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56 वर्ष बाद भी मृतक आश्रित को नहीं मिली नौकरी
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:20 AM IST
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गंगोह (सहारनपुर)। सेवा काल के दौरान पति की मौत के बाद पत्नी नौकरी पाने के लिए 53 वर्षों तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के यहां चक्कर काटती रही, लेकिन उसको नौकरी नहीं मिली। इसके बाद उसकी भी मौत हो गई। अब उनका पुत्र भी पिछले तीन वर्षों से विभाग एवं अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। न्याय नहीं मिलने पर अब वह मुख्यमंत्री से सकी शिकायत करने की तैयारी में है।
जड़ौदा पांडा क्षेत्र में चकबंदी कर्ता के रुप में कार्यरत श्रीराम शर्मा की 47 वर्ष की आयु में 20 मार्च 1961 में मृत्यु हो गई थी। उस वक्त उनकी सर्विस के 13 वर्ष बकाया थे। कस्बा तीतरो निवासी उनके पुत्र रामकुमार शर्मा के अनुसार पिता श्रीराम शर्मा की मृत्यु के उपरांत प्रार्थनापत्र दिए जाने के बावजूद न तो उनकी माता लक्ष्मीदेवी को विभाग में नौकरी दी गई और न ही पेंशन आरंभ की गई। विभाग की ओर से नियमानुसार मिलने वाली अनुकंपा की आशा में वह परिवार के साथ टकटकी लगाये रही। इस दौरान इंतजार करते-करते 8 फरवरी 2013 को उसकी माता भी परलोक सिधार गई। उन्होंने बताया कि उसके बाद से वह भी लगातार विभाग और प्रशासन के चक्कर काट रहा है। इस दौरान चकबंदी विभाग ने 30 दिसंबर 2014 को कोषागार निदेशक को पत्र लिखकर पेंशन के बारे में पूछताछ तो की, मगर उसके बाद चुप्पी साध ली। रामकुमार के अनुसार अपने पिता की सर्विस के प्रमाणपत्रों को लेकर वह दर दर की ठोकरें खाता फिर रहा है। मगर कहीं से भी कोई न्याय मिलता नजर नहीं आ रहा है। उसका कहना है कि अब वह मुख्यमंत्री दरबार में जाकर न्याय की गुहार लगाएगा।
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जड़ौदा पांडा क्षेत्र में चकबंदी कर्ता के रुप में कार्यरत श्रीराम शर्मा की 47 वर्ष की आयु में 20 मार्च 1961 में मृत्यु हो गई थी। उस वक्त उनकी सर्विस के 13 वर्ष बकाया थे। कस्बा तीतरो निवासी उनके पुत्र रामकुमार शर्मा के अनुसार पिता श्रीराम शर्मा की मृत्यु के उपरांत प्रार्थनापत्र दिए जाने के बावजूद न तो उनकी माता लक्ष्मीदेवी को विभाग में नौकरी दी गई और न ही पेंशन आरंभ की गई। विभाग की ओर से नियमानुसार मिलने वाली अनुकंपा की आशा में वह परिवार के साथ टकटकी लगाये रही। इस दौरान इंतजार करते-करते 8 फरवरी 2013 को उसकी माता भी परलोक सिधार गई। उन्होंने बताया कि उसके बाद से वह भी लगातार विभाग और प्रशासन के चक्कर काट रहा है। इस दौरान चकबंदी विभाग ने 30 दिसंबर 2014 को कोषागार निदेशक को पत्र लिखकर पेंशन के बारे में पूछताछ तो की, मगर उसके बाद चुप्पी साध ली। रामकुमार के अनुसार अपने पिता की सर्विस के प्रमाणपत्रों को लेकर वह दर दर की ठोकरें खाता फिर रहा है। मगर कहीं से भी कोई न्याय मिलता नजर नहीं आ रहा है। उसका कहना है कि अब वह मुख्यमंत्री दरबार में जाकर न्याय की गुहार लगाएगा।
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