सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र सभागार में चल रहे मशरूम उत्पादन तकनीकी प्रशिक्षण का सोमवार को समापन हुआ। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र सौंपे गए, साथ ही उनसे मशरूम की खेती कर स्वरोजगार करने पर जोर दिया।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संयुक्त कृषि निदेशक डीएस राजपूत ने कृषि के साथ ही मशरूम की खेती कर किसान अपनी आय को बढ़ा सकते हैं। युवाओं के लिए यह स्वरोजगार का बढ़िया साधन है। उन्होंने कहा कि जनपद मशरूम उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी है। यहां पर सफेद बटन, ओएस्टर, मिल्की के साथ ही शिताके, गैनोडर्मा का भी उत्पादन शुरू हो गया है। कीड़ाजड़ी मशरूम उत्पादन प्रयोगशाला भी स्थापित हो गई है। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन में फसल अवशेषों का प्रयोग किया जाए तो कृषि आय बढ़ने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बेहतर होगा। केवीके प्रभारी एवं मशरूम वैज्ञानिक डॉ. आईके कुशवाहा ने कहा कि इस प्रशिक्षण में 25 ग्रामीण युवाओं को सफेद बटन, आयस्टर, मिल्की, शिताके, गैनोडर्मा, कीड़ाजड़ी मशरूम प्रजातियों की खेती दी गई है। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन के लिए ग्रामीण युवाओं में जागरूकता बढ़ती जा रही है। डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. सुखदेव सिंह, मशरूम उद्यमी अंकुर शर्मा, सत्यवीर सिंह, हिमांशु सैनी आदि ने भी विचार रखे। इस दौरान ऋषिपाल, धर्मेंद्र, रुचिका, सुमित, अनिल कुमार, विकास, श्रवण, जहांगीर, अर्चना, अतुल, प्रदीप, विपिन परमार आदि रहे।