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बर्ड फ्लू पर जिले में अलर्ट, रैपिड एक्शन टीमें गठित
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बर्ड फ्लू पर जिले में अलर्ट, रैपिड एक्शन टीमें गठित
सहारनपुर। कोरोना काल में कई राज्यों में बर्ड फ्लू से पक्षियों की मौत के बाद प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिले में भी इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। जिले की पांचों तहसीलों में पांच सदस्यीय रैपिड एक्शन टीमें गठित कर दी गई हैं। ये टीमें तहसील क्षेत्रों में संदिग्ध या मृत नजर आने वाले पक्षियों की निगरानी करेंगी और इसकी रिपोर्ट विभाग के अलावा जिला और मंडल मुख्यालय को देंगी। जिले में मुख्य रूप से मुर्गियों, बतख, कबूतर और कौओं की अधिक निगरानी की जाएगी।
जिले में सरकारी स्तर पर फिलहाल 56 मुुर्गी फार्म और एक हेचरी यानी चूजा फार्म है। इनके अलावा शहर से देहात तक छोटे बड़े स्तर के निजी पोल्ट्री फार्म हैं। इनमें मुर्गी, चूजे, बतख और कबूतर पाले जाते हैं। बर्ड फ्लू की आशंका को देखते हुए इनका भी सर्वे कराया जाएगा। जिले में तहसील सदर के अलावा देवबंद, रामपुर मनिहारान, बेहट और नकुड़ तहसीलों में रैपिड एक्शन टीमें बनाई गई हैं। एक टीम में तहसील मुख्यालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी के अलावा क्षेत्र के पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी और कर्मचारियों सहित पांच सदस्य शामिल होंगे।
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पक्षियों के घनत्व के अनुरूप टीमें करेंगी निगरानी
- तहसील स्तर पर रैपिड एक्शन टीमें अपने स्तर पर ही पक्षियों के अधिक घनत्व वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर सेक्टर के रूप में उनकी निगरानी करेंगी। इसके बाद यदि किसी क्षेत्र में मृत और संदिग्ध लक्षण वाले पक्षी मिलते हैं तो पहले इसकी रिपोर्ट तहसील पर संकलित होगी। इसके बाद उसे जिला और मुख्यालय स्तर पर भेजा जाएगा। किसी पक्षी के सैंपल लिए जाते हैं तो उन्हें भोपाल की हाईटेक लैब में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
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क्या है बर्ड फ्लू
- बर्ड फ्लू एवियन इनफ्लूएंजा वायस (एच5एन1) की वजह से होता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में इस वायरस को लेकर पूर्व में अलर्ट किया गया और अब यहां निगरानी बढ़ाई गई है। यह वायरस संक्रमित पक्षियों और इंसानों दोनों के लिए खतरनाक है।
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बर्ड फ्लू के प्रमुख लक्षण
- इससे खांसी, डायरिया, बुखार, नाक बहना, बेचैनी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश जैसे लक्षण सामने आते हैं। यह बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह की लार, आंखों से निकलने वाले पानी से लेकर सीधे संपर्क में आने से फैल सकती है।
----एक किलोमीटर के दायरे में बरतनी होती है विशेष सावधानी
- मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीएस शर्मा कहते हैं कि यदि किसी क्षेत्र में बर्ड फ्लू से सामान्य या जंगली पक्षी मृत मिलते हैं तो उस एक किलोमीटर के दायरे में विशेष सावधानी बरती जाती है। वैसे तो इंसानों में यह संक्रमण कम होता है, लेकिन संक्रमित होने पर 60 फीसदी तक जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। जिले में निगरानी टीमों को अलर्ट कर दिया गया है।
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सहारनपुर। कोरोना काल में कई राज्यों में बर्ड फ्लू से पक्षियों की मौत के बाद प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिले में भी इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। जिले की पांचों तहसीलों में पांच सदस्यीय रैपिड एक्शन टीमें गठित कर दी गई हैं। ये टीमें तहसील क्षेत्रों में संदिग्ध या मृत नजर आने वाले पक्षियों की निगरानी करेंगी और इसकी रिपोर्ट विभाग के अलावा जिला और मंडल मुख्यालय को देंगी। जिले में मुख्य रूप से मुर्गियों, बतख, कबूतर और कौओं की अधिक निगरानी की जाएगी।
जिले में सरकारी स्तर पर फिलहाल 56 मुुर्गी फार्म और एक हेचरी यानी चूजा फार्म है। इनके अलावा शहर से देहात तक छोटे बड़े स्तर के निजी पोल्ट्री फार्म हैं। इनमें मुर्गी, चूजे, बतख और कबूतर पाले जाते हैं। बर्ड फ्लू की आशंका को देखते हुए इनका भी सर्वे कराया जाएगा। जिले में तहसील सदर के अलावा देवबंद, रामपुर मनिहारान, बेहट और नकुड़ तहसीलों में रैपिड एक्शन टीमें बनाई गई हैं। एक टीम में तहसील मुख्यालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी के अलावा क्षेत्र के पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी और कर्मचारियों सहित पांच सदस्य शामिल होंगे।
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पक्षियों के घनत्व के अनुरूप टीमें करेंगी निगरानी
- तहसील स्तर पर रैपिड एक्शन टीमें अपने स्तर पर ही पक्षियों के अधिक घनत्व वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर सेक्टर के रूप में उनकी निगरानी करेंगी। इसके बाद यदि किसी क्षेत्र में मृत और संदिग्ध लक्षण वाले पक्षी मिलते हैं तो पहले इसकी रिपोर्ट तहसील पर संकलित होगी। इसके बाद उसे जिला और मुख्यालय स्तर पर भेजा जाएगा। किसी पक्षी के सैंपल लिए जाते हैं तो उन्हें भोपाल की हाईटेक लैब में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
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क्या है बर्ड फ्लू
- बर्ड फ्लू एवियन इनफ्लूएंजा वायस (एच5एन1) की वजह से होता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में इस वायरस को लेकर पूर्व में अलर्ट किया गया और अब यहां निगरानी बढ़ाई गई है। यह वायरस संक्रमित पक्षियों और इंसानों दोनों के लिए खतरनाक है।
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बर्ड फ्लू के प्रमुख लक्षण
- इससे खांसी, डायरिया, बुखार, नाक बहना, बेचैनी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश जैसे लक्षण सामने आते हैं। यह बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह की लार, आंखों से निकलने वाले पानी से लेकर सीधे संपर्क में आने से फैल सकती है।
----एक किलोमीटर के दायरे में बरतनी होती है विशेष सावधानी
- मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीएस शर्मा कहते हैं कि यदि किसी क्षेत्र में बर्ड फ्लू से सामान्य या जंगली पक्षी मृत मिलते हैं तो उस एक किलोमीटर के दायरे में विशेष सावधानी बरती जाती है। वैसे तो इंसानों में यह संक्रमण कम होता है, लेकिन संक्रमित होने पर 60 फीसदी तक जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। जिले में निगरानी टीमों को अलर्ट कर दिया गया है।