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हत्यारे पति को उम्रकैद की सजा
Saharanpur
Updated Sat, 27 Sep 2014 05:31 AM IST
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सहारनपुर। मिट्टी तेल डालकर पत्नी को जलाकर मारने के मामले में दोषी पाए जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) ज्ञान प्रकाश तिवारी ने पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
शारदानगर निवासी सुषमा बजाज ने 22 सितंबर 2008 को सदर बाजार थाने में अपनी बहन पूजा के पति दीपक और उसके ससुर पर मिट्टी तेल डालकर उसकी बहन को जलाकर मारने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
सुषमा बजाज के मुताबिक उसकी बहन पूजा की शादी अहमदबाद निवासी धर्मपाल कालरा के पुत्र दीपक कालरा के साथ हुई थी। ससुराल वाले कम दहेज के ताने देकर पूजा को प्रताड़ित करने लगे। इसकी रिपोर्ट 17 मार्च 1997 में दर्ज कराई थी। जिसके बाद दोनो पक्षों में फैसला हो गया। इसके बाद 21 सितंबर 2008 की रात पूजा के बेटे दीपांश ने फोन पर बताया कि पिता दीपक और धर्मपाल ने पूजा को तेल छिड़कर जला दिया है। पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय पूजा की रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने जांच के बाद दीपक के खिलाफ धारा 302 में कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र कुमार ने बताया कि साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश तिवारी ने दीपक कालरा को आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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शारदानगर निवासी सुषमा बजाज ने 22 सितंबर 2008 को सदर बाजार थाने में अपनी बहन पूजा के पति दीपक और उसके ससुर पर मिट्टी तेल डालकर उसकी बहन को जलाकर मारने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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सुषमा बजाज के मुताबिक उसकी बहन पूजा की शादी अहमदबाद निवासी धर्मपाल कालरा के पुत्र दीपक कालरा के साथ हुई थी। ससुराल वाले कम दहेज के ताने देकर पूजा को प्रताड़ित करने लगे। इसकी रिपोर्ट 17 मार्च 1997 में दर्ज कराई थी। जिसके बाद दोनो पक्षों में फैसला हो गया। इसके बाद 21 सितंबर 2008 की रात पूजा के बेटे दीपांश ने फोन पर बताया कि पिता दीपक और धर्मपाल ने पूजा को तेल छिड़कर जला दिया है। पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय पूजा की रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने जांच के बाद दीपक के खिलाफ धारा 302 में कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र कुमार ने बताया कि साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश तिवारी ने दीपक कालरा को आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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