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सबसे बड़ी खिलाड़ी तो ‘डब्ल्यू-कंपनी’
Saharanpur
Updated Fri, 01 Feb 2013 05:30 AM IST
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सहारनपुर। देश में हर साल हजारों गाड़ियां भीषण सड़क हादसों में हमेशा के लिए खत्म हो जाती हैं। सहारनपुर पुलिस की एक स्पेशल टीम को ऑटो थैफ्ट गैंग के बारे में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं।
पिछले दिनों हल्द्वानी से ऑपरेट होने वाले वारसी गैंग के एक शातिर बदमाश ने वाहन चोरी के तरीके और इसमें शामिल मशीनरी का भी खुलासा किया था। इसी आधार पर पुलिस अब इस गैंग के सहारनपुर में फैले जाल को समाप्त करने में जुटी है। उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बार्डर पर बसे सहारनपुर में इस गैंग का प्रकोप ज्यादा है। कारण, वारदात के बाद बार्डर पार करते ही पुलिस की पकड़ से बाहर हो जाते हैं। पुलिस के हाथ सुराग लगा है कि वेस्ट यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में ऐसे खतरनाक अपराध समूह सक्रिय हैं, जिनकी निगाहें दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों पर ही जमी रहती हैं। जैसे ही कहीं से एक्सीडेंट की खबर आती है, ऑटो थैफ्ट गैंग के एजेंट डिमांड पहुंचते ही किसी भी शहर से वैसे ही रंग और मॉडल की कार उड़ा देते हैं। फिर किसी आरटीओ आफिस में साठगांठ कर एक्सीडेंट कार के डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन पेपर हासिल कर लिए जाते हैं। कागजातों पर दर्ज इंजन-चेसिस नंबर हूबहू चोरी की कार पर खोदने का काम खरादिए कर देते हैं। इस तरह कानून की आंखों में धूल झोंककर दो नंबर की कारें एक नंबर में सड़कों उतार दी जाती हैं।
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पिछले दिनों हल्द्वानी से ऑपरेट होने वाले वारसी गैंग के एक शातिर बदमाश ने वाहन चोरी के तरीके और इसमें शामिल मशीनरी का भी खुलासा किया था। इसी आधार पर पुलिस अब इस गैंग के सहारनपुर में फैले जाल को समाप्त करने में जुटी है। उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बार्डर पर बसे सहारनपुर में इस गैंग का प्रकोप ज्यादा है। कारण, वारदात के बाद बार्डर पार करते ही पुलिस की पकड़ से बाहर हो जाते हैं। पुलिस के हाथ सुराग लगा है कि वेस्ट यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में ऐसे खतरनाक अपराध समूह सक्रिय हैं, जिनकी निगाहें दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों पर ही जमी रहती हैं। जैसे ही कहीं से एक्सीडेंट की खबर आती है, ऑटो थैफ्ट गैंग के एजेंट डिमांड पहुंचते ही किसी भी शहर से वैसे ही रंग और मॉडल की कार उड़ा देते हैं। फिर किसी आरटीओ आफिस में साठगांठ कर एक्सीडेंट कार के डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन पेपर हासिल कर लिए जाते हैं। कागजातों पर दर्ज इंजन-चेसिस नंबर हूबहू चोरी की कार पर खोदने का काम खरादिए कर देते हैं। इस तरह कानून की आंखों में धूल झोंककर दो नंबर की कारें एक नंबर में सड़कों उतार दी जाती हैं।
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