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नाम का नहीं, काम का नगर निगम बनाइये
Saharanpur
Updated Wed, 05 Feb 2014 05:43 AM IST
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सहारनपुर। नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा मिले चार साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन यह अभी तक नाम का ही बना हुआ है। न चुनाव हुए और न नगर निगम जैसा आधारभूत सुविधाएं दी गई है। लोगों को नगर निगम जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। मुख्यमंत्री 11 फरवरी को सहारनपुर आ रहे हैं, ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि वे नगर निगम को उसका वास्तविक स्वरूप देने के लिए कुछ घोषणाएं करेंगे।
सहारनपुर को दो अक्तूबर 2009 को नगर निगम का दर्जा मिलने पर लोगों की उम्मीद जगी थी कि चल अब शहर का चहुंमुखी विकास होगा और दूसरे महानगरों की तरह यहां भी आधारभूत सुविधाएं बढ़ेंगी, लेकिन चार सार बाद भी लोगों को कुछ नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन नगर निगम काम का नहीं, सिर्फ नाम का ही बना हुआ है। विकास कार्यों के लिए तेरहवें वित्त और राज्य वित्त से धनराशि जरूर मिल रही है, लेकिन वे निगम के बढ़े क्षेत्रफल के हिसाब से नाकाफी रहती है। निगम में शामिल हुए 32 गांवों के लोगों को चार साल बाद भी अहसास नहीं हो पाया है कि वे ग्राम पंचायत में नहीं, नगर निगम में शामिल हैं। इस दौरान न मेयर का चुनाव हुआ और पार्षदों का। शासन स्तर से निगम को अभी न संसाधन मिले और न पूरा स्टाफ मिला।
स्टाफ की भारी कमीः नगर निगम को घोषणा के बाद अपर आयुक्त और उपनगर आयुक्तों के एक-एक पद रिक्त हैं। कर एवं राजस्व अधीक्षकों के सभी 20 पद भरे जाने हैं। लिपिकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। मुख्य लेखा परीक्षक, कर अधीक्षक, अभियंताओं और क्षेत्रीय सफाई आदि के पद भी काफी रिक्त हैं।
सहारनपुर को दो अक्तूबर 2009 को नगर निगम का दर्जा मिलने पर लोगों की उम्मीद जगी थी कि चल अब शहर का चहुंमुखी विकास होगा और दूसरे महानगरों की तरह यहां भी आधारभूत सुविधाएं बढ़ेंगी, लेकिन चार सार बाद भी लोगों को कुछ नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन नगर निगम काम का नहीं, सिर्फ नाम का ही बना हुआ है। विकास कार्यों के लिए तेरहवें वित्त और राज्य वित्त से धनराशि जरूर मिल रही है, लेकिन वे निगम के बढ़े क्षेत्रफल के हिसाब से नाकाफी रहती है। निगम में शामिल हुए 32 गांवों के लोगों को चार साल बाद भी अहसास नहीं हो पाया है कि वे ग्राम पंचायत में नहीं, नगर निगम में शामिल हैं। इस दौरान न मेयर का चुनाव हुआ और पार्षदों का। शासन स्तर से निगम को अभी न संसाधन मिले और न पूरा स्टाफ मिला।
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स्टाफ की भारी कमीः नगर निगम को घोषणा के बाद अपर आयुक्त और उपनगर आयुक्तों के एक-एक पद रिक्त हैं। कर एवं राजस्व अधीक्षकों के सभी 20 पद भरे जाने हैं। लिपिकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। मुख्य लेखा परीक्षक, कर अधीक्षक, अभियंताओं और क्षेत्रीय सफाई आदि के पद भी काफी रिक्त हैं।
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