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Saharanpur News: डीसीडीएफ की 1325 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप
Tue, 02 Sep 2025 12:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 02 Sep 2025 12:23 AM IST
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सहारनपुर। अंबाला रोड स्थित डीसीडीएफ (जिला सहकारी विकास संघ लिमिटेड) की करीब 1325 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप है। समिति ने वर्ष 1984 में जमीन पर संचालित व्यवसाय और कब्जे के अनुबंध को खत्म कर दिया था। आरोप है कि इसके बाद अभी तक जमीन से कब्जा नहीं छोड़ा गया है। अब मामले की जांच की जा रही है।
ग्राम सालाहपुर निवासी महावीर सिंह ने जमीन पर अवैध कब्जे और व्यवसाय की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की थी। उन्होंने बताया कि संचालक मंडल डीसीडीएफ की बैठक 27 दिसंबर 1980 में हुई। बैठक में एक जनवरी 1981 से 31 दिसंबर 1982 तक दो वर्षों के जमीन को 700 रुपये प्रतिमाह के किराये अनुबंध पर दिया गया। उन्होंने बताया कि किराये का अंतिम अनुबंध सात जनवरी 1983 का है। इसमें एक जनवरी 1983 से 31 दिसंबर 1984 के बाद अनुबंध समाप्त हो गया। इसके बाद भी डीसीडीएफ की जमीन पर व्यवसाय संचालित है। जमीन से कब्जे को हटाने के लिए संचालक मंडल की बैठक 19 अप्रैल 1986 को भी हुई। बैठक में प्रस्ताव भी पारित किया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला सहकारी विकास संघ के सचिव ने भी जांच की है। जांच में भी शिकायत सही पाई गई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि भूमि पर ऊर्वरक व्यवसाय किया जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है। मामला डीसीडीएफ की बैठक में भी उठ चुका है।
डीसीडीएफ बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठ चुका है। मामले की जांच एआर और डीआर कॉओपरेटिव कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी के ऊपर कार्रवाई की जाएगी।
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- सोनेंद्र राणा, चेयरमैन, डीसीडीएफ।
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ग्राम सालाहपुर निवासी महावीर सिंह ने जमीन पर अवैध कब्जे और व्यवसाय की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की थी। उन्होंने बताया कि संचालक मंडल डीसीडीएफ की बैठक 27 दिसंबर 1980 में हुई। बैठक में एक जनवरी 1981 से 31 दिसंबर 1982 तक दो वर्षों के जमीन को 700 रुपये प्रतिमाह के किराये अनुबंध पर दिया गया। उन्होंने बताया कि किराये का अंतिम अनुबंध सात जनवरी 1983 का है। इसमें एक जनवरी 1983 से 31 दिसंबर 1984 के बाद अनुबंध समाप्त हो गया। इसके बाद भी डीसीडीएफ की जमीन पर व्यवसाय संचालित है। जमीन से कब्जे को हटाने के लिए संचालक मंडल की बैठक 19 अप्रैल 1986 को भी हुई। बैठक में प्रस्ताव भी पारित किया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला सहकारी विकास संघ के सचिव ने भी जांच की है। जांच में भी शिकायत सही पाई गई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि भूमि पर ऊर्वरक व्यवसाय किया जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है। मामला डीसीडीएफ की बैठक में भी उठ चुका है।
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डीसीडीएफ बोर्ड की बैठक में भी यह मामला उठ चुका है। मामले की जांच एआर और डीआर कॉओपरेटिव कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी के ऊपर कार्रवाई की जाएगी।
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- सोनेंद्र राणा, चेयरमैन, डीसीडीएफ।