{"_id":"69d413e1184aa3123e0ff9ea","slug":"allegations-of-corruption-in-payment-of-fee-reimbursement-suit-accepted-saharanpur-news-c-30-1-sha1004-172899-2026-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान में लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, वाद स्वीकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान में लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, वाद स्वीकार
Tue, 07 Apr 2026 01:43 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:43 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। बीडीएम पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अशोक मलिक ने न्यायालय विशेष न्यायाधीश की अदालत में याचिका दाखिल की है। याचिका में उन्होंने आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान में भ्रष्टाचार के आरोप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व कर्मियों पर लगाए हैं। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई की अगली तिथि 25 अप्रैल निर्धारित की है।
अदालत में दी याचिका में अशोक मलिक ने कहा कि लाटरी के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मानक पूरे करने वाले छात्रों को निजी विद्यालय में भेजते हैं। सत्र 2024-25 में अध्ययनरत आरटीई के 24 छात्रों का प्रवेश विद्यालय में हुआ था। बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के भुगतान के लिए जिलाधिकारी सहारनपुर ने अधिकारियों से जांच कराई। जांच खंड शिक्षा अधिकारी देवबंद ने की। इसमें 24 में से 22 छात्र विद्यालय में उपस्थित पाए गए। सत्यापन के बाद 24 बच्चों की 450 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 11 माह का भुगतान करने की रिपोर्ट दी। आरोप लगाया कि फर्जी शिकायत के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी बलियाखेड़ी जितेंद्र कुमार, गंगोह अमरीक प्रसाद ओझा, वित्त एवं लेखाधिकारी संजय द्विवेदी से जांच कराई।
बताया कि उस जांच में भी 24 में से 15 से 20 छात्र आरटीई के तहत मिले। कहा कि जब रिश्वत देने से मना किया तो उनकी शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान रोक दिया। इस संबंध में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका की सुनवाई के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व अन्यों ने आपत्ति दाखिल की। इसमें तय समय तक अमरीक प्रसाद ने कोई आपत्ति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। साथ ही सुनवाई की अगली तारीख भी निर्धारित की है।
विज्ञापन
वहीं, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कोमल ने बताया कि लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने बताया कि अशोक मलिक द्वारा संचालित विद्यालयों के पास मान्यता नहीं है। जिन बच्चों के नाम पर शुल्क प्रतिपूर्ति कराई गई उनका रिकॉर्ड नहीं मिला है। कई स्तर पर जांच में यह सिद्ध हो चुका है। न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
विज्ञापन
अदालत में दी याचिका में अशोक मलिक ने कहा कि लाटरी के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मानक पूरे करने वाले छात्रों को निजी विद्यालय में भेजते हैं। सत्र 2024-25 में अध्ययनरत आरटीई के 24 छात्रों का प्रवेश विद्यालय में हुआ था। बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के भुगतान के लिए जिलाधिकारी सहारनपुर ने अधिकारियों से जांच कराई। जांच खंड शिक्षा अधिकारी देवबंद ने की। इसमें 24 में से 22 छात्र विद्यालय में उपस्थित पाए गए। सत्यापन के बाद 24 बच्चों की 450 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 11 माह का भुगतान करने की रिपोर्ट दी। आरोप लगाया कि फर्जी शिकायत के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी बलियाखेड़ी जितेंद्र कुमार, गंगोह अमरीक प्रसाद ओझा, वित्त एवं लेखाधिकारी संजय द्विवेदी से जांच कराई।
विज्ञापन
बताया कि उस जांच में भी 24 में से 15 से 20 छात्र आरटीई के तहत मिले। कहा कि जब रिश्वत देने से मना किया तो उनकी शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान रोक दिया। इस संबंध में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका की सुनवाई के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व अन्यों ने आपत्ति दाखिल की। इसमें तय समय तक अमरीक प्रसाद ने कोई आपत्ति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। साथ ही सुनवाई की अगली तारीख भी निर्धारित की है।
विज्ञापन
वहीं, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कोमल ने बताया कि लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने बताया कि अशोक मलिक द्वारा संचालित विद्यालयों के पास मान्यता नहीं है। जिन बच्चों के नाम पर शुल्क प्रतिपूर्ति कराई गई उनका रिकॉर्ड नहीं मिला है। कई स्तर पर जांच में यह सिद्ध हो चुका है। न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएंगे।