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Saharanpur News: समलैंगिकता से बने एड्स रोगी, पीड़ितों में पढ़े-लिखे भी शामिल
Fri, 21 Aug 2026 01:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 21 Aug 2026 01:35 AM IST
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सहारनपुर। एचआईवी संक्रमण को लेकर जिले में चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। एसबीडी जिला अस्पताल के एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट) सेंटर में इलाज करा रहे मरीजों में 40 से 45 ऐसे संक्रमित सामने आए हैं, जिनमें काउंसिलिंग के दौरान समलैंगिक संबंधों से संक्रमण की जानकारी मिली। इनमें युवा और कामकाजी लोगों के साथ शिक्षक, छात्र, अधिवक्ता और बैंककर्मी भी शामिल हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में करीब 2500 मरीज इलाज ले रहे हैं। इनमें असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त-सुई के इस्तेमाल से ज्यादा मरीज रहते हैं। सेंटर में काउंसलर संक्रमितों की काउंसिलिंग करते हैं, जिसमें उनका पूरा ब्योरा लिया जाता है। वह कैसे संक्रमित हुए। काउंसिलिंग में कुछ मामले ऐसे भी मिले हैं, जो हैरान करने वाले हैं। अब बदलते माहौल में समलैंगिक संबंध बनाने से एचआईवी मरीज बढ़ रहे हैं। अब तक ऐसे 40 से 45 मरीज आए। अधिकांश की उम्र 20 से 40 साल है। चिकित्सकों का मानना है कि समलैंगिक संबंधों से एचआईवी का खतरा अधिक रहता है। नए मरीजों में अधिकांश युवा और कामकाजी लोग हैं। समलैंगिक संबंध बनाने से एचआईवी के मरीज बनने वाले लोगों में से 90 फीसदी घर से बाहर और अकेले रहते हैं।
-- हर साल मिल रहे 250 से 300 मरीज
जागरूकता की कमी के चलते हर साल एचआईवी संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। हर साल करीब 200 से 250 नए मरीज मिल रहे हैं। इनमें पुरुष, महिला और बच्चे शामिल हैं। इनके अलावा थर्ड जेंडर भी हैं।
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-- यहां होती है एचआईवी की जांच
एसबीडी जिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल
राजकीय मेडिकल कॉलेज
गंगोह सीएचसी
फतेहपुर सीएचसी
नानौता सीएचसी
देवबंद सीएचसी
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एचआईवी संक्रमितों की काउंसिलिंग की जाती है। जिला अस्पताल समेत सात जगहों पर जांच की सुविधा है। इन सेंटरों के माध्यम से जरूरी दवाइयां देने के साथ ही निशुल्क इलाज भी किया जाता है। सभी की पहचान गुप्त रखी जाती है।
- डॉ. सर्वेश कुमार सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी
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एसबीडी जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में करीब 2500 मरीज इलाज ले रहे हैं। इनमें असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त-सुई के इस्तेमाल से ज्यादा मरीज रहते हैं। सेंटर में काउंसलर संक्रमितों की काउंसिलिंग करते हैं, जिसमें उनका पूरा ब्योरा लिया जाता है। वह कैसे संक्रमित हुए। काउंसिलिंग में कुछ मामले ऐसे भी मिले हैं, जो हैरान करने वाले हैं। अब बदलते माहौल में समलैंगिक संबंध बनाने से एचआईवी मरीज बढ़ रहे हैं। अब तक ऐसे 40 से 45 मरीज आए। अधिकांश की उम्र 20 से 40 साल है। चिकित्सकों का मानना है कि समलैंगिक संबंधों से एचआईवी का खतरा अधिक रहता है। नए मरीजों में अधिकांश युवा और कामकाजी लोग हैं। समलैंगिक संबंध बनाने से एचआईवी के मरीज बनने वाले लोगों में से 90 फीसदी घर से बाहर और अकेले रहते हैं।
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जागरूकता की कमी के चलते हर साल एचआईवी संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। हर साल करीब 200 से 250 नए मरीज मिल रहे हैं। इनमें पुरुष, महिला और बच्चे शामिल हैं। इनके अलावा थर्ड जेंडर भी हैं।
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एसबीडी जिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल
राजकीय मेडिकल कॉलेज
गंगोह सीएचसी
फतेहपुर सीएचसी
नानौता सीएचसी
देवबंद सीएचसी
एचआईवी संक्रमितों की काउंसिलिंग की जाती है। जिला अस्पताल समेत सात जगहों पर जांच की सुविधा है। इन सेंटरों के माध्यम से जरूरी दवाइयां देने के साथ ही निशुल्क इलाज भी किया जाता है। सभी की पहचान गुप्त रखी जाती है।
- डॉ. सर्वेश कुमार सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी