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बारिश ने बिगाड़ी गुघाल मेले की रौनक
Updated Wed, 26 Sep 2018 12:21 AM IST
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बारिश ने बिगाड़ी गुघाल मेले की रौनक
सहारनपुर। ऐतिहासिक मेला गुघाल को शुरू हुए सात दिन बीत चुके हैं, मगर बारिश ने इसकी रौनक ही बिगाड़ दी है। हाल यह है कि कचरे के ढेर में झूले लगे हैं और अधिकतर दुकानों में जलभराव और कीचड़ के हालात हैं। इससे दुकानदार मायूस हैं। इसके चलते मेले में लोगों की आवाजाही उम्मीद से काफी कम हो रही है।
अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को यहां की स्थिति देखने की कोशिश की। मेले के मुख्य द्वार से ठीक दस कदम आगे खिलौनों और अन्य सामान की दुकानों के सामने कीचड़ फैला नजर आया। कई दुकानदार खुद ही कीचड़ पर मिट्टी डालकर उसे सुधारते नजर आए। कुछ आगे चले तो झूलों के आसपास जलभराव और कीचड़ के साथ ही कचरा भी फैला था। कुछ जगहों पर भारी जलभराव की वजह से मेले में आए लोग और बच्चे पानी के बीच से गुजरते नजर आए। मेले में प्लास्टिक के सामान की दुकान लगा रहे मुरादाबाद से आए अरशद ने बताया कि सात दिन से मेला चल रहा है, मगर अभी तक वह मजदूरी तक नहीं निकाल पाए हैं। उन्होंने बताया कि दुकान लगाने के लिए उन्होंने ठेकेदार को जो पैसा दिया वह डूबता नजर आ रहा है। उन्होंने मेला परिसर में अव्यवस्थाएं होने की बात कही। मेरठ से खेल का सामान लेकर पहुंचे दुकानदार आजाद भी मायूस नजर आए। उन्होंने बताया कि सात दिन में उनका किराया भाड़ा भी नहीं निकल सका है। अब मेले में मात्र 14 दिन बचे हैं। ऐसे में ठेकेदार को दी गई रकम पूरी कर पाना मुश्किल नजर आ रहा है। अव्यवस्थाओं से वह भी नाराज नजर आए।
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करोड़ों खर्च के बाद भी टपक रही जनमंच की छत
बारिश होने की स्थिति में मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रम जनमंच में कराए जा रहे हैं, मगर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जनमंच प्रेक्षागृह की छत टपक रही है। इसकी वजह से मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाधा पहुंच रही है। करीब तीन वर्ष पहले नगर निगम ने दो करोड़ रुपये की लागत से जनमंच प्रेक्षागृह का जीर्णोद्धार कराया था। मगर छत को दुरुस्त कराना नगर निगम भूल गया। अब फिर से नगर निगम करीब डेढ़ करोड़ रुपये से जनमंच की खामियों को दूर कराने में लगा है। ऐसी को भी दीवारों से हटाकर छत पर लटकी सीलिंग के अंदर लगवाया जा रहा है। पिछले तीन महीने से काम चल रहा है। मगर हैरत की बात यह है कि अब तक छत टपक रही है। ऐसे में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाधा पहुंच रही है। जनमंच प्रेक्षागृह में बने मंच के ठीक ऊपर और सेंटर में चार दिन से लगातार पानी टपक रहा है।
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मेला पंडाल में भी भारी जलभराव
गत वर्षों में मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रम अंबाला रोड स्थित ग्राउंट में कराए जाते थे। मगर इस बार नगर निगम ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए गांधी पार्क मैदान का चयन किया है, जिसपर अस्थाई पंडाल बनाया गया है। तीन दिन हुई बारिश की वजह से गांधी पार्क मैदान भी जलमग्न है। इसकी वजह से सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पानी फिर गया है। मंगलवार को भी मैदान पर भारी जलभराव और कीचड़ था, जिसकी वजह से सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना मुश्किल नजर आ रहा है। अभी तक हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से ज्यादातर फ्लॉप ही रहे हैं।
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मेला परिसर में सफाई और जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम के अफसरों को कहा गया है। कई जगहों पर हमने मिट्टी और रोड़ी डलवाई हैं। मेयर और नगरायुक्त कई दिन से बाहर हैं, जिसकी वजह से थोड़ी अव्यवस्था बनी हुई है। रही बात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तो बारिश की वजह से बाधाएं आई हैं। हमने मंगलवार को भी कई मशीनें लगाकर पानी निकलवाने की कोशिश की है।
-- मुकेश गक्कड़, मेला चेयरमैन।
