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चार साल से टूटा पड़ा रपटा, लोग परेशान
Updated Mon, 14 May 2018 12:28 AM IST
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चार साल से टूटा पड़ा रपटा, लोग परेशान
साढ़ौली कदीम। पिछले चार वर्षों टूटे पड़े रपटे से राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। राहगीरों को रपटे के पास मुख्य मार्ग की खस्ता हालत के चलते खेतों की मेड़ों से होकर गुजरना पड़ रहा है।
विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव उसंड चकखीदरपुर मार्ग पर गांगरोह नदी पर बना रपटा पिछले चार वर्ष पूर्व बाढ़ के कारण ध्वस्त हो गया था। पूर्वी यमुना नहर से निकाली गई गांगरोह नदी में बरसात में नहर में पानी की अधिकता होने पर पानी छोड़ा जाता है। नदी में पानी छोडे़ जाने पर इससे गुजरने वाले मार्ग बंद हो जाते हैं। लगभग आठ वर्ष पूर्व इस नदी के उसंड चकखीदरपुर मार्ग पर रपटे का निर्माण कराया गया था। चार वर्ष बाद ही नदी में पानी की अधिकता के चलते यह रपटा एवं आस पास का मार्ग ध्वस्त हो गया था। तभी से इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग से क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों का प्रतिदिन आवागमन होता है। मार्ग एवं रपटे के ध्वस्त होने के चलते राहगीरों को भारी परेशानी उठाते हुए खेतों की मेड़ों एवं दूर दराज चकमार्गों से होकर गुजरना पड़ रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि उक्त रपटे के निर्माण के लिए वे कई बार विधायक एवं सांसद से भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नही हो पा रहा है।
उसंड के पूर्व प्रधान तेजपाल काम्बोज, लोदीपुर के पूर्व प्रधान विजय शर्मा, रसूलपुर के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि योगेंद्र काम्बोज एवं पूर्व प्रधान मो. अहसान, मंझाडी के पूर्व प्रधान संजय सैनी, चकखीदरपुर के पूर्व प्रधान ब्रिजेश कांबोज, सलेमपुर के प्रधान प्रतिनिधि मो. शहीद, रोगला हथौली के प्रधान जसवीर सैनी, टोडरपुर के प्रधान चौ. ताहिर, अमित सैनी, अमर सिंह, हार्दिक काम्बोज, सर्वेश कुमार, यशपाल सिंह आदि ने जनहित में उक्त मार्ग पर रपटा निर्माण कर सुचारु किए जाने की मांग की है।
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साढ़ौली कदीम। पिछले चार वर्षों टूटे पड़े रपटे से राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। राहगीरों को रपटे के पास मुख्य मार्ग की खस्ता हालत के चलते खेतों की मेड़ों से होकर गुजरना पड़ रहा है।
विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव उसंड चकखीदरपुर मार्ग पर गांगरोह नदी पर बना रपटा पिछले चार वर्ष पूर्व बाढ़ के कारण ध्वस्त हो गया था। पूर्वी यमुना नहर से निकाली गई गांगरोह नदी में बरसात में नहर में पानी की अधिकता होने पर पानी छोड़ा जाता है। नदी में पानी छोडे़ जाने पर इससे गुजरने वाले मार्ग बंद हो जाते हैं। लगभग आठ वर्ष पूर्व इस नदी के उसंड चकखीदरपुर मार्ग पर रपटे का निर्माण कराया गया था। चार वर्ष बाद ही नदी में पानी की अधिकता के चलते यह रपटा एवं आस पास का मार्ग ध्वस्त हो गया था। तभी से इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग से क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों का प्रतिदिन आवागमन होता है। मार्ग एवं रपटे के ध्वस्त होने के चलते राहगीरों को भारी परेशानी उठाते हुए खेतों की मेड़ों एवं दूर दराज चकमार्गों से होकर गुजरना पड़ रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि उक्त रपटे के निर्माण के लिए वे कई बार विधायक एवं सांसद से भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नही हो पा रहा है।
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उसंड के पूर्व प्रधान तेजपाल काम्बोज, लोदीपुर के पूर्व प्रधान विजय शर्मा, रसूलपुर के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि योगेंद्र काम्बोज एवं पूर्व प्रधान मो. अहसान, मंझाडी के पूर्व प्रधान संजय सैनी, चकखीदरपुर के पूर्व प्रधान ब्रिजेश कांबोज, सलेमपुर के प्रधान प्रतिनिधि मो. शहीद, रोगला हथौली के प्रधान जसवीर सैनी, टोडरपुर के प्रधान चौ. ताहिर, अमित सैनी, अमर सिंह, हार्दिक काम्बोज, सर्वेश कुमार, यशपाल सिंह आदि ने जनहित में उक्त मार्ग पर रपटा निर्माण कर सुचारु किए जाने की मांग की है।
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