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अस्थमा पीड़ित बच्चों को चिप्स, सॉस से दूर रखें
Saharanpur
Updated Mon, 17 Feb 2014 05:30 AM IST
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सहारनपुर, 16 फरवरी। यदि आपके परिवार में बच्चे को अस्थमा या निमोनिया है तो उसे चिप्स, सांस से दूर रखें। इससे अस्थमा अटैक की संभावना बढ़ सकती है। समय से इलाज कराने पर बच्चे और बुजुर्गों का अस्थमा भी नियंत्रित हो सकता है।
दिल्ली रोड स्थित सभागार में रविवार को हुई कार्यशाला में सांस की बीमारियों से जुड़े विशेषज्ञों ने यह बात कही। एसोसिएशन आफ फिजिशियन ऑफ इंडिया की सहारनपुर शाखा ने इसका आयोजन किया। इसमें कई शहरों से करीब 150 चिकित्सकों ने शिरकत की। पीजीआई चंडीगढ़ के बाल रोग विशेषज्ञ डा. जोसेफ मैथ्यू और डा. अरुण जैन ने बताया कि बच्चों में अक्सर अस्थमा को नजरअंदाज किया जाता है। ज्यादातर अभिभावक उसे निमोनिया समझकर छोटा-मोटा इलाज कराते रहते हैं। बाद में स्थिति गंभीर हो जाती है। बुजुर्गों को भी दमे से अधिक दिक्कत होती है।
पीजीआई से ही डा. डी बेहरा और डा. अनुपम मलिक ने सीओपीडी का समय से उपचार कराने और इनहेलर की उपयोगिता के बारे में बताया। गंगाराम अस्पताल के डा. अमित धमीजा, पटेल चेस्ट अस्पताल के डा. बी मेनन ने निमोनिया और फेफड़ों से जुड़ी अन्य बीमारियों के खतरों और उपचार के बारे में बताया। वरिष्ठ फिीिशियन डा. संजीव मित्तल ने प्रदूषित वातावरण से यथासंभव बचने की सलाह दी।
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डा. सुदर्शन नागपाल, डा. अरुण जैन, डा. रजनीश दहूजा, डा. अंकुर उपाध्याय, डा. कलीम अहमद, डा. मोहन पांडेय, डा. सुबोध कुमार, डा. नरेश नौसरान, डा. संदीप गर्ग, डा. संजीव मिगलानी, डा. हिमांशु मेहता, डा. विकास अग्रवाल आदि कार्यशाला में मौजूद रहे।
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दिल्ली रोड स्थित सभागार में रविवार को हुई कार्यशाला में सांस की बीमारियों से जुड़े विशेषज्ञों ने यह बात कही। एसोसिएशन आफ फिजिशियन ऑफ इंडिया की सहारनपुर शाखा ने इसका आयोजन किया। इसमें कई शहरों से करीब 150 चिकित्सकों ने शिरकत की। पीजीआई चंडीगढ़ के बाल रोग विशेषज्ञ डा. जोसेफ मैथ्यू और डा. अरुण जैन ने बताया कि बच्चों में अक्सर अस्थमा को नजरअंदाज किया जाता है। ज्यादातर अभिभावक उसे निमोनिया समझकर छोटा-मोटा इलाज कराते रहते हैं। बाद में स्थिति गंभीर हो जाती है। बुजुर्गों को भी दमे से अधिक दिक्कत होती है।
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पीजीआई से ही डा. डी बेहरा और डा. अनुपम मलिक ने सीओपीडी का समय से उपचार कराने और इनहेलर की उपयोगिता के बारे में बताया। गंगाराम अस्पताल के डा. अमित धमीजा, पटेल चेस्ट अस्पताल के डा. बी मेनन ने निमोनिया और फेफड़ों से जुड़ी अन्य बीमारियों के खतरों और उपचार के बारे में बताया। वरिष्ठ फिीिशियन डा. संजीव मित्तल ने प्रदूषित वातावरण से यथासंभव बचने की सलाह दी।
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डा. सुदर्शन नागपाल, डा. अरुण जैन, डा. रजनीश दहूजा, डा. अंकुर उपाध्याय, डा. कलीम अहमद, डा. मोहन पांडेय, डा. सुबोध कुमार, डा. नरेश नौसरान, डा. संदीप गर्ग, डा. संजीव मिगलानी, डा. हिमांशु मेहता, डा. विकास अग्रवाल आदि कार्यशाला में मौजूद रहे।