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जगदीप कुमार---------------
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सहारनपुर। ऐतिहासिक मेला गुघाल को शुरू हुए सात दिन बीत चुके हैं, मगर बारिश ने इसकी रौनक ही बिगाड़ दी है। हाल यह है कि कचरे के ढेर में झूले लगे हैं और अधिकतर दुकानों में जलभराव और कीचड़ के हालात हैं। इससे दुकानदार मायूस हैं। इसके चलते मेले में लोगों की आवाजाही उम्मीद से काफी कम हो रही है।
अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को यहां की स्थिति देखने की कोशिश की। मेले के मुख्य द्वार से ठीक दस कदम आगे खिलौनों और अन्य सामान की दुकानों के सामने कीचड़ फैला नजर आया। कई दुकानदार खुद ही कीचड़ पर मिट्टी डालकर उसे सुधारते नजर आए। कुछ आगे चले तो झूलों के आसपास जलभराव और कीचड़ के साथ ही कचरा भी फैला था। कुछ जगहों पर भारी जलभराव की वजह से मेले में आए लोग और बच्चे पानी के बीच से गुजरते नजर आए। मेले में प्लास्टिक के सामान की दुकान लगा रहे मुरादाबाद से आए अरशद ने बताया कि सात दिन से मेला चल रहा है, मगर अभी तक वह मजदूरी तक नहीं निकाल पाए हैं। उन्होंने बताया कि दुकान लगाने के लिए उन्होंने ठेकेदार को जो पैसा दिया वह डूबता नजर आ रहा है। उन्होंने मेला परिसर में अव्यवस्थाएं होने की बात कही। मेरठ से खेल का सामान लेकर पहुंचे दुकानदार आजाद भी मायूस नजर आए। उन्होंने बताया कि सात दिन में उनका किराया भाड़ा भी नहीं निकल सका है। अब मेले में मात्र 14 दिन बचे हैं। ऐसे में ठेकेदार को दी गई रकम पूरी कर पाना मुश्किल नजर आ रहा है। अव्यवस्थाओं से वह भी नाराज नजर आए।
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करोड़ों खर्च के बाद भी टपक रही जनमंच की छत
बारिश होने की स्थिति में मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रम जनमंच में कराए जा रहे हैं, मगर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जनमंच प्रेक्षागृह की छत टपक रही है। इसकी वजह से मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाधा पहुंच रही है। करीब तीन वर्ष पहले नगर निगम ने दो करोड़ रुपये की लागत से जनमंच प्रेक्षागृह का जीर्णोद्धार कराया था। मगर छत को दुरुस्त कराना नगर निगम भूल गया। अब फिर से नगर निगम करीब डेढ़ करोड़ रुपये से जनमंच की खामियों को दूर कराने में लगा है। ऐसी को भी दीवारों से हटाकर छत पर लटकी सीलिंग के अंदर लगवाया जा रहा है। पिछले तीन महीने से काम चल रहा है। मगर हैरत की बात यह है कि अब तक छत टपक रही है। ऐसे में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाधा पहुंच रही है। जनमंच प्रेक्षागृह में बने मंच के ठीक ऊपर और सेंटर में चार दिन से लगातार पानी टपक रहा है।
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मेला पंडाल में भी भारी जलभराव
गत वर्षों में मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रम अंबाला रोड स्थित ग्राउंट में कराए जाते थे। मगर इस बार नगर निगम ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए गांधी पार्क मैदान का चयन किया है, जिसपर अस्थाई पंडाल बनाया गया है। तीन दिन हुई बारिश की वजह से गांधी पार्क मैदान भी जलमग्न है। इसकी वजह से सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पानी फिर गया है। मंगलवार को भी मैदान पर भारी जलभराव और कीचड़ था, जिसकी वजह से सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना मुश्किल नजर आ रहा है। अभी तक हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से ज्यादातर फ्लॉप ही रहे हैं।
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मेला परिसर में सफाई और जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम के अफसरों को कहा गया है। कई जगहों पर हमने मिट्टी और रोड़ी डलवाई हैं। मेयर और नगरायुक्त कई दिन से बाहर हैं, जिसकी वजह से थोड़ी अव्यवस्था बनी हुई है। रही बात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तो बारिश की वजह से बाधाएं आई हैं। हमने मंगलवार को भी कई मशीनें लगाकर पानी निकलवाने की कोशिश की है।
-- मुकेश गक्कड़, मेला चेयरमैन।
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जगदीप कुमार---------------