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Saharanpur News: 78 करोड़ के टेंडर में फर्जीवाड़े के आरोप, बैठी जांच
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सहारनपुर। नगर निगम के 78 करोड़ रुपये के सफाई के ठेके की टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभागी फर्मों पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। शिकायत मिलने के बाद मंडलायुक्त ने पूरे मामले पर नगर आयुक्त को जांच के आदेश दिए हैं। इसके बाद से फर्मों में खलबली है।
नगर निगम बोर्ड ने कुल 70 में से 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था ठेके पर देने का प्रस्ताव पास किया था। इन दिनों टेंडर की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें शामिल फर्मों द्वारा टेंडर प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में रमेश सिंह नाम के व्यक्ति द्वारा मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार और नगर आयुक्त शिपू गिरि से शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ प्रमुख प्रतिभागियों ने फर्जी तरीके से मिलीभगत कर तैयार किए गए कागज प्रस्तुत किए हैं। प्रतिभागियों ने अपनी फर्म के लिए जो सॉल्वेंसी का प्रमाण पत्र बैंक के माध्यम से बनवाया गया है वह ठीक से पढ़ा नहीं जा रहा है। उसमें बैंक के नाम तक का ठीक से उल्लेख नहीं है और न ही ब्रांच का। हस्ताक्षर करने वाले पदाधिकारी का कोड भी नहीं है। केवल दिनांक और राशि को ही विशेष रूप से दर्शाया गया है, जो अपर्याप्त है।
शिकायतकर्ता ने दूसरी फर्म एमएस इंटरप्राइजेज के सॉल्वेंसी प्रमाण पत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि प्रमाण पत्र बैंक के लेटर पैड पर नहीं है। सिर्फ प्लेन पेपर पर बैंक का लोगो लगा है, जो प्रथम दृष्टया बैंक द्वारा जारी किया हुआ नहीं लगता। बैंक द्वारा जो मुहर लगाई गई है वह भी स्पष्ट नहीं है। साथ ही किसी भी अधिकारी का न तो पदनाम है और न ही कोड। अन्य कई आरोप भी लगे हैं। शिकायतकर्ता ने संबंधित फर्मों से कागजों की मूल प्रति मंगवाकर जांच कराने और बैंक से सत्यापन कराने की मांग की है। मंडल आयुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने नगर आयुक्त को प्रकरण की नियमानुसार जांच कराते हुए कार्रवाई करने के लिए लिखा है।
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-- अन्य फर्मों की भी हो चुकी है शिकायत
इसी टेंडर प्रक्रिया में दो दिन पहले मैसर्स अग्रवाल एंड कंपनी की शिकायत नगर आयुक्त से की जा चुकी है। उक्त मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया था कि दो करोड़ रुपये की एफडीआर (फिक्स्ड डिपोजिट रसीद) फर्जी है। मामले में नगर आयुक्त के द्वारा जांच कराई जा रही है।
-- वर्जन
इस प्रकरण में शिकायत मिलने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में जो भी मामला सामने आएगा उसके हिसाब से आगामी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी हालत में फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त
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नगर निगम बोर्ड ने कुल 70 में से 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था ठेके पर देने का प्रस्ताव पास किया था। इन दिनों टेंडर की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें शामिल फर्मों द्वारा टेंडर प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में रमेश सिंह नाम के व्यक्ति द्वारा मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार और नगर आयुक्त शिपू गिरि से शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ प्रमुख प्रतिभागियों ने फर्जी तरीके से मिलीभगत कर तैयार किए गए कागज प्रस्तुत किए हैं। प्रतिभागियों ने अपनी फर्म के लिए जो सॉल्वेंसी का प्रमाण पत्र बैंक के माध्यम से बनवाया गया है वह ठीक से पढ़ा नहीं जा रहा है। उसमें बैंक के नाम तक का ठीक से उल्लेख नहीं है और न ही ब्रांच का। हस्ताक्षर करने वाले पदाधिकारी का कोड भी नहीं है। केवल दिनांक और राशि को ही विशेष रूप से दर्शाया गया है, जो अपर्याप्त है।
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शिकायतकर्ता ने दूसरी फर्म एमएस इंटरप्राइजेज के सॉल्वेंसी प्रमाण पत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि प्रमाण पत्र बैंक के लेटर पैड पर नहीं है। सिर्फ प्लेन पेपर पर बैंक का लोगो लगा है, जो प्रथम दृष्टया बैंक द्वारा जारी किया हुआ नहीं लगता। बैंक द्वारा जो मुहर लगाई गई है वह भी स्पष्ट नहीं है। साथ ही किसी भी अधिकारी का न तो पदनाम है और न ही कोड। अन्य कई आरोप भी लगे हैं। शिकायतकर्ता ने संबंधित फर्मों से कागजों की मूल प्रति मंगवाकर जांच कराने और बैंक से सत्यापन कराने की मांग की है। मंडल आयुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने नगर आयुक्त को प्रकरण की नियमानुसार जांच कराते हुए कार्रवाई करने के लिए लिखा है।
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इसी टेंडर प्रक्रिया में दो दिन पहले मैसर्स अग्रवाल एंड कंपनी की शिकायत नगर आयुक्त से की जा चुकी है। उक्त मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया था कि दो करोड़ रुपये की एफडीआर (फिक्स्ड डिपोजिट रसीद) फर्जी है। मामले में नगर आयुक्त के द्वारा जांच कराई जा रही है।
इस प्रकरण में शिकायत मिलने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में जो भी मामला सामने आएगा उसके हिसाब से आगामी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी हालत में फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त