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जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीमद्भागवत

Thu, 18 Jan 2018 11:57 PM IST
Updated Thu, 18 Jan 2018 11:57 PM IST
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जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीमद्भागवत
जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीमद्भागवत
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छुटमलपुर। श्री राधे आनंद धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में कस्बे के रुड़की रोड स्थित एक गार्डन मंडप में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक बाल व्यास आचार्य आदित्यानंद जी महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इस लिये मानव जीवन को सफल बनाने के लिये श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। श्रीमद्भागवत कोई पोथी पुराण न होकर श्री भगवान का साक्षात वांगमय है। यह इंसान को जीवन जीने की पूर्ण कला सिखाती है। कथा संचालन प्रमोद भारती और यजमान राधेश्याम डाबर ने बताया कि राधे आनंद ट्रस्ट गो संरक्षण और योग ध्यान साधना, गंगा, गायत्री एवं गीता के प्रचार प्रसार के अलावा निराश्रित असहाय और विपन्न बच्चों की सहायता में भी अपना योगदान करता है। इस दौरान काफी संख्या में पुरुष और महिला श्रद्धालु मौजूद रहे।
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