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पेश की ऐसी मिसाल जो नजीर बन गई
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 29 May 2017 12:24 AM IST
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सुरक्षा की दृष्टि से तैनात पुलिस फोर्स।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में डेढ़ माह हो गया सहारनपुर को हिंसा की आग में जलते-जलते। खुरापाती इसे ठंडा ही नहीं होने दे रहे। संभालका जुनारदार में खुरापातियों ने फिर से माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया।
लेकिन गांव के दलितों ने सौहार्द और समझदारी की ऐसी मिसाल पेश की जो अब तक के मामलों में नजीर ही बन गई। मंदिर कमेटी ने खुद ही शिवलिंग स्थापित करते हुए दूसरे समुदाय पर उंगली उठाने के बजाए अपने ही समुदाय के किसी युवक पर इस करतूत को अंजाम देने का आरोप लगाते हुए मामले को ही शांत कर दिया।
सहारनपुर की शांति तो 20 अप्रैल को सड़क दूधली में हुए बवाल ने ही बिगाड़ डाली थी। वह शांत भी नहीं हो पाई थी कि 5 मई को शब्बीरपुर में बवाल हो गया। शब्बीरपुर बवाल का ऐसा तूफान उठा कि लखनऊ तक की राजनीति गरमा गई।
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शब्बीरपुर बवाल के बाद नौ मई को पूरे जिले में बवाल मचाया गया। आगजनी, तोड़फोड़, फायरिंग, मारपीट सब कुछ किया। उसके बाद से छुटपुट मामले लगातार हो रहे हैं।
23 मई को मायावती की सभा से लौट रहे लोगों पर हुए हमले में एक की मौत ने सहारनपुर में सियासत गर्मा दी। मायावती के बाद राहुल गांधी सहारनपुर पहुंच गए। इससे राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गईं।
प्रदेश ही नहीं केंद्र की सरकार तक सहारनपुर का मामला पहुंच गया। डेढ़ महीने से सहारनपुर सुर्खियों में छाया हुआ है। लेकिन खुरापाती अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं।
रविवार को सिंभालका जुनारदार में संत रविदास मंदिर में शिवलिंग उखाड़कर एक बार फिर से मामले को भड़काने की कोशिश की। हालांकि गांव के दलितों ने ही समझदारी से मामले को बढ़ने से रोक लिया गया।
लोगों ने इस खुरापात में अपने ही लोगों का हाथ होने की आशंका जताते हुए किसी प्रकार का प्रतिरोध नहीं होने दिया। पुलिस ने भी इससे राहत की सांस ली।
सीओ अब्दुल कादिर ने बताया कि गांव के लोगों ने समझदारी के साथ ही सौहार्द की नजीर पेश की है। उन्होंने किसी पर आरोप नहीं लगाया, बल्कि किसी खुरापाती की मंशा को पूरी न होने देने का संकल्प लिया और खुद ही शिवलिंग स्थापित कराया। सीओ ने इसे अच्छी पहल बताया।
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लेकिन गांव के दलितों ने सौहार्द और समझदारी की ऐसी मिसाल पेश की जो अब तक के मामलों में नजीर ही बन गई। मंदिर कमेटी ने खुद ही शिवलिंग स्थापित करते हुए दूसरे समुदाय पर उंगली उठाने के बजाए अपने ही समुदाय के किसी युवक पर इस करतूत को अंजाम देने का आरोप लगाते हुए मामले को ही शांत कर दिया।
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सहारनपुर की शांति तो 20 अप्रैल को सड़क दूधली में हुए बवाल ने ही बिगाड़ डाली थी। वह शांत भी नहीं हो पाई थी कि 5 मई को शब्बीरपुर में बवाल हो गया। शब्बीरपुर बवाल का ऐसा तूफान उठा कि लखनऊ तक की राजनीति गरमा गई।
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शब्बीरपुर बवाल के बाद नौ मई को पूरे जिले में बवाल मचाया गया। आगजनी, तोड़फोड़, फायरिंग, मारपीट सब कुछ किया। उसके बाद से छुटपुट मामले लगातार हो रहे हैं।
23 मई को मायावती की सभा से लौट रहे लोगों पर हुए हमले में एक की मौत ने सहारनपुर में सियासत गर्मा दी। मायावती के बाद राहुल गांधी सहारनपुर पहुंच गए। इससे राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गईं।
प्रदेश ही नहीं केंद्र की सरकार तक सहारनपुर का मामला पहुंच गया। डेढ़ महीने से सहारनपुर सुर्खियों में छाया हुआ है। लेकिन खुरापाती अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं।
रविवार को सिंभालका जुनारदार में संत रविदास मंदिर में शिवलिंग उखाड़कर एक बार फिर से मामले को भड़काने की कोशिश की। हालांकि गांव के दलितों ने ही समझदारी से मामले को बढ़ने से रोक लिया गया।
लोगों ने इस खुरापात में अपने ही लोगों का हाथ होने की आशंका जताते हुए किसी प्रकार का प्रतिरोध नहीं होने दिया। पुलिस ने भी इससे राहत की सांस ली।
सीओ अब्दुल कादिर ने बताया कि गांव के लोगों ने समझदारी के साथ ही सौहार्द की नजीर पेश की है। उन्होंने किसी पर आरोप नहीं लगाया, बल्कि किसी खुरापाती की मंशा को पूरी न होने देने का संकल्प लिया और खुद ही शिवलिंग स्थापित कराया। सीओ ने इसे अच्छी पहल बताया।