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मौसम का मिजाज तोड़ सकता है दस साल पुराना रिकार्ड
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मौसम का मिजाज तोड़ सकता है दस साल पुराना रिकार्ड
सहारनपुर। मौसम का यह मिजाज 10 साल पुराना रिकार्ड तोड़ने की तरफ बढ़ रहा है। शनिवार को न्यूनतम तापमान शून्य पर पहुंच गया, जो अगले दिनों में माइनस में पहुंच सकता है। सहारनपुर जिले में 2008 में तापमान माइनस में पहुंचा था, तब जबरदस्त पाला पड़ा था। मौसम वैज्ञानिकों की मानें, तो फिर वैसे ही हालात होने के अनुमान हैं।
जिले में 20 दिसंबर के बाद कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हुई। इसके बाद न्यूनतम तापमान लगातार नीचे लुढ़क रहा है। बीते तीन दिन में ही तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, क्योंकि 25 दिसंबर तक भी न्यूनतम तापमान 4 अथवा 5 डिग्री सेल्सियस चल रहा था, जो शुक्रवार को 1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा और फिर शनिवार को 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मुजफ्फराबाद स्थित मौसम वेधशाला में दर्ज आंकड़े के मुताबिक शनिवार को न्यूनतम तापमान शून्य और अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा। केंद्र के प्रभारी उमेश कुमार का कहना है कि अभी अगले कुछ दिन मौसम का मिजाज ऐसा ही रहने के आसार हैं। अभी बरसात होने की संभावना नहीं के बराबर है।
बीते 10 साल में मौसम के मिजाज पर गौर किया जाए, तो 2008 में न्यूनतम तापमान सबसे कम रहा था। तब न्यूनतम तापमान -1.5 तक पहुंच गया था। पाला पड़ने की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। खेतों में मटर, दाल, आलू और अन्य फसलों के अलावा बागवानी को भी काफी नुकसान हुआ था। यदि मौसम का यही हाल रहा, तो जनवरी के प्रथम सप्ताह में बीते 10 साल का रिकार्ड टूट सकता है।
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---- कंपकपाते स्कूल पहुंच रहे बच्चे
सुबह और रात में कोहरा पड़ रहा है। कड़ाके की सर्दी में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को झेलनी पड़ रही है, तो दैनिक यात्रियों को भी ट्रेन और बसों में सफर के लिए परेशानी हो रही है। कोहरे और सूखी सर्दी की वजह से सांस के मरीजों की तकलीफ भी बढ़ गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि मौसम के असर की वजह से सांस के रोगियों को सावधान रहने की जरूरत है। उधर, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और अन्य स्थानों पर लोगों को ठंड से बचने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। खासकर यात्रा करने के दौरान बच्चों को साथ लेकर चलने वाले रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर परेशान होते दिखाई दे रहे हैं। नगर निगम की तरफ से शहर में प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था भी की गई है।
---------- पिछल10 सालों का तापमान
-- वर्ष ---- नवंबर ----- दिसंबर ---- जनवरी
2008--- (5.6--30) -- (4.0--27)------ (-1.5 --27)
2009-- (4.5--28)--- (10--31.5)------(4.2--27)
2010--(10--31.5)---(3.5--24)------ (2.8--24.5)
2011--(8.6--31)---(0.2--28.5)------ (3.0--25)
2012-- (6.5--29)---(2.0--27)-------- (2.0--23)
2013-- (6.2--27)---(2.8--28)--------(2.0--24)
2014-- (4.4--28)---(1.4--27)--------(1.0--23)
2015-- (8.0--31.4)--(0--27)----------(3.0--26)
2016-- (4.5--32.2)---(1.0--21.5)-----(1.0--25)
2017-- (3.2--28)---(2.5--25)---------(1.5--23)
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सहारनपुर। मौसम का यह मिजाज 10 साल पुराना रिकार्ड तोड़ने की तरफ बढ़ रहा है। शनिवार को न्यूनतम तापमान शून्य पर पहुंच गया, जो अगले दिनों में माइनस में पहुंच सकता है। सहारनपुर जिले में 2008 में तापमान माइनस में पहुंचा था, तब जबरदस्त पाला पड़ा था। मौसम वैज्ञानिकों की मानें, तो फिर वैसे ही हालात होने के अनुमान हैं।
जिले में 20 दिसंबर के बाद कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हुई। इसके बाद न्यूनतम तापमान लगातार नीचे लुढ़क रहा है। बीते तीन दिन में ही तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, क्योंकि 25 दिसंबर तक भी न्यूनतम तापमान 4 अथवा 5 डिग्री सेल्सियस चल रहा था, जो शुक्रवार को 1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा और फिर शनिवार को 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मुजफ्फराबाद स्थित मौसम वेधशाला में दर्ज आंकड़े के मुताबिक शनिवार को न्यूनतम तापमान शून्य और अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा। केंद्र के प्रभारी उमेश कुमार का कहना है कि अभी अगले कुछ दिन मौसम का मिजाज ऐसा ही रहने के आसार हैं। अभी बरसात होने की संभावना नहीं के बराबर है।
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बीते 10 साल में मौसम के मिजाज पर गौर किया जाए, तो 2008 में न्यूनतम तापमान सबसे कम रहा था। तब न्यूनतम तापमान -1.5 तक पहुंच गया था। पाला पड़ने की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। खेतों में मटर, दाल, आलू और अन्य फसलों के अलावा बागवानी को भी काफी नुकसान हुआ था। यदि मौसम का यही हाल रहा, तो जनवरी के प्रथम सप्ताह में बीते 10 साल का रिकार्ड टूट सकता है।
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सुबह और रात में कोहरा पड़ रहा है। कड़ाके की सर्दी में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को झेलनी पड़ रही है, तो दैनिक यात्रियों को भी ट्रेन और बसों में सफर के लिए परेशानी हो रही है। कोहरे और सूखी सर्दी की वजह से सांस के मरीजों की तकलीफ भी बढ़ गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि मौसम के असर की वजह से सांस के रोगियों को सावधान रहने की जरूरत है। उधर, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और अन्य स्थानों पर लोगों को ठंड से बचने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। खासकर यात्रा करने के दौरान बच्चों को साथ लेकर चलने वाले रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर परेशान होते दिखाई दे रहे हैं। नगर निगम की तरफ से शहर में प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था भी की गई है।
---------- पिछल10 सालों का तापमान
-- वर्ष ---- नवंबर ----- दिसंबर ---- जनवरी
2008--- (5.6--30) -- (4.0--27)------ (-1.5 --27)
2009-- (4.5--28)--- (10--31.5)------(4.2--27)
2010--(10--31.5)---(3.5--24)------ (2.8--24.5)
2011--(8.6--31)---(0.2--28.5)------ (3.0--25)
2012-- (6.5--29)---(2.0--27)-------- (2.0--23)
2013-- (6.2--27)---(2.8--28)--------(2.0--24)
2014-- (4.4--28)---(1.4--27)--------(1.0--23)
2015-- (8.0--31.4)--(0--27)----------(3.0--26)
2016-- (4.5--32.2)---(1.0--21.5)-----(1.0--25)
2017-- (3.2--28)---(2.5--25)---------(1.5--23)