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लाखों के रेहड़े हो गए कबाड़
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सहारनपुर। एक तरफ नगर निगम के पास घरों से कचरा इकट्ठा करने के लिए पर्याप्त रेहड़े नहीं हैं, वहीं लाखों रुपये की कीमत के रेहड़ों को कबाड़ बनने के लिए छोड़ दिया गया है। मल्हीपुर रोड, नगर निगम परिसर समेत शहर में कई जगहों पर खुले में खड़े नगर निगम के रेहड़े कबाड़ बन चुके हैं।
नगर निगम घरों से कचरा इकट्ठा करने के लिए रेहड़ों का इस्तेमाल करता आया है। वर्तमान में नगर निगम को प्रत्येक रेहड़ा करीब 16 हजार रुपये का पड़ रहा है। 70 वार्डों में करीब 450 रेहड़े चालू हालत में होने का दावा किया जा रहा है। यानी प्रत्येक वार्ड में मात्र छह से सात रेहड़े ही दिए गए हैं। यानी रेहड़ों की भारी कमी है। मगर दूसरी ओर नजर डालें तो नगर निगम के सैकड़ों रेहड़े खड़े खड़े कबाड़ बन गए हैं। मल्हीपुर रोड पर आवास विकास चौकी के पास बड़ी संख्या में रेहड़े खाली स्थल पर पड़े हैं। कई साल से पड़े होने की वजह से रेहड़े पूरी तरह खराब हो चुके हैं। हकीकत नगर में भी 50 से अधिक रेहड़े खुले में पड़े होने की बात कही गई है। नगर निगम परिसर में गैराज के पीछे भी नगर निगम के कुछ रेहड़े खुले में पड़े रहने की वजह से कबाड़ बन चुके हैं। शहर में अन्य जगहों पर भी रेहड़े कबाड़ बनने के लिए खुले में छोड़े गए हैं। जबकि थोड़ी सी मरम्मत होकर वही रेहड़े नगर निगम के काम आ सकते हैं, मगर प्रत्येक वर्ष रेहड़ों के लिए बजट बनाकर नए रेहड़े खरीदे जा रहे हैं।
बोर्ड बैठक में हो चुका है हंगामा
रेहड़ों की कमी का मामला नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी उठ चुका है। पिछले दिनों आईटीसी सभागार में हुई बोर्ड बैठक में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रत्येक वार्ड में दो-दो नए रेहड़े देने की बात कही थी, जिसके विरोध में पार्षदों ने हंगामा किया था। पार्षदों का कहना था कि प्रत्येक वार्ड में दो नए रेहड़े भेजने के दावे झूठे हैं। पार्षदों का आरोप था कि पर्याप्त संख्या में रेहड़े नहीं होने की वजह से उनके वार्डों से कूड़ा उठान नहीं हो पा रहा है। सफाईकर्मी सफाई कर कचरा सड़कों किनारे छोड़कर चले जाते हैं।
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नगर निगम के पास पुराने रेहड़ों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में नगर निगम ने कुछ वार्डों में ही रेहड़ों को खड़ा किया हुआ है। जल्द ही रेहड़ों की छटनी कराकर ठीक हो सकने वाले रेहड़ों को दुरुस्त कराकर चालू हालत में लाया जाएगा। कोशिश यही रहेगी कि नगर निगम की संपत्ति कबाड़ होने से बचे। - डॉक्टर गीताराम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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नगर निगम घरों से कचरा इकट्ठा करने के लिए रेहड़ों का इस्तेमाल करता आया है। वर्तमान में नगर निगम को प्रत्येक रेहड़ा करीब 16 हजार रुपये का पड़ रहा है। 70 वार्डों में करीब 450 रेहड़े चालू हालत में होने का दावा किया जा रहा है। यानी प्रत्येक वार्ड में मात्र छह से सात रेहड़े ही दिए गए हैं। यानी रेहड़ों की भारी कमी है। मगर दूसरी ओर नजर डालें तो नगर निगम के सैकड़ों रेहड़े खड़े खड़े कबाड़ बन गए हैं। मल्हीपुर रोड पर आवास विकास चौकी के पास बड़ी संख्या में रेहड़े खाली स्थल पर पड़े हैं। कई साल से पड़े होने की वजह से रेहड़े पूरी तरह खराब हो चुके हैं। हकीकत नगर में भी 50 से अधिक रेहड़े खुले में पड़े होने की बात कही गई है। नगर निगम परिसर में गैराज के पीछे भी नगर निगम के कुछ रेहड़े खुले में पड़े रहने की वजह से कबाड़ बन चुके हैं। शहर में अन्य जगहों पर भी रेहड़े कबाड़ बनने के लिए खुले में छोड़े गए हैं। जबकि थोड़ी सी मरम्मत होकर वही रेहड़े नगर निगम के काम आ सकते हैं, मगर प्रत्येक वर्ष रेहड़ों के लिए बजट बनाकर नए रेहड़े खरीदे जा रहे हैं।
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बोर्ड बैठक में हो चुका है हंगामा
रेहड़ों की कमी का मामला नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी उठ चुका है। पिछले दिनों आईटीसी सभागार में हुई बोर्ड बैठक में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रत्येक वार्ड में दो-दो नए रेहड़े देने की बात कही थी, जिसके विरोध में पार्षदों ने हंगामा किया था। पार्षदों का कहना था कि प्रत्येक वार्ड में दो नए रेहड़े भेजने के दावे झूठे हैं। पार्षदों का आरोप था कि पर्याप्त संख्या में रेहड़े नहीं होने की वजह से उनके वार्डों से कूड़ा उठान नहीं हो पा रहा है। सफाईकर्मी सफाई कर कचरा सड़कों किनारे छोड़कर चले जाते हैं।
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नगर निगम के पास पुराने रेहड़ों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में नगर निगम ने कुछ वार्डों में ही रेहड़ों को खड़ा किया हुआ है। जल्द ही रेहड़ों की छटनी कराकर ठीक हो सकने वाले रेहड़ों को दुरुस्त कराकर चालू हालत में लाया जाएगा। कोशिश यही रहेगी कि नगर निगम की संपत्ति कबाड़ होने से बचे। - डॉक्टर गीताराम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।