ब्लैक बोर्ड की जगह 75 इंच के इंटरएक्टिव डिस्प्ले बोर्ड ने ले ली है, जो पूरी तरह एंड्रॉयड और टच स्क्रीन है। यह बोर्ड इंटरनेट से कनेक्ट होने के बाद किसी स्मार्ट फोन की तरह काम करता है, जिस पर हर विषय की सामग्री को वीडियो, फोटो या फिर लिखित रूप में देख, सुन व पढ़ सकते हैं। खास बात यह है कि जिस मकसद से यह स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं, वह मकसद पूरा होता नजर आ रहा है। अमर उजाला ने स्मार्ट क्लास में पढ़ रही कुछ छात्राओं से बात कर उनकी राय जानने का प्रयास किया। छात्राओं बताया कि ब्लैक बोर्ड की तुलना में टच स्क्रीन बोर्ड से वह करीब कई गुना अधिक बेहतर और सरल तरीके से चीजों को समझ पा रही हैं। पेश है रिपोर्ट...
छात्राओं का पक्ष...
-कक्षा 12 की सना का कहना है कि जो व्यक्ति साधारण फोन चलाता हो और उसे अचानक से स्मार्ट फोन मिल जाए वह भी इंटरनेट सुविधा के साथ तो जो खुशी उसको होती है, वही खुशी स्मार्ट क्लास से उनको हो रही है। सना ने बताया कि स्मार्ट बोर्ड के जरिए की जा रही पढ़ाई से वह ज्यादा सरल तरीके से चीजों को समझ पा रही हैं।
-हिमांशी ने बताया कि स्मार्ट क्लास बनने के बाद कक्षा में बैठना अच्छा लग रहा है। पहले जहां छात्राएं गैरहाजिर रहती थी, अब शत प्रतिशत उपस्थिति दे रही हैं, क्योंकि स्मार्ट क्लास आकर्षक भी है। स्मार्ट क्लास में टच स्क्रीन बोर्ड के माध्यम से वीडियो, फोटो या पठनीय सामग्री को सामने पाते हैं।
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-शिल्पा का दावा है कि उनकी क्लास महंगी फीस वाले प्राइवेट स्कूलों की कक्षाओं को फेल कर रही है। जहां नया फर्नीचर, पैनल लगी हुई वाल और छत पर सीलिंग। ऐसी कक्षाओं में बैठकर पढ़ना अच्छा लगता है। कठिन से कठिन विषय को ज्यादातर बेहतर ढंग से समझ पा रही हैं।
-साक्षी ने बताया कि वह विज्ञान की छात्रा है। विज्ञान विषयों में कई चीजें ऐसी होती हैं, जिनको ब्लैक बोर्ड के जरिए समझना आसान नहीं होता था, लेकिन अब उनको पिक्चर्स और वीडियो के जरिए सरलता से समझ पा रही है।
- जैनब ने बताया कि स्मार्ट क्लास में पढ़ने में एक ओर जहां चीजें सरलता से समझ में आ रही हैं वहीं आनंद भी आता है।
मंडलायुक्त, संयुक्त निदेशक और जिला विद्यालय निरीक्षक के प्रयास से तीन स्मार्ट क्लास बनना सफल हो सका है। मंडलायुक्त के कहने पर आईटीसी और पीडब्ल्यूडी ने दो स्मार्ट क्लास दी हैं, जबकि तीसरी स्मार्ट क्लास के लिए मधुसूदन की ओर से पैसा दिया गया है। छात्राएं भी अब ज्यादातर बेहतर ढंग से चीजों को समझ पा रही हैं।
- शोभा चौधरी, प्रधानाचार्य
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सहारनपुर। पुल जोगियान स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की तीन कक्षाओं में ब्लैक बोर्ड की जगह 75 इंच के इंटरएक्टिव डिस्प्ले बोर्ड ने ले ली है, जो पूरी तरह एंड्रॉयड और टच स्क्रीन है। यह बोर्ड इंटरनेट से कनेक्ट होने के बाद किसी स्मार्ट फोन की तरह काम करता है, जिस पर हर विषय की सामग्री को वीडियो, फोटो या फिर लिखित रूप में देख, सुन व पढ़ सकते हैं। खास बात यह है कि जिस मकसद से यह स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं, वह मकसद पूरा होता नजर आ रहा है। अमर उजाला ने स्मार्ट क्लास में पढ़ रही कुछ छात्राओं से बात कर उनकी राय जानने का प्रयास किया। छात्राओं बताया कि ब्लैक बोर्ड की तुलना में टच स्क्रीन बोर्ड से वह करीब कई गुना अधिक बेहतर और सरल तरीके से चीजों को समझ पा रही हैं। पेश है रिपोर्ट...
छात्राओं का पक्ष...
-कक्षा 12 की सना का कहना है कि जो व्यक्ति साधारण फोन चलाता हो और उसे अचानक से स्मार्ट फोन मिल जाए वह भी इंटरनेट सुविधा के साथ तो जो खुशी उसको होती है, वही खुशी स्मार्ट क्लास से उनको हो रही है। सना ने बताया कि स्मार्ट बोर्ड के जरिए की जा रही पढ़ाई से वह ज्यादा सरल तरीके से चीजों को समझ पा रही हैं।
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-हिमांशी ने बताया कि स्मार्ट क्लास बनने के बाद कक्षा में बैठना अच्छा लग रहा है। पहले जहां छात्राएं गैरहाजिर रहती थी, अब शत प्रतिशत उपस्थिति दे रही हैं, क्योंकि स्मार्ट क्लास आकर्षक भी है। स्मार्ट क्लास में टच स्क्रीन बोर्ड के माध्यम से वीडियो, फोटो या पठनीय सामग्री को सामने पाते हैं।
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-शिल्पा का दावा है कि उनकी क्लास महंगी फीस वाले प्राइवेट स्कूलों की कक्षाओं को फेल कर रही है। जहां नया फर्नीचर, पैनल लगी हुई वाल और छत पर सीलिंग। ऐसी कक्षाओं में बैठकर पढ़ना अच्छा लगता है। कठिन से कठिन विषय को ज्यादातर बेहतर ढंग से समझ पा रही हैं।
-साक्षी ने बताया कि वह विज्ञान की छात्रा है। विज्ञान विषयों में कई चीजें ऐसी होती हैं, जिनको ब्लैक बोर्ड के जरिए समझना आसान नहीं होता था, लेकिन अब उनको पिक्चर्स और वीडियो के जरिए सरलता से समझ पा रही है।
- जैनब ने बताया कि स्मार्ट क्लास में पढ़ने में एक ओर जहां चीजें सरलता से समझ में आ रही हैं वहीं आनंद भी आता है।
मंडलायुक्त, संयुक्त निदेशक और जिला विद्यालय निरीक्षक के प्रयास से तीन स्मार्ट क्लास बनना सफल हो सका है। मंडलायुक्त के कहने पर आईटीसी और पीडब्ल्यूडी ने दो स्मार्ट क्लास दी हैं, जबकि तीसरी स्मार्ट क्लास के लिए मधुसूदन की ओर से पैसा दिया गया है। छात्राएं भी अब ज्यादातर बेहतर ढंग से चीजों को समझ पा रही हैं।
- शोभा चौधरी, प्रधानाचार्य

सना, छात्रा।- फोटो : SAHARANPUR

साक्षी, छात्रा।- फोटो : SAHARANPUR

शिल्पा, छात्रा।- फोटो : SAHARANPUR