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इस्लाम समाजी जिंदगी में सुधार पर जोर देता है: खान
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:53 AM IST
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भारतीय संविधान व सियासी निजाम शीर्षक से कार्यक्रम का आयोजन
देवबंद (सहारनपुर)। हुज्जतुल इस्लाम एकेडमी की ओर से दारुल उलूम वक्फ में भारतीय संविधान व सियासी निजाम शीर्षक से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर अर्शी खान ने कहा कि इस्लाम जहां समाजी जिंदगी में सुधार पर जोर देता है, वहीं इस्लामिक उसूलों को भी सामने रखता है। इस्लाम का निजाम सियासी व दुनियावी जिंदगी के लिए बहुत मुनासिब होता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने इंसाफ और एक दूसरे से ताल्लुक बनाए रखने का सबक दिया है, यही वजह है कि अगर आप इस्लाम का बारीकी से अध्ययन करें तो इस तरह के बेशुमार सबूत मिल जाएंगे। साथ ही कहा कि इस्लाम मजहब दूसरे मजहब और उसके लोगों के साथ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार करना नहीं सिखाता। हुज्जतुल इस्लाम एकेडमी के डायरेक्टर मौलाना डॉक्टर शकेब कासमी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से मदरसा छात्रों को भविष्य में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। आगे भी दारुल उलूम वक्फ इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहेगा। जिसके लिए विदेशों से भी मेहमानों को बुलाया जाता रहेगा। इस मौके पर दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना अंजर, इजहार, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, सैय्यद वजाहत शाह, उजैर कैसर, मो. उबैद समेत मदरसा छात्र मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। हुज्जतुल इस्लाम एकेडमी की ओर से दारुल उलूम वक्फ में भारतीय संविधान व सियासी निजाम शीर्षक से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर अर्शी खान ने कहा कि इस्लाम जहां समाजी जिंदगी में सुधार पर जोर देता है, वहीं इस्लामिक उसूलों को भी सामने रखता है। इस्लाम का निजाम सियासी व दुनियावी जिंदगी के लिए बहुत मुनासिब होता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने इंसाफ और एक दूसरे से ताल्लुक बनाए रखने का सबक दिया है, यही वजह है कि अगर आप इस्लाम का बारीकी से अध्ययन करें तो इस तरह के बेशुमार सबूत मिल जाएंगे। साथ ही कहा कि इस्लाम मजहब दूसरे मजहब और उसके लोगों के साथ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार करना नहीं सिखाता। हुज्जतुल इस्लाम एकेडमी के डायरेक्टर मौलाना डॉक्टर शकेब कासमी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से मदरसा छात्रों को भविष्य में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। आगे भी दारुल उलूम वक्फ इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहेगा। जिसके लिए विदेशों से भी मेहमानों को बुलाया जाता रहेगा। इस मौके पर दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना अंजर, इजहार, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, सैय्यद वजाहत शाह, उजैर कैसर, मो. उबैद समेत मदरसा छात्र मौजूद रहे।