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इधर नदी दम तोड़ती, उधर सूखते खेत
Updated Fri, 16 Mar 2018 11:56 PM IST
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सहारनपुर। विभावरी संस्था की ओर से तिवाया स्थित एक सभागार में कवि सुरेशचंद जैन के सम्मान में काव्य संध्या का आयोजन किया गया।
काव्य संध्या में कवियों से एक से एक उम्दा रचनाएं सुनाकर समा बांध दिया। वरिष्ठ कवि डॉ. आरपी सारस्वत ने पढा कि एक साथ कैसे निभे, जीवन के संकेत, इधर नदी दम तोड़ती, उधर सूखते खेत। डॉ. इरशाद सागर ने अपनी रचना सुनाई कि या रब हमारे दौर की करवट बदल भी दे, कब तक सहेंगे और गुनहगार की तरह। इनके अलावा हरिराम पथिक, बालेश्वर जैन, डॉ. बिजेंद्रपाल शर्मा, डॉ. अमजद अजीम, बिलाल सहानपुरी आदि ने भी एक से एक अच्छी रचनाएं सुनाईं। आशीष जैन, विनय रानी, विनीत राय जैन, सुमन जैन, शिवदेवी आदि रहे।
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काव्य संध्या में कवियों से एक से एक उम्दा रचनाएं सुनाकर समा बांध दिया। वरिष्ठ कवि डॉ. आरपी सारस्वत ने पढा कि एक साथ कैसे निभे, जीवन के संकेत, इधर नदी दम तोड़ती, उधर सूखते खेत। डॉ. इरशाद सागर ने अपनी रचना सुनाई कि या रब हमारे दौर की करवट बदल भी दे, कब तक सहेंगे और गुनहगार की तरह। इनके अलावा हरिराम पथिक, बालेश्वर जैन, डॉ. बिजेंद्रपाल शर्मा, डॉ. अमजद अजीम, बिलाल सहानपुरी आदि ने भी एक से एक अच्छी रचनाएं सुनाईं। आशीष जैन, विनय रानी, विनीत राय जैन, सुमन जैन, शिवदेवी आदि रहे।