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कार्यशाला में किसानों को दिए मुधमक्खी पालन के टिप्स
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:36 AM IST
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किसानों को दिए मुधमक्खी पालन के टिप्स
सहारनपुर। विश्व मधुमक्खी दिवस पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार को मधुमक्खी पालन के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने मधुमक्खी पालकों को उनमें लगने वाली बीमारियों और उपचार के बारे में भी बताया।
कंपनी बाग स्थित सभागार में आयोजित कार्यशाला में मधुमक्खी विशेषज्ञ तेजपाल सिंह ने मधुमक्खियों के माइग्रेशन के बारे में बताया कि जहां फ्लोरा ज्यादा होता है, वहीं पर मधुमक्खी के डिब्बों को माइग्रेट कराना चाहिए। माइग्रेशन हमेशा रात के समय ही किया जाना चाहिए। सहायक कीट विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को मधुमक्खियों में बीमारी लगने पर उनकी रोकथाम के विषय में जानकारी दी। डॉ. आईके कुशवाहा ने कहा कि मधुमक्खी फसलों से पराग लेती है, इसलिए फसलों पर अधिकतर जैविक रसायनों का ही छिड़काव किया जाना चाहिए ताकि मधुमक्खी को कोई नुकसान न हो। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने किसानों से मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यशाला के बाद कृषकों को ज्योति ग्रामोद्योग संस्थान रंगैल व हाईटेक बी कीपिंग अनुसंधान केंद्र बीराखेड़ी में भ्रमण के लिए भी ले जाया गया। अजय सैनी और प्रियवृत्त शर्मा ने शहद की प्रोसेसिंग के बारे में कृषकों को जानकारी दी। अशोक कुमार, तेजपाल सिंह, अश्वनी कुमार आदि रहे।
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सहारनपुर। विश्व मधुमक्खी दिवस पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार को मधुमक्खी पालन के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने मधुमक्खी पालकों को उनमें लगने वाली बीमारियों और उपचार के बारे में भी बताया।
कंपनी बाग स्थित सभागार में आयोजित कार्यशाला में मधुमक्खी विशेषज्ञ तेजपाल सिंह ने मधुमक्खियों के माइग्रेशन के बारे में बताया कि जहां फ्लोरा ज्यादा होता है, वहीं पर मधुमक्खी के डिब्बों को माइग्रेट कराना चाहिए। माइग्रेशन हमेशा रात के समय ही किया जाना चाहिए। सहायक कीट विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को मधुमक्खियों में बीमारी लगने पर उनकी रोकथाम के विषय में जानकारी दी। डॉ. आईके कुशवाहा ने कहा कि मधुमक्खी फसलों से पराग लेती है, इसलिए फसलों पर अधिकतर जैविक रसायनों का ही छिड़काव किया जाना चाहिए ताकि मधुमक्खी को कोई नुकसान न हो। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने किसानों से मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यशाला के बाद कृषकों को ज्योति ग्रामोद्योग संस्थान रंगैल व हाईटेक बी कीपिंग अनुसंधान केंद्र बीराखेड़ी में भ्रमण के लिए भी ले जाया गया। अजय सैनी और प्रियवृत्त शर्मा ने शहद की प्रोसेसिंग के बारे में कृषकों को जानकारी दी। अशोक कुमार, तेजपाल सिंह, अश्वनी कुमार आदि रहे।
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