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एंबुलेंस चालक ने गर्भवती को सड़क पर छोड़ा, नवजात की मौत
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बड़गांव (सहारनपुर)। 102 एंबुलेंस चालक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा में बीच सड़क छोड़कर भाग निकला। परिजन किसी तरह गर्भवती को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक गर्भवती की हालत बिगड़ चुकी थी। स्वास्थ्य केंद्र पर महिला स्टाफ ने किसी तरह प्रसव कराया, जिसमें बच्ची मृत पैदा हुई। गर्भवती को सुरक्षित बचा लिया गया। बच्ची की मौत पर परिजनों ने हंगामा किया, जिस पर प्रभारी चिकित्साधिकारी ने एंबुलेंस चालक के खिलाफ कार्रवाई करवाने का आश्वासन देकर उन्हें शांति किया।
गांव बेहड़ा निवासी सोनू कुमार ने पत्नी सोनिया की प्रसव पीड़ा के चलते 102 एंबुलेंस को कॉल किया था। एंबुलेंस चालक सोनिया को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जड़ौदा पांडा के लिए निकला, लेकिन सोनू कुमार और परिजन सोनिया को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव लेकर जाने को कहने लगे। उनका कहना था कि सोनिया का इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही चल रहा है। आरोप है कि एंबुलेंस चालक नहीं माना। इस बात को लेकर एंबुलेंस चालक के साथ सोनिया के परिजनों की बहस हुई, जिसके बाद एंबुलेंस चालक ने सोनिया को बीच सड़क पर उतार दिया और वहां से एंबुलेंस लेकर चला गया। सोनिया काफी देर तक सड़क पर पड़ी तड़पती रही। इसके बाद परिजन प्राइवेट वाहन से सोनिया को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव पहुंचे, लेकिन तब तक सोनिया की हालत बिगड़ चुकी थी। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ के लिए सोनिया को बचाना बेहद जरूरी था। उन्होंने किसी तरह प्रसव कराया, जिसमें सोनिया की जान तो बच गई, लेकिन बच्ची को वह नहीं बचा सके। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. सचिन मलिक का कहना है कि सोनिया की हालत अधिक खराब थी। बच्ची पेट में ही मर गई थी। स्टाफ ने बड़ी सावधानी के साथ प्रसव कराया है। मामले में सोनू ने एंबुलेंस चालक के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है।
नवजात बच्ची अभी जिंदा, जांच करेंगे
102 एंबुलेंस सेवा के प्रभारी जितेंद्र को बच्ची की मौत होने का पता नहीं है। जितेंद्र का कहना है कि सोनिया के परिवार की ओर से एंबुलेंस को फोन ही नहीं किया गया था। एंबुलेंस किसी और मरीज को लेने के लिए जा रही थी। रास्ते में एंबुलेंस को रोककर सोनिया और उसके परिजन सवार हुए थे। जितेंद्र ने बताया कि एंबुलेंस चालक और गर्भवती के पति सोनू का शिकायती पत्र उन्हें प्राप्त हुआ है, लेकिन नवजात बच्ची की अभी मौत नहीं हुई है उसका इलाज चल रहा है। शुक्रवार को दोनों पक्षों की बात सुनकर मामले की पड़ताल कराई जाएगी।
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यदि गर्भवती को एंबुलेंस चालक द्वार प्रसव पीड़ा में सड़क पर छोड़ा गया है तो यह गंभीर मामला है। इसके बाद नवजात की मौत हो जाना और गंभीर स्थिति को दर्शाता है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि वास्तव में एंबुलेंस चालक ने ऐसा किया है तो कार्रवाई के लिए लखनऊ पत्र लिखा जाएगा।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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गांव बेहड़ा निवासी सोनू कुमार ने पत्नी सोनिया की प्रसव पीड़ा के चलते 102 एंबुलेंस को कॉल किया था। एंबुलेंस चालक सोनिया को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जड़ौदा पांडा के लिए निकला, लेकिन सोनू कुमार और परिजन सोनिया को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव लेकर जाने को कहने लगे। उनका कहना था कि सोनिया का इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही चल रहा है। आरोप है कि एंबुलेंस चालक नहीं माना। इस बात को लेकर एंबुलेंस चालक के साथ सोनिया के परिजनों की बहस हुई, जिसके बाद एंबुलेंस चालक ने सोनिया को बीच सड़क पर उतार दिया और वहां से एंबुलेंस लेकर चला गया। सोनिया काफी देर तक सड़क पर पड़ी तड़पती रही। इसके बाद परिजन प्राइवेट वाहन से सोनिया को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव पहुंचे, लेकिन तब तक सोनिया की हालत बिगड़ चुकी थी। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ के लिए सोनिया को बचाना बेहद जरूरी था। उन्होंने किसी तरह प्रसव कराया, जिसमें सोनिया की जान तो बच गई, लेकिन बच्ची को वह नहीं बचा सके। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. सचिन मलिक का कहना है कि सोनिया की हालत अधिक खराब थी। बच्ची पेट में ही मर गई थी। स्टाफ ने बड़ी सावधानी के साथ प्रसव कराया है। मामले में सोनू ने एंबुलेंस चालक के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है।
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नवजात बच्ची अभी जिंदा, जांच करेंगे
102 एंबुलेंस सेवा के प्रभारी जितेंद्र को बच्ची की मौत होने का पता नहीं है। जितेंद्र का कहना है कि सोनिया के परिवार की ओर से एंबुलेंस को फोन ही नहीं किया गया था। एंबुलेंस किसी और मरीज को लेने के लिए जा रही थी। रास्ते में एंबुलेंस को रोककर सोनिया और उसके परिजन सवार हुए थे। जितेंद्र ने बताया कि एंबुलेंस चालक और गर्भवती के पति सोनू का शिकायती पत्र उन्हें प्राप्त हुआ है, लेकिन नवजात बच्ची की अभी मौत नहीं हुई है उसका इलाज चल रहा है। शुक्रवार को दोनों पक्षों की बात सुनकर मामले की पड़ताल कराई जाएगी।
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यदि गर्भवती को एंबुलेंस चालक द्वार प्रसव पीड़ा में सड़क पर छोड़ा गया है तो यह गंभीर मामला है। इसके बाद नवजात की मौत हो जाना और गंभीर स्थिति को दर्शाता है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि वास्तव में एंबुलेंस चालक ने ऐसा किया है तो कार्रवाई के लिए लखनऊ पत्र लिखा जाएगा।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।