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900 करोड़ से बदलेगी शहर की सूरत
Saharanpur
Updated Fri, 08 Feb 2013 05:30 AM IST
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सहारनपुर। यमुना प्रदूषण पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के सख्त रुख के बाद सहारनपुर को बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद जाग गई है। 2008 में यमुना एक्शन प्लान के तहत केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी के लिए अधिकारियों ने केंद्र से संपर्क साधा है। इसके तहत शहर की सीवरेज सिस्टम को व्यवस्थित करने के लिए 795.25 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के बाद यमुना में जा रहे शहर के प्रदूषण को रोका जा सकेगा। इसके अलावा सहारनपुर जल निगम ने शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए 100 करोड़ का एक नया प्रस्ताव भी तैयार किया है।
दरअसल, वर्ष 2008 में यमुना एक्शन प्लान के तहत सहारनपुर के लिए एक योजना तैयार की गई थी। मगर, अफसरों की उदासीनता के चलते यह योजना फाइलों में दबकर रह गई। पिछले दिनों एनजीटी के यमुना नदी के प्रदूषण पर चिंता और प्रदूषणमुक्त करने के निर्देश के बाद इस प्रस्ताव पर मंजूर कराने के प्रयास तेज हो गए हैं। इस योजना की कार्यदायी संस्था गाजियाबाद जल निगम है। योजना की मंजूरी के बाद गाजियाबाद जल निगम ही इस योजना को अमलीजामा पहनाएगी और सहारनपुर नगर निगम को हैंडओवर करेगी।
सहारनपुर शहर में केवल 30 फीसदी हिस्सा में ही सीवर लाइन है। इससे घरों से निकलने वाला प्रदूषित जल ढमोला नदी में गिरता है। यहां से पानी पांवधोई में जाता है और आगे बढ़कर हिंडन में मिलता है। हिंडन में गिरने वाला प्रदूषित जल यमुना में जा रहा है। इस योजना में सहारनपुर में 52 और 32 मिलीयन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) क्षमता के दो सीवरेज प्लांट तैयार किए जाने हैं। इसके अलावा पूरे शहर की सीवरेज लाइन को दुरुस्त किया जाएगा।
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शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए जल निगम ने 100 करोड़ रुपये लागत की योजना तैयार की है। इसमें शहर में करीब 10 नलकूप और 10 ओवरहेड टैंक बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को शासन के समक्ष भेज दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही शासन की ओर से इसे झंडी मिल जाएगी।
नगर आयुक्त, सहारनपुर डा. नीरज शुक्ला का कहना है कि यमुना में प्रदूषण रोकने के लिए हमने 2008 की योजना को मंजूर कराने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें कार्यदायी संस्था गाजियाबाद जल निगम है। उससे भी संपर्क किया गया है।
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दरअसल, वर्ष 2008 में यमुना एक्शन प्लान के तहत सहारनपुर के लिए एक योजना तैयार की गई थी। मगर, अफसरों की उदासीनता के चलते यह योजना फाइलों में दबकर रह गई। पिछले दिनों एनजीटी के यमुना नदी के प्रदूषण पर चिंता और प्रदूषणमुक्त करने के निर्देश के बाद इस प्रस्ताव पर मंजूर कराने के प्रयास तेज हो गए हैं। इस योजना की कार्यदायी संस्था गाजियाबाद जल निगम है। योजना की मंजूरी के बाद गाजियाबाद जल निगम ही इस योजना को अमलीजामा पहनाएगी और सहारनपुर नगर निगम को हैंडओवर करेगी।
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सहारनपुर शहर में केवल 30 फीसदी हिस्सा में ही सीवर लाइन है। इससे घरों से निकलने वाला प्रदूषित जल ढमोला नदी में गिरता है। यहां से पानी पांवधोई में जाता है और आगे बढ़कर हिंडन में मिलता है। हिंडन में गिरने वाला प्रदूषित जल यमुना में जा रहा है। इस योजना में सहारनपुर में 52 और 32 मिलीयन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) क्षमता के दो सीवरेज प्लांट तैयार किए जाने हैं। इसके अलावा पूरे शहर की सीवरेज लाइन को दुरुस्त किया जाएगा।
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शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए जल निगम ने 100 करोड़ रुपये लागत की योजना तैयार की है। इसमें शहर में करीब 10 नलकूप और 10 ओवरहेड टैंक बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को शासन के समक्ष भेज दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही शासन की ओर से इसे झंडी मिल जाएगी।
नगर आयुक्त, सहारनपुर डा. नीरज शुक्ला का कहना है कि यमुना में प्रदूषण रोकने के लिए हमने 2008 की योजना को मंजूर कराने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें कार्यदायी संस्था गाजियाबाद जल निगम है। उससे भी संपर्क किया गया है।