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सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है मानकों से खिलवाड़

Sat, 24 Feb 2018 12:06 AM IST
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:06 AM IST
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सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है मानकों से खिलवाड़
सहारनपुर। सड़कों के निर्माण में ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से हर सड़क के निर्माण में तकनीक से खिलवाड़ हो रहे हैं। यही कारण है कि आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। हाल ही में सहारनपुर की ज्यादातर सड़कों के निर्माण का काम चल रहा है। मगर, सड़क निर्माण के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। यह किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि सभी विभागों में एक जैसी ही कहानी है। घटिया सामग्री के इस्तेमाल से सड़कें भी उखड़ रही हैं। सड़क बनाने में सबसे महत्वपूर्ण पहलू डामर (तारकोल) की खपत भी नहीं के बराबर हो रही है। इससे चंद दिनों में सड़क टूट रही है।
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सहारनपुर की ज्यादातर सड़कों की हालत इन दिनों खस्ताहाल हो चुकी है। इन सड़कों का निर्माण तो किया जा रहा है, मगर मानकों की अनदेखी के चलते इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों की मानें तो सड़क की कुल मोटाई का करीब चार फीसदी हिस्सा ऊपरी परत का होता है, यानि वो परत जिस पर बिटुमिन (डामर) का प्रयोग किया जाता है। यदि इस परत की मोटाई, डामर की मात्रा और ढलान तय मानकों अनुरूप हो तो ऐसी स्थिति निर्मित न हो। आलम ये है कि शहर में विभिन्न परियोजनाओं के तहत एसडीए (सहारनपुर विकास प्राधिकरण) और अन्य विभागों द्वारा बनाई गई नई सड़कों की ऊपरी सतह गिट्टियां उखड़कर सड़क पर बिखरी पड़ी हैं।
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इनकी हालत भी देखो
एक साल में दिल्ली-गंगोह रोड न जाने कितनी बार बनी और बिगड़ी। कोर्ट रोड, आवास विकास की सड़क, लिंक रोड, अस्पताल रोड, सहारनपुर-नागल रोड, कोर्ट रोड, सहारनपुर-छुटमलपुर रोड सहित कई सड़कों का निर्माण हुए ज्यादा समय नहीं बीता है, लेकिन इनके अधिकांश हिस्से में ऊपरी सतह उखड़ गई है। यहीं स्थिति पीडब्लूडी और एनएचएआई की सड़कों के साथ हैं।
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जानकारों के मुताबिक इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के नियम 37 के तहत निर्माण किया जाए, तो 15 से 20 सालों तक सड़कों की मरम्मत की नौबत ही नहीं आएगी।

ये हैं फायदे का गणित
अनुमान के मुताबिक एक किमी लंबी और 14 मी चौड़ी फोरलेन सड़क के निर्माण में सबसे ऊपरी परत में 1 लाख 11 हजार 720 किलो डामर लगता है। डामर का वर्तमान दाम 48 रुपये प्रति किलो है। इस हिसाब से सड़क की ऊपरी परत में ही 52 लाख 75 हजार 40 रुपये का डामर खप जाता है, जबकि सडक़ की कुल लागत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आती है। इस तरह सबसे ज्यादा 23 फीसदी खर्च डामर पर होता है। इसलिए ठेकेदार डामर की मात्रा या परत की मोटाई कम कर ज्यादा मुनाफा अर्जित करना चाहता है।
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सड़कों की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। बनने वाली सभी सड़क की गुणवत्ता दूसरी एजेंसी से जांच कराई जाएगी। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई होगी।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
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