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बच्चियों के साथ हैवानियत की घटनाओं ने मुल्क का सिर शर्म से झुकाया: उलमा
Updated Tue, 17 Apr 2018 01:27 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। जम्मू के कठुआ और गुजरात समेत देश के अलग अलग हिस्सों में हुई मासूम बच्चियों के साथ रेप के बाद हत्या की घटनाओं पर देवबंदी उलमा ने अफसोस जताया है। उलमा का कहना है कि मुल्क में लगातार बढ़ रही इस प्रकार की घटनाओं से सारी दुनिया में देश को छवि खराब हो रही है। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वह इन मामलों में कड़ा रुख अपनाए।
सोमवार को तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि मुल्क में मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत किए जाने का जो सिलसिला चल रहा है ये बहुत ही खतरनाक है। इससे पूरी दुुनिया में देश की छवि खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि अफसोसनाक बात ये है कि मुजरिम जुर्म करता है जेल जाता है और बाद में सबूतों के अभाव में छूट जाता है। ऐसे में जरूरत इस बात कि है कि इन मुजरिमों को ऐसी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए जो दूसरों के लिए सबक बने। मौलाना वाजदी ने कहा कि इस तरह के अपराध के लिए इस्लाम में जो सजा रखी गई है और सजा का जो निजाम है उससे जरायम पेशा लोगों का हौसला नहीं होता और जो लोग जुर्म कर बैठते हैं उनकी सजा को देखकर दूसरों को सबक मिल जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि काबिल-ए-तारीफ बात ये है कि मुल्क में इंसानियत पूरी तरह जागरूक हुई है और धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर दोषियों के खिलाफ आवाज बुलंद हो रही है। मानवता की जागरूकता से उम्मीद की जा सकती है कि घिनौनी हरकत करने वालों को सख्त सजा मिलेगी।
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सोमवार को तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि मुल्क में मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत किए जाने का जो सिलसिला चल रहा है ये बहुत ही खतरनाक है। इससे पूरी दुुनिया में देश की छवि खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि अफसोसनाक बात ये है कि मुजरिम जुर्म करता है जेल जाता है और बाद में सबूतों के अभाव में छूट जाता है। ऐसे में जरूरत इस बात कि है कि इन मुजरिमों को ऐसी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए जो दूसरों के लिए सबक बने। मौलाना वाजदी ने कहा कि इस तरह के अपराध के लिए इस्लाम में जो सजा रखी गई है और सजा का जो निजाम है उससे जरायम पेशा लोगों का हौसला नहीं होता और जो लोग जुर्म कर बैठते हैं उनकी सजा को देखकर दूसरों को सबक मिल जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि काबिल-ए-तारीफ बात ये है कि मुल्क में इंसानियत पूरी तरह जागरूक हुई है और धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर दोषियों के खिलाफ आवाज बुलंद हो रही है। मानवता की जागरूकता से उम्मीद की जा सकती है कि घिनौनी हरकत करने वालों को सख्त सजा मिलेगी।
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