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कागजों में दम तोड़ गई ढमोला नदी से कब्जे हटाने की योजना
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:28 AM IST
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कागजों में ही चली ढमोला नदी से कब्जे हटाने की योजना
सहारनपुर। ढमोला नदी से अवैध कब्जे हटाने की योजना कागजों में दम तोड़ गई है। कई इलाकों में नदी से सटी सिंचाई विभाग की भूमि पर कब्जों की भरमार है। कब्जाधारियों को चिह्नित भी किया और अभियान चलाकर कब्जे हटवाने की योजना बनाई गई, लेकिन धरातल पर सिंचाई विभाग और प्रशासन अवैध कब्जों को नहीं हटवा पाया है।
ढमोला नदी में जून 2013 में आई बाढ़ से जानमाल का भारी नुकसान हुआ था। तब तत्कालीन डीएम अजय कुमार सिंह ने दो माह में अवैध कब्जों को चिह्नित कराकर उन्हें हटाने का दावा किया था। नदी से सटी ब्रह्मपुरी कॉलोनी, ब्रिजेशनगर, कपिल विहार, पठानपुरा, बेरीबाग, चकहरेटी क्षेत्रों से आज तक अवैैध कब्जे नहीं हटवाए गए। क्षेत्र के लोग भी कई बार उच्चाधिकारियों से अवैध कब्जा करने वालों की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कब्जे हटवाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई आज तक नहीं हुई है।
कहीं जगहों पर अवैध निर्माण कर ढमोला नदी को नाले का रूप दे दिया गया है। ऐसे में बरसात के दिनों में बड़ी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। सिंचाई विभाग और प्रशासन के लचीले पन के पीछे से राजनीतिक हस्तक्षेप भी बड़ा कारण है।
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नहीं की गई तारबंदी
सहारनपुर। चार माह पूर्व तत्कालीन डीएम पीके पांडेय ने ढमोला नदी की खाली पड़ी जमीन पर तारबंदी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन संबंधित विभाग ने आज तक तारबंदी नहीं कराई है। इसके साथ ही गांव चकहरेटी में ढमोला नदी की जमीन पर बने 410 मकान मालिकों को नोटिस देकर भूमि खाली कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन चार माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
151 के खिलाफ हुई थी एफआईआर
सहारनपुर। ढमोला नदी की जमीन पर कब्जा करने वाले 151 लोगों को चिह्नित कर प्रशासन ने उनके खिलाफ 2016 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुछ लोग मकान बेचकर चले गए तो कुछ ने कोर्ट से स्टे ले लिया। लेकिन लगातार हो रहे नए अवैध निर्माण को रोकने के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है।
नदी की जमीन से हमारा कोई मतलब नहीं
सहारनपुर। ढमोला नदी की जमीन पर हुए अवैध कब्जों को लेकर निर्माण खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राधेश्याम का अलग ही तर्क है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि नदी की जमीन से हमारा कोई मतलब नहीं है। इससे साफ है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते ही ढमोला नदी पर कब्जे हो रहे हैं।
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सहारनपुर। ढमोला नदी से अवैध कब्जे हटाने की योजना कागजों में दम तोड़ गई है। कई इलाकों में नदी से सटी सिंचाई विभाग की भूमि पर कब्जों की भरमार है। कब्जाधारियों को चिह्नित भी किया और अभियान चलाकर कब्जे हटवाने की योजना बनाई गई, लेकिन धरातल पर सिंचाई विभाग और प्रशासन अवैध कब्जों को नहीं हटवा पाया है।
ढमोला नदी में जून 2013 में आई बाढ़ से जानमाल का भारी नुकसान हुआ था। तब तत्कालीन डीएम अजय कुमार सिंह ने दो माह में अवैध कब्जों को चिह्नित कराकर उन्हें हटाने का दावा किया था। नदी से सटी ब्रह्मपुरी कॉलोनी, ब्रिजेशनगर, कपिल विहार, पठानपुरा, बेरीबाग, चकहरेटी क्षेत्रों से आज तक अवैैध कब्जे नहीं हटवाए गए। क्षेत्र के लोग भी कई बार उच्चाधिकारियों से अवैध कब्जा करने वालों की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कब्जे हटवाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई आज तक नहीं हुई है।
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कहीं जगहों पर अवैध निर्माण कर ढमोला नदी को नाले का रूप दे दिया गया है। ऐसे में बरसात के दिनों में बड़ी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। सिंचाई विभाग और प्रशासन के लचीले पन के पीछे से राजनीतिक हस्तक्षेप भी बड़ा कारण है।
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नहीं की गई तारबंदी
सहारनपुर। चार माह पूर्व तत्कालीन डीएम पीके पांडेय ने ढमोला नदी की खाली पड़ी जमीन पर तारबंदी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन संबंधित विभाग ने आज तक तारबंदी नहीं कराई है। इसके साथ ही गांव चकहरेटी में ढमोला नदी की जमीन पर बने 410 मकान मालिकों को नोटिस देकर भूमि खाली कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन चार माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
151 के खिलाफ हुई थी एफआईआर
सहारनपुर। ढमोला नदी की जमीन पर कब्जा करने वाले 151 लोगों को चिह्नित कर प्रशासन ने उनके खिलाफ 2016 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुछ लोग मकान बेचकर चले गए तो कुछ ने कोर्ट से स्टे ले लिया। लेकिन लगातार हो रहे नए अवैध निर्माण को रोकने के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है।
नदी की जमीन से हमारा कोई मतलब नहीं
सहारनपुर। ढमोला नदी की जमीन पर हुए अवैध कब्जों को लेकर निर्माण खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राधेश्याम का अलग ही तर्क है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि नदी की जमीन से हमारा कोई मतलब नहीं है। इससे साफ है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते ही ढमोला नदी पर कब्जे हो रहे हैं।