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गेहूं में लगा येलो रस्ट, सचेत रहें किसान
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सहारनपुर। जनपद में गेहूं की फसल में येलो रस्ट (पीला रतुआ) रोग लग रहा है। कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल पर इसका प्रभाव देखने में आया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फसल को इस रोग से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियां किसानों को बरतनी चाहिएं।
येलो रस्ट के कारण गेहूं के पौधे की पत्तियों पर पीले रंग का पाउडर जैसा धब्बा बन जाता है। यह रोग हवा के साथ उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर फसल को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए इस रोग की तुरंत रोकथाम करनी जरूरी है। रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव नौरंगपुर में गेहूं की फसल में येलो रस्ट मिल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डाक्टर आईके कुशवाहा का कहना है कि इस रोग की रोकथाम जरूरी है। इसके लिए प्रोपीकोनाजोल की 45 मिलीलीटर अथवा टेबुकोनाजोल 25 मिलीलीटर अथवा सल्फरप्लस टेबुकोनोजोल की 100 ग्राम मात्रा को 45 लीटर पानी में मिलाकर प्रति बीघा के हिसाब से छिड़काव किया जाए। इसका छिड़काव केवल उसी खेत में किया जाए, जिस खेत की फसल में पीला रतुआ रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
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येलो रस्ट के कारण गेहूं के पौधे की पत्तियों पर पीले रंग का पाउडर जैसा धब्बा बन जाता है। यह रोग हवा के साथ उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर फसल को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए इस रोग की तुरंत रोकथाम करनी जरूरी है। रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव नौरंगपुर में गेहूं की फसल में येलो रस्ट मिल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डाक्टर आईके कुशवाहा का कहना है कि इस रोग की रोकथाम जरूरी है। इसके लिए प्रोपीकोनाजोल की 45 मिलीलीटर अथवा टेबुकोनाजोल 25 मिलीलीटर अथवा सल्फरप्लस टेबुकोनोजोल की 100 ग्राम मात्रा को 45 लीटर पानी में मिलाकर प्रति बीघा के हिसाब से छिड़काव किया जाए। इसका छिड़काव केवल उसी खेत में किया जाए, जिस खेत की फसल में पीला रतुआ रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
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