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उगते चंद्रमा अर्घ्य देकर ही व्रत माना जाएगा पूरा
Updated Sat, 27 Oct 2018 12:24 AM IST
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सहारनपुर। करवाचौथ पर सूर्य उदय से पहले व्रत शुरू होगा, जो उगते चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ ही पूरा माना जाएगा। शाम 5:33 से 6:51 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। करवाचौथ की कथा सुनने के बाद बायना निकालें। इसके साथ ही भगवान शिव-पार्वती और गणेश की पूजा अति फलदायी रहेगी।
विप्र परिवार के मंत्री व ज्योतिषाचार्य पंडित योगेश दीक्षित ने बताया कि सुहागिन को करवाचौथ पर शुभ मुहूर्त और विधि-विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए। व्रत सूर्य उदय से पहले शुरू होगा। शनिवार को चतुर्थी तिथि शाम 6:37 से आरंभ होगी, जो रविवार को शाम 4:54 तक ही रहेगी। व्रत की पूजा का मुहूर्त शाम 5:33 से 6:51 बजे तक रहेगा। चंद्रमा उदय का समय रात्रि 7:56 है। करवाचौथ का व्रत उगते चंद्रमा को देखने के बाद ही पूरा माना जाएगा। महिलाएं छलनी में घी का दिया रखकर चंद्रमा देखें और अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करें।
ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित सिद्धपीठ शिव बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि करवा चौथ का व्रत अखंड सुहाग देने वाला है। व्रत पति-पत्नी के प्रति अपार प्रेम, त्याग एवं उत्सर्ग की चेतना लेकर आता है। कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। इस दिन वट वृक्ष में भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिक और श्री गणेश जी विराजमान रहते हैं। वट वृक्ष में इनका निवास मानकर वृक्ष को प्रणाम करें। घर या मंदिर में सबसे पहले माता पार्वती, फिर भगवान शिव, स्वामी कार्तिक और श्री गणेश की पूजा करनी चाहिए। करवाचौथ पर शिव-पार्वती की पूजा अति फलदायी है। मां पार्वती को घोर तपस्या करने के बाद भगवान शिव प्राप्त हुए थे। इसीलिए माता पार्वती-शिव की पूजा करने से विवाहिता को अखंड सुहाग की प्राप्ति होगी। श्रद्धाभाव से व्रत रखकर उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलना चाहिए।
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विप्र परिवार के मंत्री व ज्योतिषाचार्य पंडित योगेश दीक्षित ने बताया कि सुहागिन को करवाचौथ पर शुभ मुहूर्त और विधि-विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए। व्रत सूर्य उदय से पहले शुरू होगा। शनिवार को चतुर्थी तिथि शाम 6:37 से आरंभ होगी, जो रविवार को शाम 4:54 तक ही रहेगी। व्रत की पूजा का मुहूर्त शाम 5:33 से 6:51 बजे तक रहेगा। चंद्रमा उदय का समय रात्रि 7:56 है। करवाचौथ का व्रत उगते चंद्रमा को देखने के बाद ही पूरा माना जाएगा। महिलाएं छलनी में घी का दिया रखकर चंद्रमा देखें और अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करें।
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ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित सिद्धपीठ शिव बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि करवा चौथ का व्रत अखंड सुहाग देने वाला है। व्रत पति-पत्नी के प्रति अपार प्रेम, त्याग एवं उत्सर्ग की चेतना लेकर आता है। कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। इस दिन वट वृक्ष में भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिक और श्री गणेश जी विराजमान रहते हैं। वट वृक्ष में इनका निवास मानकर वृक्ष को प्रणाम करें। घर या मंदिर में सबसे पहले माता पार्वती, फिर भगवान शिव, स्वामी कार्तिक और श्री गणेश की पूजा करनी चाहिए। करवाचौथ पर शिव-पार्वती की पूजा अति फलदायी है। मां पार्वती को घोर तपस्या करने के बाद भगवान शिव प्राप्त हुए थे। इसीलिए माता पार्वती-शिव की पूजा करने से विवाहिता को अखंड सुहाग की प्राप्ति होगी। श्रद्धाभाव से व्रत रखकर उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलना चाहिए।
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