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तहसील प्रशासन के खिलाफ दलित पट्टेदारों ने तहसील में दिया धरना
Updated Wed, 26 Sep 2018 12:27 AM IST
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तहसील प्रशासन के खिलाफ दलित पट्टेदारों ने तहसील में दिया धरना
रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। नसबंदी योजना के तहत 32 दलित महिलाओं को वर्ष 1988 में तहसील प्रशासन द्वारा आवंटित किए गए पट्टों को चारागाह की भूमि बता कर पट्टे खाली कराने के लिए दबाव बनाने से खफा पट्टाधारकों ने तहसील पर धरना दिया। गांव नवादा भजडू निवासी राजकली, बाला, सुरजी, मिमला, सीता, सुमित्रा, फूल्लो, मांगी, करेशन, नरेंद्र, राहुल, सोमबीर, सुभाष, मोती, नरेश, बबलू, नलनीश, गौतम, धर्मबीर, आनंद आदि मंगलवार को तहसील कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने तहसीलदार कार्यालय के बाहर धरना दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वर्ष 1988 में नसबंदी योजना के तहत उन्हें पट्टो का आवंटन किया गया था और कुछ अन्य को तत्कालीन एसडीएम ने 1359 फसली के अनुसार खसरा नंबर 342, 1359 बंजर दर्ज कर उनके हक में खसरा नंबर 110 का आवंटन कर दिया था। यह खसरा नंबर 342 व 1359 से बना है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तहसील प्रशासन उनके पट्टों को चारागाह की भूमि बताकर पट्टे खाली करने का दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि इसका वाद एडीएम ई के न्यायालय में चल रहा है। इसके बाद भी पट्टा धारकों को तहसील प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा कोई अवैध कब्जा नहीं किया गया है। पट्टों पर तहसील प्रशासन द्वारा ही कब्जा दिलाया गया था। ग्रामीणों ने तहसील को दिए गए अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि उनके पट्टो में खडे़ पेड़ों व फसल को काटे जाने की अनुमति दी जाए।
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रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। नसबंदी योजना के तहत 32 दलित महिलाओं को वर्ष 1988 में तहसील प्रशासन द्वारा आवंटित किए गए पट्टों को चारागाह की भूमि बता कर पट्टे खाली कराने के लिए दबाव बनाने से खफा पट्टाधारकों ने तहसील पर धरना दिया। गांव नवादा भजडू निवासी राजकली, बाला, सुरजी, मिमला, सीता, सुमित्रा, फूल्लो, मांगी, करेशन, नरेंद्र, राहुल, सोमबीर, सुभाष, मोती, नरेश, बबलू, नलनीश, गौतम, धर्मबीर, आनंद आदि मंगलवार को तहसील कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने तहसीलदार कार्यालय के बाहर धरना दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वर्ष 1988 में नसबंदी योजना के तहत उन्हें पट्टो का आवंटन किया गया था और कुछ अन्य को तत्कालीन एसडीएम ने 1359 फसली के अनुसार खसरा नंबर 342, 1359 बंजर दर्ज कर उनके हक में खसरा नंबर 110 का आवंटन कर दिया था। यह खसरा नंबर 342 व 1359 से बना है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तहसील प्रशासन उनके पट्टों को चारागाह की भूमि बताकर पट्टे खाली करने का दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि इसका वाद एडीएम ई के न्यायालय में चल रहा है। इसके बाद भी पट्टा धारकों को तहसील प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा कोई अवैध कब्जा नहीं किया गया है। पट्टों पर तहसील प्रशासन द्वारा ही कब्जा दिलाया गया था। ग्रामीणों ने तहसील को दिए गए अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि उनके पट्टो में खडे़ पेड़ों व फसल को काटे जाने की अनुमति दी जाए।