{"_id":"5c797821bdec224e0121eaed","slug":"61551464481-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं बन पाई डीपीआर, स्मार्ट सिटी कैसे होगी साकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं बन पाई डीपीआर, स्मार्ट सिटी कैसे होगी साकार
विज्ञापन
सहारनपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना में सहारनपुर का चयन हुए 13 माह बीत चुके हैं। अभी तक योजना धरातल पर नहीं उतरी। योजना को लेकर सहारनपुर से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक बैठकों का ही दौर चल रहा है। करीब पांच माह से डीपीआर बन रही है, लेकिन पूरी नहीं हुई। आखिर स्मार्ट सिटी योजना कब साकार होगी, तब मिलेगा शहर के लोगों को इसका लाभ।
केंद्र सरकार ने प्रत्येक वर्ष सौ शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय लिया था, मगर हकीकत यह है कि प्रशासनिक मशीनरी एक साल से अधिक समय में बुनियादी स्तर का काम भी पूरा नहीं कर पा रही है। चौथे चरण में 19 जनवरी 2018 को सहारनपुर का चयन स्मार्ट सिटी योजना के लिए हुआ था। तब नगरवासियों ने उम्मीद की थी कि 2018 में ही योजना का असर धरातल पर नजर आने लगेगा, मगर तब से अब तक केवल बैठकें ही चल रही हैं। कई समितियां और कंपनियां भी बनी हैं। पिछले करीब पांच माह से डीपीआर पर काम चल रहा है। पहले नगर निगम के अधिकारी दिसंबर 2018 तक डीपीआर बनकर तैयार होने का दावा कर रहे थे, मगर डीपीआर पर अब भी काम चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि डीपीआर के लिए पहले शहर का सर्वे किया जा रहा है, जिसके बाद ही डीपीआर को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इन समितियों का हुआ गठन
- योजना के तहत दो डायरेक्टर नियुक्त, जिनमें पूर्व कमिश्नर आरपी शुक्ल और पूर्व डीएम चौब सिंह वर्मा शामिल हैं।
- कमिश्नर सीपी त्रिपाठी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन बने।
- योजना के तहत एसवीपी (स्पेशल परपज व्हीकल कमेटी)गठित की गई है, जिसमें करीब नौ सदस्य हैं।
- सहारनपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी बनाई गई।
- पीएमसी यानी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट का चयन हुआ, जो डीपीआर बना रही है।
- योजना के तहत एडवाइजरी फोरम का गठन किया, जिसमें सांसद, विधायक समेत कई जन प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह करने के हैं निर्देश
- सबसे पहले छोटी परियोजनाओं पर कार्य हो।
- पहले, दूसरे और तीसरे चरण में चयनित शहरों की तर्ज पर कार्य हों।
- जो भी कार्य कराए जाएं आम आदमी को उनसे अवगत कराया जाए।
- उसी परियोजना पर काम किया जाए, जो सरकार द्वारा स्वीकृत है।
- फिजिबिलिटी रिपोर्ट के बाद ही डीपीआर बनाई जाए।
- तकनीकी समिति की बैठकों में आईआईटी रुड़की के एक्सपर्ट्स को शामिल करें।
स्मार्ट सिटी योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसमें एक-एक बिंदु पर बड़ी सोच समझकर और व्यवस्थित ढंग से काम किया जा रहा है। फिलहाल डीपीआर बनाने का कार्य चल रहा है, जिससे पहले टीमें शहर का सर्वे कर रही हैं। डीपीआर का काम पूरा होने के बाद उसका अनुमोदन होगा, जिसके बाद टेंडर होंगे। --- आलोक श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी, स्मार्ट सिटी योजना।
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने प्रत्येक वर्ष सौ शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय लिया था, मगर हकीकत यह है कि प्रशासनिक मशीनरी एक साल से अधिक समय में बुनियादी स्तर का काम भी पूरा नहीं कर पा रही है। चौथे चरण में 19 जनवरी 2018 को सहारनपुर का चयन स्मार्ट सिटी योजना के लिए हुआ था। तब नगरवासियों ने उम्मीद की थी कि 2018 में ही योजना का असर धरातल पर नजर आने लगेगा, मगर तब से अब तक केवल बैठकें ही चल रही हैं। कई समितियां और कंपनियां भी बनी हैं। पिछले करीब पांच माह से डीपीआर पर काम चल रहा है। पहले नगर निगम के अधिकारी दिसंबर 2018 तक डीपीआर बनकर तैयार होने का दावा कर रहे थे, मगर डीपीआर पर अब भी काम चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि डीपीआर के लिए पहले शहर का सर्वे किया जा रहा है, जिसके बाद ही डीपीआर को अंतिम रूप दिया जाएगा।
विज्ञापन
इन समितियों का हुआ गठन
- योजना के तहत दो डायरेक्टर नियुक्त, जिनमें पूर्व कमिश्नर आरपी शुक्ल और पूर्व डीएम चौब सिंह वर्मा शामिल हैं।
- कमिश्नर सीपी त्रिपाठी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन बने।
- योजना के तहत एसवीपी (स्पेशल परपज व्हीकल कमेटी)गठित की गई है, जिसमें करीब नौ सदस्य हैं।
- सहारनपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी बनाई गई।
- पीएमसी यानी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट का चयन हुआ, जो डीपीआर बना रही है।
- योजना के तहत एडवाइजरी फोरम का गठन किया, जिसमें सांसद, विधायक समेत कई जन प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह करने के हैं निर्देश
- सबसे पहले छोटी परियोजनाओं पर कार्य हो।
- पहले, दूसरे और तीसरे चरण में चयनित शहरों की तर्ज पर कार्य हों।
- जो भी कार्य कराए जाएं आम आदमी को उनसे अवगत कराया जाए।
- उसी परियोजना पर काम किया जाए, जो सरकार द्वारा स्वीकृत है।
- फिजिबिलिटी रिपोर्ट के बाद ही डीपीआर बनाई जाए।
- तकनीकी समिति की बैठकों में आईआईटी रुड़की के एक्सपर्ट्स को शामिल करें।
स्मार्ट सिटी योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसमें एक-एक बिंदु पर बड़ी सोच समझकर और व्यवस्थित ढंग से काम किया जा रहा है। फिलहाल डीपीआर बनाने का कार्य चल रहा है, जिससे पहले टीमें शहर का सर्वे कर रही हैं। डीपीआर का काम पूरा होने के बाद उसका अनुमोदन होगा, जिसके बाद टेंडर होंगे। --- आलोक श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी, स्मार्ट सिटी योजना।
विज्ञापन