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प्रशासकों ने खर्च कर दिए आठ करोड़ से अधिक, मांगा हिसाब
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अभिमन्यु वालिया
सहारनपुर। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर तैनात प्रशासकों ने विकास का हवाला देते हुए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए हैं। सरसावा विकासखंड में सर्वाधिक चार करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया। इसी तरह तीन अन्य ब्लॉकों में एक-एक करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए गए हैं। संदेह होने पर डीपीआरओ ने अब नोटिस भेजकर हिसाब मांगा है, जिससे हड़कंप मचा है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव बिगुल बजने के साथ ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर जनपद के 11 विकासखंडों की 884 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी गई थी। इनको सिर्फ चुनाव प्रक्रिया आदि को लेकर विद्यालयों और या फिर ग्राम पंचायत क्षेत्र में बनाए गए मतदान केंद्र पर शौचालय आदि के निर्माण कराने का अधिकार दिया गया था। इसके अलावा अगर कोई जरूरी काम है तो भी उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर कार्य कराया जा सकता था। पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद जिला पंचायत राज विभाग ने खर्च हुए बजट पर नजर डाली तो अफसरों को संदेह हुआ। क्योंकि, कोई बड़ा कार्य तो हुआ नहीं है, फिर भी अकेले सरसावा ब्लॉक में चार करोड़ रुपये अधिक का खर्च दिखाया गया है। इसी तरह ब्लॉक नकुड़, बलियाखेड़ी, पुवांरका में एक-एक करोड़ से अधिक पैसा विकास कार्य का हवाला देते हुए खर्च कर दिए गए। इसके अलावा अन्य विकासखंडों में 50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं हो पाया है। इसको लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी ने सभी विकासखंड अधिकारियों को पत्र भेजकर खर्च की गई धनराशि का हिसाब मांगा है।
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कहां-कहां हुए कार्य, अनियमितता होने की बातें भी आ रहीं सामने
सहारनपुर। जिला पंचायत राज विभाग की ओर से जानकारी मांगी गई है कि कहां-कहां क्या कार्य हुए हैं, इसकी सूची दी जाए, साथ ही विकास कार्य के फोटोग्राफ और वीडियो आदि भी उपलब्ध कराई जानी है। वहीं, विभागीय सूत्रों की मानें तो पूर्व प्रधानों के साथ मिलकर प्रशासकों ने अनियमितता बरती है। ऐसे में इन पर अब शिकंजा कस सकता है।
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वर्जन -
खर्च की गई धनराशि का हिसाब मांगा गया है। विकासखंडों से संबंधित अधिकारियों को नोटिस भी भेजे गए हैं। कुछ जगहों पर खर्च को लेकर संदेह भी प्रकट हो रहा है। देखा जा रहा है कि किसी पुराने कार्य का भुगतान तो नहीं किया गया है। अगर कहीं लापरवाही या अनियमितता सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी। -- उपेंद्र राज सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी
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सहारनपुर। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर तैनात प्रशासकों ने विकास का हवाला देते हुए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए हैं। सरसावा विकासखंड में सर्वाधिक चार करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया। इसी तरह तीन अन्य ब्लॉकों में एक-एक करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए गए हैं। संदेह होने पर डीपीआरओ ने अब नोटिस भेजकर हिसाब मांगा है, जिससे हड़कंप मचा है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव बिगुल बजने के साथ ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर जनपद के 11 विकासखंडों की 884 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी गई थी। इनको सिर्फ चुनाव प्रक्रिया आदि को लेकर विद्यालयों और या फिर ग्राम पंचायत क्षेत्र में बनाए गए मतदान केंद्र पर शौचालय आदि के निर्माण कराने का अधिकार दिया गया था। इसके अलावा अगर कोई जरूरी काम है तो भी उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर कार्य कराया जा सकता था। पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद जिला पंचायत राज विभाग ने खर्च हुए बजट पर नजर डाली तो अफसरों को संदेह हुआ। क्योंकि, कोई बड़ा कार्य तो हुआ नहीं है, फिर भी अकेले सरसावा ब्लॉक में चार करोड़ रुपये अधिक का खर्च दिखाया गया है। इसी तरह ब्लॉक नकुड़, बलियाखेड़ी, पुवांरका में एक-एक करोड़ से अधिक पैसा विकास कार्य का हवाला देते हुए खर्च कर दिए गए। इसके अलावा अन्य विकासखंडों में 50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं हो पाया है। इसको लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी ने सभी विकासखंड अधिकारियों को पत्र भेजकर खर्च की गई धनराशि का हिसाब मांगा है।
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कहां-कहां हुए कार्य, अनियमितता होने की बातें भी आ रहीं सामने
सहारनपुर। जिला पंचायत राज विभाग की ओर से जानकारी मांगी गई है कि कहां-कहां क्या कार्य हुए हैं, इसकी सूची दी जाए, साथ ही विकास कार्य के फोटोग्राफ और वीडियो आदि भी उपलब्ध कराई जानी है। वहीं, विभागीय सूत्रों की मानें तो पूर्व प्रधानों के साथ मिलकर प्रशासकों ने अनियमितता बरती है। ऐसे में इन पर अब शिकंजा कस सकता है।
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खर्च की गई धनराशि का हिसाब मांगा गया है। विकासखंडों से संबंधित अधिकारियों को नोटिस भी भेजे गए हैं। कुछ जगहों पर खर्च को लेकर संदेह भी प्रकट हो रहा है। देखा जा रहा है कि किसी पुराने कार्य का भुगतान तो नहीं किया गया है। अगर कहीं लापरवाही या अनियमितता सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी। -- उपेंद्र राज सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी